Eligibility For UPSC Exam | IAS Civil Service Exam in Hindi

हर भारतीय युवा जो Sarkari Naukari या Government Job करना चाहता है उसकी पहली पसंद IAS  बनना होता है लेकिन कुछ भी बनने या हासिल करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी होना अनिवार्य है।

हम आपको IAS के बारे में पूरी जानकारी देने का प्रयास इस लेख के द्वारा करेंगे IAS बनने  के लिए बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर जानना बहुत अनिवार्य है और वह प्रश्न और उनके उत्तर विस्तार पूर्वक आपको बताएं जा रहे हैं।

Who Is IAS | IAS कौन होता है?

IAS  का Full Form भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) है IAS भारत सरकार की सबसे बड़ी Sarkari Naukari है जिसकी परीक्षा UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) द्वारा आयोजित की जाती है और  नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

IAS अधिकारी केंद्र तथा राज्य सरकार  मैं SDM, DM, Collector, Joint Secratary, Chief Secratry, Cabinet Secretary etc.  उच्चतम पदों पर कार्य करते हैं।

IAS अधिकारी एक सम्माननीय और पावरफुल व्यक्ति  होता है   जिसके कारण युवाओं में इसके  प्रति   बहुत अधिक आकर्षण होता है अब प्रश्न यह उठता है  की IAS कैसे बनते हैं?

How To Become an IAS | IAS कैसे बनते है? 

प्रतिवर्ष लाखों युवा IAS Exam देते  हैं किंतु सफलता  कुछ लोगों को मिलती है इसका मतलब  यह है कि IAS बनना इतना आसान नहीं है किंतु  पूरी लगन और मेहनत के साथ तैयारी की जाए तो मुश्किल भी नहीं है आइए अब हम Step By Step IAS कैसे बनते हैं इसके Process को 6 Step में समझते हैं।

1. Educational Qualification Required For IAS Exam

 IAS Exam आवेदन के लिए  किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से Graduate होना अनिवार्य है Graduation आप किसी भी विषय या माध्यम से कर सकते हैं अर्थात यदि आपको IAS बनना है तो पहले Graduation करना अनिवार्य है उसके बाद ही आप IAS Exam के लिए आवेदन कर सकते हैं।

2.  Age Required For IAS Exam

IAS Exam के लिए AGE Category Wise Decide की जाती है

CategoryMinimum AgeMaximum AgeMaximum Attempt
General Candidate21 Years32 Years6 Attempts
OBC Candidate21 Years35 Years9 Attempts
EWS Candidate21 Years32 Years6 Attempts
SC/ST Candidate21 Years37 YearsUnlimited till the age limit
Physicaly Disabled candidates (Blind,Deaf-Mute,Orthopedic)21 Years42 YearsGeneral and OBC Candidates-9 Attempts,
SC/ST Candidates-Unlimited till the age limit

3. Apply for IAS Civil Services Exam

यदि आप Education Quallification  और Age Criteria  को Fullfill कर लेते हैं तो आप IAS Exam  के लिए आवेदन कर सकते हैं  यह Exam  UPSC   द्वारा आयोजित किया जाता है इसका आवेदन Online UPSC की Offical Website https://upsconline.nic.in/  पर कर सकते हैं।

Online  आवेदन के  बाद तीन  चरणों में परीक्षा आयोजित होती है 1. Preliminary Exam 2. Main Exam. 3. Interview.

Note:- Online आवेदन करने के पश्चात 1. Preliminary Exam 2. Main Exam. 3. Interview. के लिए अलग से कोई Applicaton form fill करने की आवश्यकता नहीं होती। 

4. IAS Civil Services | UPSC Preliminary Exam

आवेदन करने के पश्चात सबसे पहले Premiminary Exam  होता है इसमें 200-200 Marks  के Objective Type दो Paper होते हैं  प्रत्येक Paper 2 घंटे का होता है और इसमें Negative Marking भी होती है यह Paper हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में होता है।

पहला Paper -1 GSAT(General Studies Aptitude Test)  और दूसरा Paper-2 CSAT(Civil Service Aptitude Test)  होता है  यह Paper  Quallifing Paper होता है जो Main Exam के लिए अनिवार्य है किंतु  इसके Marks Final Result में  Count  नहीं होते।

5. IAS Civil Services | UPSC Mains Exam

जब आप Preliminary Exam  Clear कर लेते हैं तो  उसके बाद Main Exam  होता है  जो Preliminary Exam  के मुकाबले काफी मुश्किल होता है यह Writen Exam  होता है इसमें  कुल 9 Paper होते हैं जिसके कुल अंक 1750  होते हैं  जिसमें 2 Paper 300-300 Marks   के होते हैं   बाकी 7 Paper 250-250 Marks  के होते हैं।

IAS Main Exam  काफी मुश्किल होता है जिसमें बहुत कम  अभ्यार्थी  पास होते हैं। IAS Main Exam Clear करने के पश्चात तीसरा चरण है Personal Interview.

6. IAS Civil Services | UPSC Interview Exam

जब आप IAS Main Exam  Clear कर लेते हैं उसके बाद आपको Personal Interview  के लिए बुलाया जाता है जोकि 45 मिनट का होता है इंटरव्यू लेने के लिए कुछ लोगों का पैनल होता है जिसमें 3 से 4 लोग आपका Personal Interview लेते हैं।

इसमें आपसे  आपकी Personal Life, Current Affairs, General Knowledge और World Wide किसी भी विषय से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं Personal Interview 275 Marks  का होता है Personal Interview  को तीनों चरणों में सबसे मुश्किल माना जाता है 

Personal Interview Clear होने के पश्चात एक Merit List बनती है जिसमें उच्च अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को कुल Vacancy  के आधार पर चुना जाता है  और जिन अभ्यर्थियों की Rank 1 से 100  तक होती है उनको ही IAS  के लिए चयनित किया जाता है 

इस बात से यह पता लगता है कि अगर आपको IAS बनना है तो केवल UPSC  EXam Clear करना ही अनिवार्य नहीं है बल्कि उसमें उच्च Rank हासिल करना भी अनिवार्य है तभी आप एक IAS  अधिकारी बन सकते हैं ।

Note:- Prelims Or Main Exam Clear होने के पश्चात Interview देना  अनिवार्य होता है इसमें  किसी प्रकार की कोई छूट नहीं होती। 

UPSC Civil Services Exam भारत की किन भाषाओं में दिया जा सकता है?

IAS Main Exam  में उम्मीदवारों को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची मैं शामिल 22  भाषाओं में से किसी में भी उत्तर देने की छूट प्रदान की गई है।

उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा के Form में Main Exam  के लिए जिस भाषा को अपने माध्यम के तौर पर अंकित करते हैं, उन्हें Main Exam के सभी प्रश्न पत्रों के उत्तर उसी भाषा में लिखने होते हैं। केवल साहित्य के विषयों में यह छूट है कि उम्मीदवार उसी भाषा की लिपि में उत्तर लिखता है, चाहे उसका माध्यम वह भाषा न हो।

UPSC Geology Syllabus Optional Subject in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC Geology Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC Geology Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC GEOLOGY SYLLABUS – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

सामान्य भूविज्ञान

  • सौरतंत्र, उल्कापिंड, पृथ्वी का उद्भव एवं अंतरंग तथा पृथ्वी की आयु, ज्वालामुखी -कारण, प्रभाव, भारत के भूकंपी क्षेत्र, दूवीपाभ चाप, खादयों एवं महासागर-मध्य कटक।
  • महादवीपीय अपोढ़।
  • समुद्र अधस्तल विस्तार, प्लेट विवर्तनिकी।
  • समस्थिति।

भूआकृति विज्ञान एवं सुदूर-संवेदन

  • भूआकृति विज्ञान की आधारभूत संकल्पना।
  • अपक्षय एवं मृदानिर्माण।
  • स्थलरूप, ढाल, एवं अपवाह।
  • भूआकृति चक्र एवं उनकी विवक्षा।
  • आकारिकी एवं इसका संरचनाओं एवं अश्मिकी से संबंध।
  • तटीय भूआकृति विज्ञान।
  • खनिज पूर्वेक्षण में भूआकृति विज्ञान के अनुप्रयोग, सिविल इंजीनियरी।
  • जल विज्ञान एवं पर्यावरणीय अध्ययन।
  • भारतीय उपमहादवीप का भूआकृति विज्ञान, वायव फोटो एवं उनकी विवक्षा-गुण एवं सीमाएं।
  • विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम; कक्षा- परिभ्रमण उपग्रह एवं संवेदन प्रणालियां।
  • भारतीय दूर संवेदन उपग्रह।
  • उपग्रह दत्त उत्पाद, भू-विज्ञान मेँ दूर संवेदन के अनुप्रयोग।
  • भोगोलिक सूचना प्रणालियां (GIS) एवं विश्वव्यापी अवस्थन प्रणाली (GPS) – इसका अनुप्रयोग।

संरचनात्मक भूविज्ञान

  • भूवैज्ञानिक मानचित्रण एवं मानचित्र पठन के सिद्धांत।
  • प्रक्षेप आरेख, प्रतिबल एवं विकृति दीर्घवृत तथा प्रत्यास्थ, सुघट्य एवं श्यन पदार्थ के प्रतिबल्-विकृति संबंध।
  • विरूपित शैली में विकृति चिहनक।
  • विरूपण दशाओं के अंतर्गत खनिजों एवं शैल्रों का व्यवहार वलन एवं अ्रंश वर्गीकरण एवं यांत्रिकी।
  • वलनों, शल्कनों, सरेखणों, जोड़ों एवं भ्रंशों, विषमविन्यासों का संरचनात्मक विश्लेषण, क्रिव्स्टलन एवं विरूपण के बीच समय संबंध।

जीवाश्म विज्ञान

  • जाति-परिभाषा एवं नामपद्धति; गुरू जीवाश्म एवं सूक्ष्म जीवाश्म; जीवाश्म संरक्षण की विधियां; विभिन्‍न प्रकार के सूक्ष्म जीवाश्म।
  • सह संबंध, पेट्रोलियम अनवेषण, पुराजलवायवी एवं पुरासमुद्रविज्ञानीय अध्ययनों मेँ सूक्ष्म, जीवाश्मों का अनुप्रयोग।
  • होमिनिडी एव्डि एवं प्रोबोसीडिया में विकासात्मक प्रवृति।
  • शिवालिक प्राणिजात।
  • गोडंवाना वनस्पतिजात एवं प्राणिजात एवं इसका महत्व।
  • सूचक जीवाश्म एवं उनका महत्व।

भारतीय स्तरिकी

  • स्तरिकी अनुक्रमों का वर्गीकरण।
  • अश्मस्तरिक, जैवस्तरिक, कालस्तरिक एवं चुम्बस्तरिक तथा उनका अंतसंबंध/भारत की कैब्रियनपूर्व शैल्रों का वितरण एवं वर्गीकरण।
  • प्राणिजात, वनस्पतिज्ञान एवं आर्थिक महत्व की दृष्टि से भारत की इश्यजीवी शैलों के स्तरिक वितरण एवं अश्मविज्ञान का अध्ययन।
  • प्रमुख सीमा समस्याएं-कैब्रियन/कैब्रियन पूर्व, पर्मियन/ ट्राइऐसिक, केटेशियस/तृतीयक एवं प्लायोसीन/प्लायोसीन, भूवैज्ञानिक अतीत मेँ भारतीय उपमहाद्वीप मैँ जलवायवी दशाओं।
  • पुराभूगोल एवं आग्नेय सक्रियता का अध्ययन, भारत का स्तरिक ढांचा।
  • हिमालय का उद्भव।

जल भूविज्ञान एवं इंजीनियरी भूविज्ञान

  • जल विज्ञान चक्र एवं जल का जननिक वर्गीकरण।
  • अवपृष्ठ जल का संचलन।
  • बृहत जवार, सरंध्रता, परक्राम्यता, द्रवचालिक चालकता।
  • परगम्यता एवं संचयन गुणांक, ऐक्रिफर वर्गीकरण; लवणजल अंतर्वेधन, कूपों के प्रकार, वर्षाजल संग्रहण।
  • शैलों की जलधारी विशेषताएं; भूजल रसायनिकी; लवणजल अंतर्वैधन।
  • कूपों के प्रकार, वर्षाजल संग्रहण।
  • शैलों के इंजीनियरी गुण-धर्म, बांधों, सुरंगों, राजमार्गों, रेलमार्गों एवं पुल्रों के लिए भूवैज्ञानिक अन्वेषण।
  • निर्माण सामग्री के रूप में शैल।
  • भूस्खलन-कारण, रोकथाम एवं पुनर्वास; भूकंप रोधी संरचनाएं।

UPSC GEOLOGY SYLLABUS – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

खनिज विज्ञान

  • प्रणालियों एवं सममिति वर्गों में क्रिस्टलों का वर्गीकरण; क्रिस्टल संरचनात्मक संकेतन की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली; क्रिस्टल सममिति को निरूपित करने के लिए प्रक्षेप आरेखों का प्रयोग; हय किरण क्रिस्टलिकी के तत्व।
  • शैलकर सिलिकेट खनिज समूहों के भौतिक एवं रासायनिक गुण; सिलिकेट का संरचनात्मक वर्गीकरण; आग्नेय एवं कार्यातरित शैलों के सामान्य खनिज, कार्बोनेट, फास्फेट, सल्‍्फाइड एवं हेलाइड समूहों के खनिज; मृतिका खनिज।
  • सामान्य शैलकर खनिजों के प्रकाशिक गुणधर्म, खनिजों में बहुवगर्णता, विलोप कोण, दविअपवर्तन (डबल रिफ्रैक्शन, बाइरेफ्रिजेंस), यमलन एवं परिक्षेपण ।

आग्नेय एवं कार्यातरित शैलिकी

  • मैगमा जनन एवं क्रिस्टलन; ऐल्वाइट – ऐनॉर्थाइट का क्रिस्टलन: डायोप्साइड – एवं डायोप्साड-वोलास्टोनाइट-ऐनॉथाइट एवं डायोसाइड-वोलास्टोनाइट- सिलिका प्रणालियां;
  • बॉवेन का अभिक्रया सिद्धांत; मैग्मीय विभेदन एवं स्वांगीकरण;
  • आग्नेय शैलों के गठन एवं संरचनाओं का शैलजननिक महत्व; ग्रेनाइट, साइनाइड, डायोराइट, अल्पसिलिक एवं अल्पल्पसिलिक समूहों, चार्नोकाइट, अल्पसिलिक एवं अल्पल्पसिलिक समूहों, चार्नोकाइट, अनॉरथॉसाइट एवं क्षारीय शैलों की शैलवर्णना एवं शैल जनन, कार्बोटाइट्स डेकन ज्वालामुखी शैल-क्षेत्र।
  • कार्यातरण प्ररूप एवं कारक; का्यांतरी कोटियां एवं संस्तर; प्रावस्था नियम; प्रादेशिक एवं संस्पर्श कार्यांतरण संलक्षणी; ७८४ एवं &(7 आरेख; कायांतरी शैलों का गठन एवं संरचना; बालुकामय, मृण्मय एवं अल्पसिलिक शैलों का कायांतरण; खनिज समुच्चय पश्चगातिक कायांजरण; तत्वांतरण एवं ग्रेनाइटी भवन; भारत का मिग्नेटाइट, कणिकाश्म शैली प्रदेश।

अवसादी शैलिकी

  • अवसाद एवं अवसादी शैल्र निर्माण प्रक्रियाएं, प्रसंघनन एवं शिलीभवन, संखंडाश्मी एवं असंखंडाश्मी शैली-उनका वर्गीकरण, शैलवर्णना एवं निक्षेपण वातावरण, अवसादी संलक्षणी एवं जननक्षेत्र, अवसादी संरचनाएं एवं उनका महत्व; भारी खनिज एवं उनका महत्व; भारत की अवसादी द्रोणियां।

आर्थिक भृविज्ञान

  • अयस्क, अयस्क खनिज एवं गैंग, अयस्क का औसत प्रतिशत, अयस्क निक्षैपों का वर्गीकरण; खनिज निक्षेपों की निर्माण प्रक्रिया; अयस्क स्थानीकरण के नियंत्रण; अयस्क गठन एवं संरचनाएं; धातु जननिक युग एवं प्रदेश; एल्युमिनियम, क्रोनियम, ताम्र, स्वर्ण, लोह, लेड, जिंक, मेग्नीज, टिटेनियम, यूरेनियम एवं थोरियम तथा औद्योगिक खनिजों के महत्वपूर्ण भारतीय निक्षैपों का भूविज्ञान; भारत मैं कोयला एवं पेट्रोलियम निक्षेप; राष्ट्रीय खनिज नीति; खनिज संसाधनों का संरक्षण एवं उपयोग; समुद्री खनिज संसाधन एवं समुद्र नियम।

खनन भूविज्ञान

  • पूर्वक्षण की विधियां – भूवैज्ञानिक, भूभौतिक, भूरासायनिक एवं भू-वानस्पतिक; प्रतिचयन प्रविधियां; अयस्क निचय प्राक्कलन, धातु अयस्कों औदयोगिक खनिजों, समुद्री खनिज संसाधनों एवं निर्माण प्रस्तरों के अन्वेषण एवं खनन की विधियां; खनिज सज्जीकरण एवं अयस्क प्रसाधन।

भूरासायनिकी एवं पर्यावरणीय भूविज्ञान

  • तत्वों का अंतरिक्षी बाहुलय, ग्रहों एवं उल्कापिंडों का संघटन, पृथ्वी की संरचना एवं संघटन एवं तत्वों का वितरण, लेश तत्व, क्रिस्टल रासायनिकी के तत्व-गासायनिक आबंध, समन्वय संख्या, समकृतिकता एवं बहुरूपता, प्रारंभिक उष्मागतिकी।
  • प्राकृतिक संकट – बाढ़, बृहत क्षरण, तटीय संकट, भूकंप एवं ज्वालामुखीय सक्रियता तथा न्यूनीकरण, नगरीकरण, खनन औद्योगिक एवं रेडियोसक्रिय अपरद निपटान, उर्वरक प्रयोग;
  • खनन अपरद एवं फ्लाई ऐश सन्निक्षेपण के पर्यावरणीय प्रभाव;
  • भौम एवं भू-पृष्ठ जल प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण; समुद्र तल परिवर्तन- कारण एवं प्रभाव।
  • पर्यावरण संरक्षण-भारत में विधायी उपाय।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Geology Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

UPSC Geology Optional Paper-1 Download

UPSC Geology Optional Paper-2 Download

UPSC Geology Syllabus in Hindi Optional Paper pdf

UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC Chemistry Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus मेंUPSC Chemistry Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है, जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है :

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है 

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे Botany Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Paper-6 और Paper-7 में Total 25 Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC CHEMISTRY SYLLABUS – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

परमाणु संरचना

  • क्वांटम सिद्धांत, हाइसेन वर्ग का अनिश्चतता सिद्धांत, श्रीडिंगर तरंग समीकरण (काल अनाश्रित) तरंग फलन की व्याख्या, एकल विमीय बॉक्स में कण, क्वाट्टंम संख्याएं, हाइड्रोजन परमाणु तंरग फलन S, P और D कक्षकों की आकृति।

रसायन आबंध

  • आयनी आबंध, आयनी यौगिकों के अभिलक्षण, जालक ऊर्जा, बार्नहेबर चक्र।
  • सहसंयोजक आबंध तथा इसके सामान्य अभिलक्षण, अणुओं मेँ आबंध की ध्रुवणता तथा इसके द्विद्वुव अपूर्ण संयोजी आबंध सिद्धांत, अनुनाद तथा अनुनाद उर्जा की अवधारणा, अणु कक्षक सिद्धांत (LCAO पद्धति)।
  • H2 + , H2, He2  से Ne2, NO, CO, HFएवं (CN*** संयोजी आबंध तथा अणुकक्षक सिद्धांतों की तुलना, आबंध कोटि, आबंध सामर्थ्य तथा आबंध लंबाई।

ठोस अवस्था

  • क्रिस्टल, पद्धति; क्रिस्टल फलकों, जालक संरचनाओं तथा यूनिट सेल का स्पष्ट उल्लेख।
  • ग्रेग का नियम, क्रिस्टल द्वारा X-रे विवर्तन।
  • क्लोज पैंकिग (ससंकुलित रचना), अर्धव्यास अनुपात नियम, सीमांत अर्थव्यास अनुपात मानों के आकलन, NaCI, ZnS, CsCI एवं CaF2, की संरचना, स्टाइकियोमीट्रिक तथा नॉन- स्टाइकियोमीट्रिक दोष अशुद्धता दोष, अर्द्धचालक।

गैस अवस्था एवं परिवहन परिघटना

  • वास्तविक गैसों की अवस्था का समीकरण, अंतरा अणुक पारस्परिक क्रिया, गैसों का द्रवीकरण तथा क्रांतिक घटना, मैक्सवेल का गति वितरण, अंतराणुक संघट्ट दीवार पर संघट्ट तथा अभिस्पंदन, ऊष्मा चालकता एवं आदर्श गैसों की श्यानता।

द्रव अवस्था

  • केल्विन समीकरण, पृष्ठ तनाव एवं पृष्ठ ऊर्जा, आर्द्रक एवं संस्पश कोण, अंतरापृष्ठीय तनाव एवं कोशिका क्रिया।

ऊष्मागतिकी

  • कार्य, ऊष्मा तथा आंतरिक ऊर्जा; ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम, ऊमागतिकी का दूसरा नियम, एंट्रोपी एक अवस्था फलन के रूप मैं, विभिन्‍न प्रक्रमों में एंट्रॉपी परिवर्तन, एंट्रॉपी उत्क्रमणीयता तथा अनुत्क्रमणीयता, मुक्त ऊर्जा फलन, अवस्था का ऊष्मागतिकी समीकरण, मैक्सवेल संबंध।
  • ताप, आयतन एवं U, H, A, G, Cp (Cv ,∝ एवं β की दाब निर्भरता; J-T ‘प्रभाव एवं व्युत्क्रमण ताप।
  • साम्य के लिए निकष, साम्य स्थिरारंक तथा ऊष्मागतिकीय राशियों के बीच संबंध, नेस्ट ऊष्मा प्रमेय तथा ऊष्मागतिकी का तीसरा नियम।

प्रावस्था साम्य तथा विलयन

  • क्लासियस-क्लोपिरन समीकरण, शुद्ध पदार्थों के लिएप्रावस्था आरेख।
  • दविआधारी पद्धति में प्रावस्था साम्य, आंशिक मिश्रणीय टद्रव-उच्चतर तथा निम्नतर क्राँतिक विलयन ताप।
  • आंशिक मोलर राशियं, उनका महत्व तथा निर्धारण।
  • आधिक्य ऊष्मागतिकी फलन और उनका निर्धारण।

विद्युत रसायन

  • प्रबल विद्युत अपघटूयों का डेबाई हुकेल सिद्धांत एवं विभिन्‍न साम्य तथा अधिगमन गुणधर्मों के लिए डेबाइ हुकेल सीमांत नियम, गैल्वेनिक सेल, सांद्रता सेल; इलेक्ट्रोकेमिकल सीरीज, सेलों के «रण का मापन और उसका अनुप्रयोग; ईंधन सेल तथा बैटरियां, इलैक्ट्रोड पर प्रक्रम; अंतरा पृष्ठ पर दविस्तर; चार्ज ट्रांसफर की दर, विद्युत धारा घनत्व; अतिविभव; वैदयुत विश्लेषण तकनीक; पोलरोग्राफी, एंपरोमिती, आयन वरणात्मक इलेक्ट्रोड एवं उनके उपयोग।

रासायनिक बलगतिकी

  • अभिक्रिया दर की सांद्रता पर निभरता, शून्य, प्रथम, द्धितीय तथा आंशिक कोटि की अभिक्रियाओं के लिए अवकल और समाकल दर समीकरण।
  • उत्क्रम, समान्तर, क्रमागत तथा श्रृंखला अभिक्रियाओँं के दर समीकरण; शाखन श्रृंखला एवं विस्फोट।
  • दर स्थिरांक पर ताप और दाब का प्रभाव, स्टॉप फ्लो और रिलेक्सेशन पद्धतियों द्वारा द्रुत अभिक्रियाओं का अध्ययन।
  • संघटन और संक्रमण अवस्था सिदधांत।

प्रकाश रसायन

  • प्रकाश का अवशोषण।
  • विभिन्‍न मार्गों द्वारा उतृतेजित अवस्था का अवसान।
  • हाइड्रोजन और हेलोजनों के मध्य प्रकाश रसायन अभिक्रिया और उनकी क्वांटमी लब्धि।

पृष्ठीय परिघटना तथ उत्प्रेरतता

  • ठोस अधिशोषकों पर गैसों और विलयनों का अधिशोषण, लैंगम्यूर तथा छाग्गर’अधिशोषण रेखा।
  • पृष्ठीय क्षेत्रफल का निर्धारण।
  • विषामांगी उत्प्रेरकों पर अभिक्रिया अभिलक्षण और क्रियाविधि।

जैव अकार्बनिक रसायन

  • जैविक तंत्रों में धातु आयन तथा भित्ति के पार आयन गमन (आण्विक क्रियाविधि)।
  • ऑक्सीजन अपटेक प्रोटीन, साइटोग्रोम तथा पेरोडोक्सिन।

समन्वय रसायन

  • धातु संकुल के आबंध सिद्धांत, संयोजकता आबंध सिद्धांत, क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत और उसमें संशोधन, धातु संकुल के चुंबकीय तथा इलेक्ट्रानिक स्पेक्ट्रम की व्याख्या के सिद्धांतों का अनुप्रयोग।
  • समनन्‍वयी योगिकों में आइसोमेरिज्म, समनन्‍वयी योगिकों का IUPAC नामकरण; 4 तथा 6 समायोजन वाले संकुलों का त्रिविम रसायन, किलेट प्रभाव तथा बहुनाभिकीय संकुल; परा-प्रभाव और उसके सिद्धांत; वर्ग समतली संकुल में प्रतिस्थापनिक अभिक्रियाओं की बलगतिकी; संकुलों की तापगतिकी तथा बलगतिकी स्थिरता।
  • मैटल कार्बोनिलों की संश्लेषण संरचना तथा उनकी अभिक्रियात्मकता; कार्बोक्सिलेट एनॉयन, कार्बोनिल हाइड्राइड तथा मैटल नाइट्रोसीलयौगिक यौगिक।
  • एरोमेटिक प्रणाली के संकुल मैटल ओलोफिन संकुलों में संश्लेषण, संरचना तथा बंध, एल्काइन तथा सायक्लोपेंटाडायनिक संकुल, समन्वयी असंतृप्तता, आक्सीडेटिव योगात्मक अभिक्रियाएं, निवेशन अभ्िक्रियाएं, प्रवाहा अणु और उनका अभिलक्षणन, मैटल-मैटल आबंध तथा मैटल परमाणु गुच्छे वाले यौगिक।

मुख्य समूह रसायनिकी

  • बोरेन, बोराजाइन, फास्फेजीन एवं चक्रीय फास्फेजीन, सिलिकेटएवं सिलिकॉन, इंटरहैलोजन यौगिक।
  • गंधक-नाइट्रोजन यौगिक, नॉबुल गैस यौगिक।

F ब्लॉक तत्वों का सामान्य रसायन

  • लन्‍्थेनाइड एवं एक्‍्टीनाइड।
  • पृथक्करण, आक्सीकरण अवस्थाएं, चुम्बकीय तथा स्पेक्ट्रमी गुणधर्म।
  • लैथेनाइड संकुचन।

UPSC CHEMISTRY SYLLABUS – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

विस्थापित सहसंयोजक बंध

  • एरोमैटिकता, प्रतिएरोमैटकता:, एन्यूलीन, एजुलीन, ट्रोपोलोन्स, फुल्वीन, सिडनोन।

अभिक्रिया क्रियाविधि

  • कार्बनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधियों के अध्ययन की सामान्य विधियां (गतिक एवं गैर-गतिक दोनों), समस्थानिकी विधि, क्रास-ओवर प्रयोग, मध्यवर्ती ट्रेपिंग, त्रिविम रसायन, संक्रियण ऊर्जा, अभिक्रियाओं का ऊष्मागतिकी नियंत्रण तथा गतिक नियंत्रण।

अभिक्रियाशील मध्यवर्ती

  • कार्बोॉनियम आयनों तथा कारबेनायनों, मुक्त मूत्रकों (फ्रीरेडिकल) कार्बीनों बेंजाइनों तथा नाइट्रेनों का उत्पादन, ज्यामिति, स्थिरता तथा अभिक्रिया।

प्रतिस्थापन अभिक्रयाएं

  • SN1, SN2 एवं SNi क्रियाविधियां।
  • प्रतिवेशी समूह भागीदारी, पाइसेल, फ्यूरन, थियोफीन, इंडोल जैसे हेट्रोसाइक्लिक योगिकों सहित ऐरोमेटि यौगिकों की इलेक्ट्रोफिलिक तथा न्यूक्योफिलिक अभिक्रियां।

विलोपन अभिक्रियाएं

  • E1, E2 तथा Elcb क्रियाविधियां।
  • सेजेफ तथा हॉफसन E2 अभिक्रियाओं मेँ दिक्विन्यास, पाइरोलिटिक Syn विलोपन-चुग्गीव तथा कोप विलोवन।

संकलन अभिक्रियाएं

  • C=C तथा C=C के लिए इलेक्ट्रोफिलिक संकलन, C=C तथा C=N के लिए न्यूक्लियोफिलिक संकलन, संयुग्मी ओलिफिलस तथा कार्बोअल्स।

अभिक्रियाएं तथा पुनर्विन्यास

  • पिनाकोल-पिनाकोलोन, हॉफमन, बेकमन, बेयर विलिंगर, फेबोस्की, फ्राइस, क्लेसेन, कोप, स्टीवेंज तथा वाग्नर-मेरबाइन पुनर्विन्यास।

संघनन तथा अभिक्रियाएं

  • एल्डोल संघनन, क्लैसेन संघनन, डीकमन, परकिन, नोवेनेजेल, विंटिंग, क्लिमेंसन, वोल्फ किशनर, केनिजारों तथा फान-रीक्टर अभिक्रियाएं, स्टॉब, बैजोइन तथा एसिलोयन संघनन, फिशर इंडोल संश्लेषण, स्क्राप संश्लेषण, विश्लर-नेपिरास्की, सैंडमेयर, रेगेर टाइमन तथा रेफॉरमास्की अभिक्रियाएं। 

परिरंभीय अभिक्रियाएं

  • वर्गीकरण एवं उदाहरण।
  • बुडवर्ग-हॉफमैन नियम विद्युतचक्रीय अभिक्रियाएं, चक्री संकलन अभिक्रियाएं (2+2 एवं 4+2) एवं सिग्मा-अनुवर्तनी विस्थापन (1,3; 3, 3 तथा 1,5) FMO उपगम।

बहुलकों का निर्माण और गुणधर्म

  • कार्बनिक बहुलक-पोलिएथिलीन, पोलिस्टाइरीन, पोलीविनाइल क्लोराइड, टेफलॉन, नाइलॉन, टेरीलीन, संश्लिष्ट तथा प्राकृतिक रबड़।

जैवबहुलक

  • प्रोटीन DNA, RNA की संरचनाएं।

अभिकारकों के संश्लेषक उपयोग

  • 0s04, HI04 CrO3, Pb(OAc)4, SeO2, NBS, B2H6, Na द्रव अमोनिया, LiALH4, NaH4, Na Buli, एवं MCPBA।

रसायन और रासायनिक अभिक्रियाएं

  • प्रकाश रसायन : साधारण कार्बनिक यौंगिकों की प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाएं, उत्तेजित और निम्नतम अवस्थाएं, एकक और त्रिक अवस्थाएं, नोरिश टाइप-I और टाइप-II अभिक्रियाएं।

स्पेक्ट्रोमिकी सिद्धांत और संरचना

स्पेक्ट्रोमिकी सिद्धांत और संरचना

  • स्पेक्ट्रोमिकी सिद्धांत और संरचना के स्पष्टीकरण में उनका अनुप्रयोग।

घूर्णी

  • दविपरमाणुक अणु।
  • समस्थानिक प्रतिस्थापन तथा घूर्णी स्थिरांक।

कांपनिक

  • दविपरमाणुक अणु, रैखिक ब्रिपरमाणुक अणु, बहुपरमाणुक अणुओं में क्रियात्मक समूहों की विशिष्ट आवृतियां।

इलेक्ट्रानिक

  • एकक और त्रिक अवस्थाएं :n →П तथा П → П* संक्रमण।
  • संयुग्मित द्विआबंध तथा संयुग्मित कारबोनिकल में अनुप्रयोग-वुडवर्ड-फीशर नियम; चार्ज अंतरण स्पेक्ट्रा।

नाभिकीय चुंबकीय अनुनाद (‘HNMR)

  • आधारभूत सिद्धांत।
  • रसायनिक शिफ्ट एवं स्पिन-स्पिन अन्योन्य क्रिया एवं कपलिंग स्थिरांक।

द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमिति

  • पैरैंट पीक, बेसपीक, मेटास्टेबल पीक, मैक लैफर्टी पुनर्विन्यास।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Chemistry Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

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UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC Sociology Syllabus in Hindi

UPSC SOCIOLOGY EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

समाजशास्त्र के मूलभूत सिद्धांत

समाजशास्त्र : विद्याशाखा :

  • (क) यूरोप में आधुनिकता एवं सामाजिक परिवर्तन तथा समाजशास्त्र का अविभर्भाव।
  • (ख) समाजशास्त्र का विषयक्षेत्र एवं अन्य सामाजिक विज्ञानों से इसकी तुलना।
  • (ग) समाजशास्त्र  एवं सामान्य बोध।

समाजशास्त्र विज्ञान के रूप में :

  • (क) विज्ञान, वैज्ञानिक पद्धति एवं समीक्षा
  • (ख) अनुसंधान क्रिया विधि के प्रमुख सैद्धांतिक तत्व
  • (ग) प्रत्यक्षवाद एवं इसकी समीक्षा
  • (घ) तथ्य, मूल्य एवं उद्देश्यपरकता
  • (ड.) अ-प्रत्यक्षवादी क्रियाविधियां

अनुसंधान पद्धतियां एवं विश्लेषण :

  • (क) गुणात्मक एवं मात्रात्मक पद्धतियां
  • (ख) दत्त संग्रहण की तकनीक
  • (ग) परिवर्त, प्रतिचयन, प्राक्कल्पना, विश्वसनीयता एवं वैधता

समाजशास्त्री चिंतक :

  • (क) कार्ल मार्क्स-ऐतिहासिक भौतिकवाद, उत्पादन विधि, वि संबंधन, वर्ग संघर्ष
  • (ख) इमाईल दुखीम-श्रम विभाजन, सामाजिक तथ्य, आत्महत्या, धर्म एवं समाज।
  • (ग) मैक्स वेबर-सामाजिक क्रिया, आदर्श प्रारूप, सत्ता, अधिकारीतंत्र, प्रोटेस्टेंट नीतिशास्त्र और पूंजीवाद की भावना।
  • (घ) तालकॉट पार्सन्स-सामाजिक व्यवस्था, प्रतिरूप परिवर्त
  • (ड.) राबर्ट के मर्टन-अव्यक्त तथा अभिव्यक्त प्रकार्य अनुरूपता एवं विसामान्यता, संदर्भ समूह
  • (च) मीड-आत्म एवं तादात्म्य

स्तरीकरण एवं गतिशीलता :

  • (क) संकल्पनाएं-समानता, असमानता, अधिक्रम, अपवर्जन, गरीबी एवं वंचन
  • (ख) सामाजिक स्तरीकरण के सिद्धांत – संरचनात्मक प्रकार्यवादी सिद्धांत, मार्क्सवादी सिद्धांत, वेबर का सिद्धांत
  • (ग) आयाम-वर्ग, स्थिति समूहाँ, लिंग, नृजातीयता एवं प्रजाति का सामाजिक स्तरीकरण
  • (घ) सामाजिक गतिशीलता-खुली एवं बंद व्यवस्थाएं, गतिशीलता के प्रकार, गतिशीलता के स्रोत एवं कारण

कार्य एवं आर्थिक जीवन

  • (क) विभिन्‍न प्रकार के समाजों में कार्य का सामाजिक संगठन-दास समाज, सामंती समाज, औदयोगिक/पूंजीवादी समाज
  • (ख) कार्य का औपचारिक एवं अनौपचारिक संगठन
  • (ग) श्रम एवं समाज

राजनीति एवं समाज

  • (क) सत्ता के समाजशास्त्रीय सिद्धांत
  • (ख) सत्ता प्रव्रजन, अधिकारीतंत्र, दबाव समूह, राजनैतिक दल
  • (ग) राष्ट्र, राज्य, नागरिकता, लोकतंत्र, सिविल समाज, विचारधारा
  • (घ) विरोध, आंदोलन, सामाजिक आंदोलन, सामूहिक क्रिया, क्रांति

धर्म एवं समाज

  • (क) धर्म के समाजशास्त्रीय सिद्धांत
  • (ख) धार्मिक क्रम के प्रकार : जीववाद, एकतत्ववाद, बहुतत्ववाद, पंथ, उपासना,पदथधतियां
  • (ग) आधुनिक समाज में धर्म : धर्म एवं विज्ञान, धर्म निरपेक्षीकरण, धार्मिक पुन:प्रवर्तनवाद, मूलतत्ववाद

नातेदारी की व्यवस्थाएं:

  • (क) परिवार, गृहस्थी, विवाह
  • (ख) परिवार के प्रकार एवं रूप
  • (ग) वंश एवं वंशानुक्रम
  • (घ) पितृतंत्र एवं श्रम का लिंगाधारिक विभाजन
  • (ड.) समसामयिक प्रवृत्तियां

आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन :

  • (क) सामाजिक परिवर्तन के समाजशास्त्रीय सिद्धांत
  • (ख) विकास एवं पराश्नितता
  • (ग) सामाजिक परिवर्तन के कारक
  • (घ) शिक्षा एवं सामाजिक परिवर्तन
  • (ड.) विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक परिवर्तन

UPSC SOCIOLOGY EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

भारतीय समाज : संरचना एवं परिवर्तन

(क) भारतीयसमाजकापरिचय :

(I) भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य

  • (क) भारतीय विद्या (जी एस धुर्य)
  • (ख) संरचनात्मक प्रकार्यवाद (एम.एन. श्रीनिवास)
  • (ग) मार्क्सवादी समाजशास्त्र (ए.आर. देसाई)

(II) भारतीय समाज पर ऑपनिवेशिक शासन का प्रभाव

  • (क) भारतीय राष्ट्रवाद की सामाजिक पृष्ठभूमि
  • (ख) भारतीय परंपरा का आधुनिकीकरण
  • (ग) औपनिवेशिककाल के दौरान विरोध एवं आंदोलन
  • (घ) सामाजिक सुधार

ख. सामाजिक संरचना:

(I) ग्रामीण एवं कृषिक सामाजिक संरचना

  • (क) भारतीय ग्राम का विचार एवं ग्राम अध्ययन
  • (ख) कृषिक सामाजिक संरचना – पट्टेदारी प्रणाली का विकास, भूमिसुधार

(II)जातिव्यवस्था

  • (क) जाति व्यवस्था के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य (जीएस धुर्ये, एमएन श्रीनिवास, लुईदयूमां, आंद्रे बेतेय)
  • (ख) जाति व्यवस्था के अभिलक्षण (ग) अस्पृश्यता-रूप एवं परिप्रेक्ष्य

(III)भारतमेंजनजातीयसमुदाय

  • (क) परिभाषीय समस्याएं
  • (ख) भौगोलिक विस्तार
  • (ग) औपनिवेशिक नीतियां एवं जनजातियां
  • (घ) एकीकरण एवं स्वायत्ता के मुद्दे

(IV)भारतमेंसामाजिकवर्ग

  • (क) कृषिक वर्ग संरचना
  • (ख) औदूयोगिक वर्ग संरचना
  • (ग) भारत में मध्यम वर्ग

(V) भारत में नातेदारी की व्यवस्थाएं

  • (क) भारत मैं वंश एवं वंशानुक्रम
  • (ख) नातेदारी व्यवस्थाओं के प्रकार
  • (ग) भारत में परिवार एवं विवाह
  • (घ) परिवार घरेलू आयाम
  • (ड.) पितृतंत्र, हकदारी एवं श्रम का लिंगाधारित विभाजन

(VI) धर्म एवं समाज

  • (क) भारत में धार्मिक समुदाय
  • (ख) धार्मिक अल्पसंख्यकों की समस्याएं

(ग) भारत में सामाजिक परिवर्तन :

(I) भारत में सामाजिक परिवर्तन की इष्टियां

  • (क) विकास आयोजना एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था का विचार
  • (ख) संविधान, विधि एवं सामाजिक परिवर्तन
  • (ग) शिक्षा एवं सामाजिक परिवर्तन

(II) भारत में ग्रामीण एवं कृषिक रूपांतरण

  • (क) ग्रामीण विकास कार्यक्रम, समुदाय विकास कार्यक्रम, सहकारी संस्थाएं, गरीबी उन्मूलन योजनाएं
  • (ख) हरित क्रांति एवं सामाजिक परिवर्तन
  • (ग) भारतीय कृषि में उत्पादन की बदलती विधियां
  • (घ) ग्रामीण मजदूर, बंधुआ एवं प्रवासन की समस्याएं

(III) भारत में औदयोगिकीकरण एवं नगरीकरण

  • (क) भारत में आधुनिक उद्योग का विकास
  • (ख) भारत में नगरीय बस्तियों की वृद्धि
  • (ग) श्रमिक वर्ग : संरचना, वृद्धि, वर्ग संघटन
  • (घ) अनौपचारिक क्षेत्रक, बालश्रमिक
  • (ड.) नगरी क्षेत्र में गंदी बस्ती एवं वंचन

(IV) राजनीति एवं समाज

  • (क) राष्ट्र, लोकतंत्र एवं नागरिकता
  • (ख) राजनैतिक दल, दबाव समूह, सामाजिक एवं राजनैतिक प्रव्रजन
  • (ग) क्षेत्रीयतावाद एवं सत्ता का विकेन्द्रीकरण
  • (घ) धर्म निरपेक्षीकरण

(V) आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन

  • (क) कृषक एवं किसान आंदोलन
  • (ख) महिला आंदोलन
  • (ग) पिछड़ा वर्ग एवं दलित वर्ग आंदोलन
  • (घ) पर्यावरणीय आंदोलन
  • (ड.) नृजातीयता एवं अभिज्ञान आंदोलन

(VI) जनसंख्या गतिकी

  • (क) जनसंख्या आकार, वृद्धि संघटन एवं वितरण
  • (ख) जनसंख्या वृद्धि के घटक : जन्म, मृत्यु, प्रवासन
  • (ग) जनसंख्या नीति एवं परिवार नियोजन
  • (घ) उभरते हुए म॒ददे : काल प्रभावन, लिंग अनपात, बाल एवं शिश॒ म॒त्य दर, जनन स्वास्थ्य

(VII) सामाजिक रूपांतरण की चुनौतियां

  • (क) विकास का संकट : विस्थापन, पर्यावरणीय समस्याएं एवं संपोषणीयता
  • (ख) गरीबी, वंचन एवं असमानताएं
  • (ग) स्त्रियों के प्रति हिंसा
  • (घ) जाति दूवंदव
  • (ड.) नृजातीय दवंदव, सांप्रदायिकता, धार्मिक पुन:प्रवर्तनवाद
  • (च) असाक्षरता तथा शिक्षा में समानताएं

UPSC Psychology Syllabus in Hindi

UPSC PSYCHOLOGY EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

मनोविज्ञानकेआधार

परिचय

  • मनोविज्ञान की परिभाषा: मनोविज्ञान का ऐतिहासिक पूर्ववृत्त एवं 21वीं शताब्दी में प्रवृत्तियां।
  • मनोविज्ञान एवं वैज्ञानिक पद्धति, मनोविज्ञान का अन्य सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञानों से संबंध।
  • सामाजिक समस्याओं में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग।

मनोविज्ञान की पद्धति :

  • अनुसंधान के प्रकार – वर्णनात्मक, मूल्यांकन।
  • नैदानिक एवं पूर्वानुमानिक अनुसंधान पद्धति।
  • प्रेक्षण, सर्वेक्षण, व्यक्ति अध्ययन एवं प्रयोग, प्रयोगात्मक तथा अप्रयोगात्मक अभिकल्प की विशेषताएं।
  • परीक्षण सह्ृश अभिकल्प, केंद्रीय समूह चर्चा, विचारावेश।
  • आधार सिद्धांत उपागम।

अनुसंधान प्रणाली :

  • मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में मुख्य चरण समस्या कथन, प्राक्कल्पना निरूपण, अनुसंधान अभिकल्प, प्रतिचयन, आंकड़ा संग्रह के उपकरण, विश्लेषण एवं व्याख्या तथा विवरण लेखन।
  • मूल के विरूद्ध अनुप्रयुक्त अनुसंधान आंकड़ा संग्रह की विधियां (साक्षात्कार, प्रेक्षण, प्रश्नावली)।
  • अनुसंधान अभिकल्प (कार्योत्तर एवं प्रयोगात्मक)।
  • सांख्यिकी प्रविधियों का अनुप्रयोग (टी-परीक्षण, द्विमार्गी एनोवा, सहसंबंध, समाश्रयण एवं फैक्टर विश्लेषण)।
  • मद अनुक्रिया सिद्धांत।

मानव व्यवहार का विकास :

  • वृद्धि एवं विकास।
  • विकास के सिद्धांत, मानव व्यवहार को निर्धारित करने वाले आनुवांशिक एवं पर्यावरणीय कारकों की भूमिका।
  • समाजीकरण में सांस्कृतिक प्रभाव; जीवन विस्तृति विकास – अभिलक्षण; विकासात्मक कार्य।
  • जीवन विस्तृति के प्रमुख चरणों में मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का संवर्धन।

संवेदन, अवधान ओर प्रत्यक्षण :

  • संवेदन : सीमा की संकल्पना, निरपेक्ष एवं न्यूनतम बोध-भेद देहली, संकेत उपलंभन एवं सतर्कता।
  • अवधान को प्रभावित करने वाले कारक जिसमें विन्‍यास एवं उददीपन अभिलक्षण शामिल हैं।
  • प्रत्यक्षण की परिभाषा और संकल्पना, प्रत्यक्षण मेँ जैविक कारक।
  • प्रात्यक्षिक संगठन – पूर्व अनुभवों का प्रभाव।
  • प्रात्यक्षिक रक्षा – सांतराल एवं गहनता प्रत्यक्ष को प्रभावित करने वाले कारक।
  • आमाप आकलन एवं प्रात्यक्षिक तत्परता।
  • प्रत्यक्षण की सुग्राहयता, अतीन्द्रिय प्रत्यक्षण, संस्कृति एवं प्रत्यक्षण, अवसीम प्रत्यक्षण।

अधिगम :

  • अधिगम की संकल्पना तथा सिद्धांत (व्यवहारवादी, गेस्टाल्टवादी एवं सूचना प्रक्रमण मॉडल)।
  • विलोप, विभेद एवं सामान्यीकरण की प्रक्रियाएं।
  • कार्यक्रमबद्ध अधिगम, प्रायिकता अधिगम, आत्म अनुदेशात्मक अधिगम।
  • प्रबलीकरण की संकल्पनाएं, प्रकार एवं सारणियां।
  • पलायन, परिहार एवं दंड, प्रतिरूपण एवं सामाजिक अधिगम।

स्मृति :

  • संकेतन एवं स्मरण; अल्पावधि स्मृति, दीर्घावधि स्मृति, संवेदी स्मृति, प्रतिमापरक स्मृति, अनुरणन स्मृति।
  • मल्टिस्टोर मॉडल, प्रकमण के स्तर; संगठन एवं स्मृति सुधार की स्मरणजनक तकनीकें।
  • विस्मरण के सिद्धांत; क्षय, व्यक्तिकरण एवं प्रत्यानयन विफलन।
  • अधिस्मृति; स्मृतिलोप; आघातोत्तर एवं अभिघातपूर्व।

चिंतन एवं समस्या समाधान :

  • पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत; संकल्पना निर्माण प्रक्रम।
  • सूचना प्रक्रमण, तर्क एवं समस्या समाधान, समस्या समाधान में सहायक एवं बाधाकारी कारक।
  • समस्या समाधान की विधियां : सृजनात्मक चिंतन एवं सृजनात्मकता का प्रतिपोषण।
  • निर्णयन एवं अधिनिर्णय को प्रभावित करने वाले कारक; अभिनव प्रवृत्तियां।

अभिप्रेरण तथा संवेग :

  • अभिप्रेरण संवेग के मनोवैज्ञानिक एवं शरीर क्रियात्मकम आधार, अभिप्रेरण तथा संवेग का मापन।
  • अभिप्रेरण एवं संवेग का व्यवहार पर प्रभाव; बाहय एवं अंतर अभिप्रेरण।
  • अंतर अभिप्रेरण को प्रभावित करने वाले कारक।
  • संवेगात्मक सक्षमता एवं संबंधित मुददे।

बुद्धि एवं अभिक्षमता :

  • बुद्धि एवं अभिक्षमता की संकल्पना।
  • बुद्धि का स्वरूप एवं सिद्धांत-स्पियरमैन, थर्सटन गलफोर्ड बर्नान, स्टेशनबर्ग एवं जे पी दास।
  • संवेगात्मक बुद्धि, सामाजिक बुद्धि, बुद्धि एवं अभ्िक्षमता का मापन।
  • बुद्धिलब्धि की संकल्पना, विचलन बुद्धिलब्धि, बुद्धिलब्धि स्थिरता।
  • बहु बुद्धि का मापन; तरल बुद्धि एवं क्रिस्टलित बुद्धि।

व्यक्तित्व :

  • व्यक्तित्व की संकल्पना तथा परिभाषा।
  • व्यक्तित्व के सिद्धांत (मनोविश्लेणात्मक- सांस्कृतिक, अंतर्वैयक्तिक, (विकासात्मक मानवतावादी, व्यवहारवादी विशेष गुण एवं जाति उपागम)।
  • व्यक्तित्व का मापन (प्रक्षेपी परीक्षण, पेंसिल-पेपर परीक्षण)।
  • व्यक्तित्व के प्रति भारतीय इष्टिकोण; व्यक्तित्व विकास हेतु प्रशिक्षण।
  • नवीनतम उपागम जैसे कि बिग-5 फैक्टर सिद्धांत; विभिन्‍न परंपराओं में स्व का बोध।

अभिवृत्तियां, मूल्य एवं अभिरूचियां :

  • अभिवृत्तियां, मूल्यों एवं अभिरूचियों की परिभाषाएं।
  • अभिवृत्तियों के घटक; अभिवृत्तियों का निर्माण एवं अनुरक्षण।
  • अभिवृत्तियों, मूल्यों एवं अभिरूचियों का मापन।
  • अभिवृत्ति परिवर्तन के सिद्धांत, मूल्य प्रतिपोषण की विधियां, रूढ़ धारणाओं एवं पूर्वाग्रहों का निर्माण।
  • अन्य के व्यवहार को बदलना, गुणारोप के सिद्धांत, अभिनव प्रवृत्तियां।

भाषा एवं संज्ञापन :

  • मानव भाषा-गुण, संरचना एवं भाषागत सोपान।
  • भाषा अर्जन-पूर्वानुकूलता, क्राँतिक अवधि, प्राक्कल्पना।
  • भाषा विकास के सिद्धांत (स्कीनर, चोम्स्की); संज्ञापन की प्रक्रिया एवं प्रकार।
  • प्रभावपूर्ण संज्ञापन एवं प्रशिक्षण।

आधुनिक समकालीन मनोविज्ञान में मुद्दे एवं परिप्रेक्ष्य :

  • मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला एवं मनोवैज्ञानिक परीक्षण मैं कम्प्यूटर अनुप्रयोग।
  • कृत्रिम बुद्धि; साइकोसाइबरनेटिक्स; चेतना-नींद-जागरण कार्यक्रमों का अध्ययन।
  • स्वप्न, उददीपनवंचन, ध्यान, हिप्रोटिक/औषध प्रेरित दशाएं।
  • अतीन्द्रिय प्रत्यक्षण; अंतरीन्द्रिय प्रत्यक्षण मिथ्याभास अध्ययन।

UPSC PSYCHOLOGY EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

मनोविज्ञान : विषय और अनुप्रयोग

व्यक्तिगत विभिन्‍नताओं का वैज्ञानिक मापन :

  • व्यक्तिगत भिन्‍नताओं का स्वरूप, मानकीकृत मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की विशेषताएं और संरचना।
  • मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के प्रकार।
  • मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के उपयोग, दुरूपयोग तथा सीमाएं।
  • मनोवैज्ञानिक परीक्षाओं के प्रयोग में नीतिपरक विषय।

मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य तथा मानसिक विकार :

  • स्वास्थ्य-अस्वास्थ्य की संकल्पना, सकारात्मक स्वास्थ्य, कल्याण, मानसिक विकार (चिंता विकार, मन स्थिति विकार सीजोफ्रेनियां तथा श्रमिक विकार, व्यक्तित्व विकार, तात्विक दुर्व्यवहार विकार)।
  • मानसिक विकारों के कारक तत्व, सकारात्मक स्वास्थ्य, कल्याण, जीवनशैली तथा जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले कारक।

चिकित्सात्मक उपागम:

  • मनोगतिक चिकित्साएं, व्यवहार चिकित्साएं।
  • रोगी केन्द्रित चिकित्साएं, संज्ञानात्मक चिकित्साएं, देशी चिकित्साएं (योग, ध्यान)
  • जैव पुनर्निवेश चिकित्सा। मानसिक रूग्णता की रोकथाम तथा पुनस्थौपना क्रमिक स्वास्थ्य प्रतिपोषण।

कार्यात्मक मनोविज्ञान तथा संगठनात्मक व्यवहार :

  • कार्मिक चयन तथा प्रशिक्षण उद्योग में मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का उपयोग।
  • प्रशिक्षण तथा मानव संसाधन विकास।
  • कार्य-अभिप्रेरण सिद्धांत-हज॑ वग्र, मासलो, एडम ईक्विटी सिद्धांत, पोर्टर एवं ल्रावलर, ब्रूम।
  • नेतृत्व तथा सहभागी प्रबंधन। विज्ञापन तथा विपणन।
  • दबाव एवं इसका प्रबंधन।
  • श्रम दक्षता शास्त्र, उपभोक्ता मनोविज्ञान, प्रबंधकीय प्रभाविता, रूपांतरण नेतृत्व, संवेदनशीलता प्रशिक्षण, संगठनों मैं शक्ति एवं राजनीति।

शैक्षिक क्षैत्र में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग :

  • अध्यापन-अध्ययन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने मेँ मनोवैज्ञानिक सिद्धांत। अध्ययन शैलियां।
  • प्रदत्त, मंदक, अध्ययन-हेतु-अक्षम और उनका प्रशिक्षण।
  • स्मरण शक्ति बढ़ाने तथा बेहतर शैक्षणिक उपलब्धि के लिए प्रशिक्षण।
  • व्यक्तित्व विकास तथा मूल्य शिक्षा। शैक्षिक, व्यावसायिक मार्गदशन तथा जीविकोपार्जन परामशं।
  • शैक्षिक संस्थाओं में मनोवैज्ञानिक परीक्षण।
  • मार्गदर्शन कार्यक्रमों में प्रभावी कार्यनीतियां।

सामुदायिक मनोविज्ञान :

  • सामुदायिक मनोविज्ञान की परिभाषा और संकल्पना। सामाजिक कार्यकलाप में छोटे समूहों की उपयोगिता।
  • सामाजिक चेतना की जागृति और सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की कार्यवाही।
  • सामाजिक परिवर्तन के लिए सामूहिक निर्णय लेना और नेतृत्व प्रदान करना।
  • सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रभावी कार्य नीतियां।

पुनर्वास मनोविज्ञान :

  • प्राथमिक, माध्यमिक तथा तृतीयक निवारक कार्यक्रम।
  • मनोवैज्ञानिकों की भूमिका -शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से चुनौती प्राप्त व्यक्तियों, जैसे वृद्ध व्यक्तियों के पुनर्वासन के लिए सेवाओं का आयोजन।
  • पदार्थ दुरूपयोग, किशोर अपराध, आपराधिक व्यवहार से पीड़ित व्यक्तियों का पुनर्वास।
  • हिंसा के शिकार व्यक्तियों का पुनर्वास।
  • HIV/AIDS रोगियों का पुनर्वास। सामाजिक अभिकरणों की भूमिका।

सुविधावंचित समूहों पर मनोविज्ञान का अनुप्रयोग :

  • सुविधावंचित, वंचित की संकल्पनाएं, सुविधावंचित तथा वंचित समूहों के सामाजिक, भौतिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक परिणाम, सुविधावंचितों का विकास की ओर शिक्षण तथा अभिप्रेरण।
  • सापेक्ष एवं दीर्घकालिक वंचन।

सामाजिक एकीकरण की मनोवैज्ञानिक समस्या :

  • सामाजिक एकीकरण की संकल्पना, जाति, वर्ग, धर्म, भाषा विवादों और पूर्वाग्रह की समस्या।
  • अंतर्ससमूह तथा बहिर्समूह के बीच पूर्वाग्रह का स्वरूप तथा अभिव्यक्ति।
  • ऐसे विवादों और पूर्वाग्रहों के कारक तत्व।
  • विवादों और पूर्वाग्रहों से निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक नीतियां।
  • सामाजिक एकीकरण पाने के उपाय।

सूचना प्रौद्योगिकी और जनसंचार में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग :

  • सूचना प्रौदयोगिकी और जन-संचार गूंज का वर्तमान परिदृश्य और मनोवैज्ञानिकों की भूमिका।
  • सूचना प्रौद्योगिकी और जन संचार क्षेत्र में कार्य के लिए मनोविज्ञान व्यवसायियों का चयन और प्रशिक्षण।
  • सूचना प्रौद्योगिकी और जन-संचार माध्यम से दूरस्थ शिक्षण।
  • ई- कॉमर्स के द्वारा उद्यमशीलता।
  • बहुस्तरीय विपणन, दूरदर्शन का प्रभाव एवं सूचना प्रोद्योगिकी और जन-संचार के द्वारा मूल्य प्रतिपोषण।
  • सूचना प्रौद्योगिकी में अभिनव विकास के मनोवैज्ञानिक परिणाम।

मनोविज्ञान तथा आर्थिक विकास :

  • उपलब्धि, अभिप्रेरण तथा आर्थिक विकास, उद्यमशील व्यवहार की विशेषताएं।
  • उद्यमशीलता तथा आथ्िक विकास के लिए लोगों का अभिप्रेरण तथा प्रशिक्षण उपभोक्ता अधिकारी तथा उपभोक्ता संचेतना।
  • महिला उद्यमियों समेत युवाओं में उद्यमशीलता के संवर्धन के लिए सरकारी नीतियां।

पर्यावरण तथा संबदुध क्षेत्रों में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग :

  • पर्यावरणीय मनोविज्ञान-ध्वनि, प्रदूषण तथा भीड़भाड़ के प्रभाव जनसंख्या मनोविज्ञान-जनसंख्या विस्फोटन और उच्च जनसंख्या घनत्व के मनोवैज्ञानिक परिणाम।
  • छोटे परिवार के मानदंड का अभिप्रेरण।
  • पर्यावरण के अवक्रमण पर द्रुत वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय विकास का प्रभाव।

मनोविज्ञानकेअन्यअनुप्रयोग:

(क) सैन्यमनोविज्ञान

  • चयन, प्रशिक्षण, परामर्श में प्रयोग के लिए रक्षा कार्मिकों के लिए मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की रचना।
  • सकारात्मक स्वास्थ्य संवर्धन के लिए रक्षा कार्मिकों के साथ कार्य करने के लिए मनोवैज्ञानिकों का प्रशिक्षण।
  • रक्षा में मानव-इंजीनियरी।

(ख) खेल मनोविज्ञान :

  • एथलीटों एवं खेलों के निष्पादन मैं सुधार मैं मनावैज्ञानिक हस्तक्षैप।
  • व्यष्टि एवं टीम खेलों मेँ भाग लेने वाले व्यक्ति।

(ग) समाजोन्मुख एवं समाजविरोधी

  • समाजोन्मुख एवं समाजविरोधी व्यवहार पर संचार माध्यमों का प्रभाव।

(घ) आतंकवाद

  • आतंकवाद का मनोविज्ञान।

लिंग का मनोविज्ञान :

  • भेदभाव के मुद॒दे, विविधता का प्रबंधन।
  • ग्लास सीलिंग प्रभाव, स्वतः: साधक भविष्योक्ति, नारी एवं भारतीय समाज।

UPSC Public Administration Syllabus in Hindi

UPSC PUBLIC ADMINISTRATION EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

प्रशासनिक सिद्धांत

प्रस्तावना :

  • लोक प्रशासन का अर्थ, विस्तार तथा महत्व, विल्सन के दृष्टिकोण से लोक प्रशासन, विषय का विकास तथा इसकी वर्तमान स्थिति, नया लोक प्रशासन, लोक विकल्‍प उपागम, उदारीकरण की चुनौतियां, निजीकरण, भूमंडलीकरण।
  • अच्छा अभिशासन : अवधारणा तथा अनुप्रयोग, नया लोक प्रबंध।

प्रशासनिक चिंतन :

  • वैज्ञानिक प्रबंध और वैज्ञानिक प्रबंध आंदोलन, क्लासिकी सिद्धांत, वेबर का नौकरशाही मॉडल, उसकी आलोचना और वेबर पश्चात्‌ का विकास, गतिशील प्रशासन (मेयो पार्कर फॉले), मानव संबंध स्कूल (एल्टोन मेयो तथ अन्य), कार्यपालिका के कार्य (सीआई बर्नाडे), साइमन निर्णयन सिद्धांत, भागीदारी प्रबंध (मैक ग्रेगर, आर.लिकर्ट, सी.आजीरिस)।

प्रशासनिक व्यवहार :

  • निर्णयन प्रक्रिया एवं तकनीक, संचार, मनोबल, प्रेरणा, सिद्धांत-अंतर्वस्तु, प्रक्रिया एवं समकालीन।
  • नेतृत्व सिद्धांत : पारंपरिक एवं आधुनिक।

संगठन :

  • सिद्धांत-प्रणाली, प्रासंगिकता; संरचना एवं रूप : मंत्रालय तथा विभाग, निगम, कंपनियां, बोर्ड तथा आयोग-तदर्थ तथा परामर्शदाता निकाय मुख्यालय तथा क्षेत्रीय संबंध। नियामक प्राधिकारी; लोक-निजी भागीदारी।

उत्तरदायित्व तथा नियंत्रण

  • उत्तरदायित्व और नियंत्रण की संकल्पनाएं, प्रशासन पर विधायी, कार्यकारी और न्यायिक नियंत्रण।
  • नागरिक तथा प्रशासन।
  • मीडिया की भूमिका, हित समूह, स्वैच्छिक संगठन, सिविल समाज, नागरिकों का अधिकार-पत्र (चार्टर)।
  • सूचना का अधिकार, सामाजिक लेखा परीक्षा।

प्रशासनिक कानून :

  • अर्थ, विस्तार और महत्व, प्रशासनिक विधि पर Dicey, प्रत्यायोजित विधान -प्रशासनिक अधिकरण।

तुलनात्मक लोक प्रशासन :

  • प्रशासनिक प्रणालियों पर प्रभाव डालने वाले ऐतिहासिक एवं समाज वैज्ञानिक कारक।
  • विभिन्‍न देशों में प्रशासन एवं राजनीति।
  • तुलनात्मक लोक प्रशासन की अद्यतन स्थिति।
  • परिस्थितिकी की एवं प्रशासन, रिग्सियन मॉडल एवं उनके आलोचक।

विकास गति की :

  • विकास की संकल्पना, विकास प्रशासन की बदलती परिच्छदिका।
  • विकास विरोधी अभिधारणा, नौकरशाही एवं विकास।
  • शक्तिशाली राज्य बनाम बाजार विवाद।
  • विकासशील देशों में प्रशासन पर उदारीकरण का प्रभाव।
  • महिला एवं विकास, स्वयं सहायता समूह आंदोलन।

कार्मिक प्रशासन :

  • मानव संसाधन विकास का महत्व, भर्ती प्रशिक्षण, जीविका विकास, हैसियत वर्गीकरण।
  • अनुशासन, निष्पादन मूल्यांकन, पदोन्‍नति, वेतन तथा सेवा शर्तें, नियोक्‍ता-कर्मचारी संबंध।
  • शिकायत निवारण क्रिया विधि, आचरण संहिता, प्रशासनिक आचार-नीति।

10. लोकनीति :

  • नीति निर्माण के मॉडल एवं उनके आलोचक।
  • संप्रत्ययीकरण की प्रक्रियाएं, आयोजन; कार्यान्वयन, मानीटरन, मूल्यांकन एवं पुनरीक्षा एवं उनकी सीमाएं।
  • राज्य सिद्धांत एवं लोकनीति सूत्रण।

11. प्रशासनिक सुधार तकनीकें :

  • संगठन एवं पद्धति, कार्य अध्ययन एवं कार्य प्रबंधन; ई-गवर्नेंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी; प्रबंधन सहायता उपकरण जैसे कि नेटवर्क विश्लेषण, MIS, PERT, CPM

12. वित्तीय प्रशासन :

  • वित्तीय तथा राजकोषीय नीतियां, लोक उधार ग्रहण तथा लोक ऋण। बजट प्रकार एवं रूप; बजट-प्रक्रिया, वित्तीय जवाबदेही, लेखा तथा लेखा परीक्षा।

UPSC PUBLIC ADMINISTRATION EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

भारतीय प्रशासन

1. भारतीय प्रशासन का विकास :

  • कौटिल्य का अर्थशास्त्र।
  • मुगल्र प्रशासन, राजनीति एवं प्रशासन में ब्रिटिश शासन का रिक्थ-लोक सेवाओं का भारतीयकरण।
  • राजस्व प्रशासन, जिला प्रशासन, स्थानीय स्वशासन।

2. सरकार का दार्शनिक एवं सांविधानिक ढांचा :

  • प्रमुख विशेषताएं एवं मूल्य आधारिकाएं; संविधानवाद।
  • राजनैतिक संस्कृति।
  • नौकरशाही एवं लोकतंत्र; नौकरशाही एवं विकास।

3. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम :

  • आधुनिक भारत में सार्वजनिक क्षेत्र, सार्वजनिक क्षैत्र उपक्रमों के रूप।
  • स्वायत्ता, जवाबदेही एवं नियंत्रण की समस्याएं।
  • उदारीकरण एवं निजीकरण का प्रभाव।

4. संघ सरकार एवं प्रशासन :

  • कार्यपालिका, संसद, विधायिका-संरचना, कार्य, कार्य प्रक्रियाएं।
  • हाल की प्रवृत्तियां, अंतराशासकीय संबंध।
  • कैबिनेट सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, केन्द्रीय सचिवालय।
  • मंत्रालय एवं विभाग, बोर्ड, आयोग, संबंदध कार्यालय, क्षेत्र संगठन।

5.योजनाएंएवंप्राथमिकताएं:

  • योजना मशीनरी, योजना आयोग एवं राष्ट्रीय विकास परिषद की भूमिका, रचना एवं कार्य, संकेतात्मक आयोजना।
  • संघ एवं राज्य स्तरों पर योजना निर्माण प्रक्रिया।
  • संविधान संशोधन (1992) एवं आर्थिक विकास तथा सामाजिक न्याय हेतु विकेन्द्रीकरण आयोजना।

6. राज्य सरकार एवं प्रशासन:

  • संघ-राज्य प्रशासनिक, विधायी एवं वित्तीय संबंध।
  • वित्त आयोग भूमिका; राज्यपाल; मुख्यमंत्री।
  • मंत्रिपरिषद; मुख्य सचिव; राज्य सचिवालय; निदेशालय।

7. स्वतंत्रता के बाद से जिला प्रशासन :

  • कलेक्टर की बदलती भूमिका, संघ-राज्य-स्थानीय संबंध, विकास प्रबंध एवं विधि एवं अन्य प्रशासन के विध्यर्थ, जिला प्रशासन एवं लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण ।

8. सिविल सेवाएं :

  • सांविधानिक स्थिति; संरचना, भर्ती, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण।
  • सुशासन की पहल; आचरण संहिता एवं अनुशासन; कर्मचारी संघ।
  • राजनीतिक अधिकार; शिकायत निवारण क्रियाविधि; सिवित्र सेवा की तटस्थता।
  • सिविल सेवा सक्रियतावाद।

9. वित्तीय प्रबंध :

  • राजनीतिक उपकरण के रूप में बजट; लोक व्यय पर संसदीय नियंत्रण।
  • मौंद्रिक एवं राजकोषीय क्षेत्र मेँ वित्त मंत्रालय की भूमिका।
  • लेखाकरण तकनीक; लेखापरीक्षा।
  • लेखा महानियंत्रक एवं भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की भूमिका।

10. स्वतंत्रता के बाद से हुए प्रशासनिक सुधार :

  • प्रमुख सरोकार; महत्वपूर्ण समितियां एवं आयोग।
  • वित्तीय प्रबंध एवं मानव संसाधन विकास में हुए सुधार।
  • कार्यान्‍्वयन की समस्याएं।

11. ग्रामीण विकास :

  • स्वतंत्रता के बाद से संस्थान एवं अभिकरण।
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रम; फोकस एवं कार्यनीतियां।
  • विकेन्द्रीकरण पंचायती राज; 73वां संविधान संशोधन।

12. नगरीय स्थानीय शासन :

  • नगरपालिका शासन : मुख्य विशेषताएं, संरचना वित्त एवं समस्या क्षेत्र, 74वां संविधान संशोधन।
  • विश्वव्यापी स्थानीय विवाद; नया स्थानिकतावाद; विकास गतिकी।
  • नगर प्रबंध के विशेष संदर्भ में राजनीति एवं प्रशासन।

13. कानून व्यवस्था प्रशासन :

  • ब्रिटिश रिक्थ; राष्ट्रीय पुलिस आयोग; जांच अभिकरण।
  • विधि व्यवस्था बनाए रखने तथा उपप्लव एवं आतंकवाद का सामना करने में पैरामिलिटरी बलों समेत केन्द्रीय एवं राज्य अभिकरणों की भूमिका।
  • राजनीति एवं प्रशासन का अपराधीकरण; पुलिस लोक संबंध; पुलिस में सुधार।

14. भारतीय प्रशासन में महत्वपूर्ण मुद्दे :

  • लोक सेवा मेँ मूल्य; नियामक आयोग; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग।
  • बहुदलीय शासन प्रणाली में प्रशासन की समस्याएं।
  • नागरिक प्रशासन अंतराफलक।
  • अष्टाचार एवं प्रशासन; विपदा प्रबंधन।

UPSC ZOOLOGY SYLLABUS IN HINDI

UPSC ZOOLOGY EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

अरज्जुकी और रज्जुकी :

  • विभिन्‍न फाइलों का उपवर्गों तक वर्गीकरण एवं संबंध; एसीलोमेटा और सीलोमेटा; प्रोटोस्टोम और ड्यूटेरोस्टोम, बाइलेटरेलिया और रेडिएटा, प्रोटिस्टा पेराजोआ, ओनिकोफोरा तथा हेमिकॉरडाटा का स्थान; सममिति।
  • प्रोटोजोआ : गमन, पोषण तथा जनन, लिंग पेरामीशियम, मॉनोसिस्टिस प्लाज्मोडियम तथा लीशमेनिया के सामान्य लक्षण एवं जीवन-वृत्त।
  • पोरिफेरा : कंकाल, नालतंत्र तथा जनन।
  • नीडेरिया : बहुरूपता; रक्षा संरचनाएं तथा उनकी क्रियाविधि; प्रवाल भित्तियां और उनका निर्माण, गेटाजेनेसिस, ओबीलिया और औरीलिया के सामान्य लक्षण एवं जीवन-वृत्त।
  • प्लैटिहेल्मिथीज : परजीवी अनुकूलन; फैसिओला तथा टीनिया के सामान्य लक्षण एवं जीवन-वृत्त तथा उनके रोगजनक लक्षण।
  • नेमेटहेल्मेंथीज : एस्केरिस एवं बुचेरेरिया के सामान्य लक्षण, जीवन-वृत्त तथा परजीवी अनुकूलन।
  • एनेलीडा : सीलोम और विखंडता, पॉलीकीटों में जीवन-विधियां, नेरीस (नीऐंथीस), केंचुआ (फेरिटिमा) तथा जोंक के सामान्य लक्षण तथा जीवन-वृत्त।
  • आर्थरोपोडा : क्रस्टेशिया में डिंबप्रकार और परजीविता, आओ्रोपोडा (झींगा, तिलचट्टा तथा बिच्छु) में इृष्टि और श्वसन; कीटों (तिलचिट्टा, मच्छर, मक्खी, मधुमक्खी तथा तितली) में मुखांगों का रुपांतरण, कीटों में कार्यांतण तथा इसका हार्मोनी नियमन, दीमकों तथा मधु-मक्खियों का सामाजिक व्यवहार।
  • मोलस्का : अशन, श्वसन, गमन, लैमेलिडेन्स, पाइला तथा सीपिया के सामान्य लक्षण एवं जीवन-वृत्त, गैस्ट्रोपोडों में ऐंठन तथा अव्यावर्तन।
  • एकाइनोडमेंटा : अशन, श्वसन, गमन, डिब्ब प्रकार, एस्टीरियस के सामान्य लक्षण तथा जीवन-वृत्त।
  • प्रोटोकॉर्डेटा : रज्जुकियों का उदभव, ब्रेकियोस्टोमा तथा हर्डमानिया के सामान्य लक्षण तथा जीवन-वृत्त।
  • पाइसीज : श्वसन, गमन तथा प्रवासन।
  • एम्फिबिया : चतुष्पादों का उदूभव, जनकीय। देखभाल, शावकांतरण।
  • रैप्टीलियावर्ग : सरीसूपों की उत्पति, करोटि के प्रकार, स्फेनोडॉन तथा मगरमच्छों का स्थान।
  • एवीज; पक्षियों का उद्भव, उड़्डयन-अनुकूलन तथा प्रवासन।
  • मेलिया : स्तनधारियों का उद्भव, दंतविन्यास, अंडा देने वाले स्तनधारियों, कोष्ठाधारी, स्तनधारियों, जलीय स्तनधारियों तथा प्राइमेटों के सामान्य लक्षण, अंतःस्रावी ग्रंथियां (पीयूष ग्रंथि, अवट्ट ग्रंथि, परावट्र ब्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि अग्न्याशय, जनन गंथि) तथा उनमें अंतसंबंध।
  • कशेरूकी प्रणियों के विभिन्‍न तंत्रों का तुलनात्मक, कार्यात्मक शरीर (अध्यावरण तथा इसके व्युत्पाद, अंत: कंकाल, चलन अंग, पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, हृदय तथा महाधमनी चारों सहित परिसंचारी तंत्र, मृत्र-जनन तंत्र, मस्तिष्क तथा ज़ानेन्द्रियां (आंख तथा कान)।

पारिस्थितिकी:

  • जीवनमंडल: जीवनमंडल की संकल्पना; बायोम, जैवभूरसायन चक्र, ग्रीन हाउस प्रभाव सहित वातावरण मैं मानव प्रेरित परिवर्तन, पारिस्थितिक अनुक्रम, जीवोम तथा ईकोटोन। सामुदायिक पारिस्थितिकी।
  • पारितंत्र की संकल्पना, पारितंत्र की संरचना एवं कार्य, पारितंत्र के प्रकार, पारिस्थितिक अनुक्रम, पारिस्थितिक अनुकूलन।
  • समष्टि, विशेषताएं, समष्टि गतिकी, समष्टि स्थिरीकरण।
  • प्राकृतिक संसाधनों का जैव विविधता एवं विवधता संरक्षण।
  • भारत का वन्य जीवन।
  • संपोषणीय विकास के लिए सुदूर सुग्राहीकरण।
  • पर्यावरणीय जैवनिम्नीकरण, प्रदूषण तथा जीवमंडल पर इसके प्रभाव एवं उसकी रोकथाम।

जीव पारिस्थितिकी :

  • व्यवहार: संवेदी निस्यंदन, प्रतिसंवेदिता, चिहन उद्दीपन, सीखना एवं स्मृति, वृत्ति, अभ्यास, प्रानुकूलन, अध्यंकन।
  • चालन में हार्मोनों की भूमिका, संचेतन प्रसार में फीरोमोनों की भूमिका : गोपकता, परभक्षी पहचान, परभक्षी तौर तरीके, प्राइमेटों में सामाजिक सोपान, कीटों में सामाजिक संगठन।
  • अभिविन्यास, संचालन, अभीगृह, जैविक लय; जैविक नियतकालिकता, ज्वरीय, ऋतुपरक तथा दिवसप्राय लय।
  • यौन दवंदव, स्वार्थपरता, नातेदारी एवं परोपकारिता समेत प्राणी-व्यवहार के अध्ययन की विधियां।

आर्थिक प्राणि विज्ञान :

  • मधुमक्खी पालन, रेशमकीट पालन, लाखकीट पालन, शफरी संवर्ध, सीप पालन, झींगा पालन, कृमि संवर्ध।
  • प्रमुख संक्रमाक एवं संचरणीय रोग (मलेरिया, फाइलेरिया, क्षय रोग, हैजा तथा एड्स), उनके वाहक, रोगाणु तथा रोकथाम।
  • पशुओं तथा मवेशियों के रोग, उनके रोगानणु (हेलमिन्थस) तथा वाहक (चिंचड़ी, कुटकी, टेबेनस, स्टोमोक्सिस)।
  • गन्ने के पीड़क (पाइरिला परपुसिएला), तिलहन का पीड़क (ऐकिया जनाटा) तथा चावल का पीड़क (सिटोफलस ओरिजे)।
  • पारजीनी जंतु।
  • चिकित्सकीय जैव प्रौद्योगिकी, मानव आनुवंशिक रोग एवं आनुवंशिक काउंसिलंग, जीन चिकित्सा।
  • विविध जैव प्रौद्योगिकी।

जैवसांख्यिकी :

  • प्रयोगों की अभिकल्पना : निराकरणी परिकल्पना; सहसंबंध, समाश्रयण, केन्द्रीय प्रवृत्ति का वितरण एवं मापन, काई-स्कवेयर, विद्यार्थी-टेस्ट, एफ-टेस्ट (एकमार्गी तथा दूविमार्गी एफ-टेस्ट)।

उपकरणीयपदूधति :

  • स्पेक्ट्रमी प्रकाशमापित्र प्रावस्था विपर्यास एवं प्रतिदीप्ति सूक्ष्म दर्शिकी, रेडियोऐक्टिव अनुरेखक, द्रुत अपकेन्द्रित्र, जेल एलेक्ट्रोफोरेसिस, PCR, ALISA,FISH, एवं गुणसूत्रपेंटिंग।
  • लेक्ट्रिन सूक्ष्मदर्शी (TEM,SEM)

UPSC ZOOLOGY EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

कोशिका जीव विज्ञान :

  • कोशिका तथा इसके कोशिकांगों (कैंद्रक, प्लाज्मका, झिल्ली, माइटोकौीडरिया, गॉल्जीकाय, अंतर्द्रव्यी जालिका, राइबोसोम तथा लाइसोसोम्स) की संरचना एवं कार्य, कोशिका-विभा (समसूत्री तथा अर्दधसूत्री), समसूत्री तर्कु तथा समसूत्री तंत्र, ग्रुणसूत्र गति क्रोमोसोम प्रकार पॉलिटीन एवं लैव्रश, क्रोमैटिन की व्यवस्था, कोशिकाचक्र नियमन।
  • न्यूक्लीइक अम्ल सांस्थितिकी, DNA अनुकल्प, DNA प्रतिकृति, अनुलेखन, RNA प्रक्रमण, स्थानांतरण, प्रोटीन वलन एवं परिवहन।

आनुवंशिकी :

  • जीन की आधुनिक संकल्पना, विभकत जीन, जीन-नियमन, आनुवंशिक-कूट।
  • लिंग गुणसूत्र एवं उनका विकास, ड्रोसोफिला तथा मानव में लिंग-निर्धारण।
  • वंशागति के मेंडलीय नियम, पुनर्योजन, सहलग्रता, बजहुयुग्म विकल्पों, रक्त समूहों की आनुवंशिकी, वंशावली विश्लेषण, मानव मैं वंशागत रोग।
  • उत्परिवर्तन तथा उत्परिवर्तजनन।
  • पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी, वाहकों के रूप में प्लैजमिड्स, कॉसमिड्स, कृत्रिम गुणसूत्र, पारजीनी, DNA क्लोनिंग तथा पूर्ण क्लोनिंग (सिद्धांत तथा क्रिया पद्धति)।
  • प्रोकैरियोट्स तथा यूकैरियोट्स में जीन नियमन तथा जीन अभिव्यक्ति।
  • संकेत अणु, कोशिका मृत्यु, संकेतन पथ मैं दोष तथा परिणाम।
  • RELP, RAPD एवं AFLP तथा फिंगरप्रिटिंग में अनुप्रयोग, राइबोजाइम प्रौद्योगिकी, मानव जीनोम परियोजना, जीनोमिक्स एवं प्रोटोमिक्स।

विकास :

  • जीवन के उददभव के सिद्धांत
  • विकास के सिद्धांत; प्राकृतिक वरण, विकास मैं परिवर्तन की भूमिका, विकासात्मक प्रतिरूप, आणविक ड्राइव, अनुहरण विभिन्‍नता, पृथक्करण एवं जाति उद्भवन।
  • जीवाश्म आंकड़ों के प्रयोग से घोड़े, हाथी तथा मानव का विकास।
  • हार्डी-वीनबर्ग नियम।
  • महादवीपीय विस्थापन तथा प्रणियों का वितरण।

वर्गीकरण-विज्ञान :

  • प्राणिवैज्ञानिक नामावली, अंतर्राष्ट्रीय नियम, क्लैडिस्टिक्स, वाण्विक वर्गिकी एवं जैव विविधता।

जीव रसायन :

  • कार्बोहाइड्रेट, वसाओं, वसाअम्लों एवं कोलेस्टेरॉल, प्रोटीनों एवं अमीनों अम्लों, न्यूक्लिइक अम्लों की संरचना एवं भूमिका, बायो एनर्जेटिक्स।
  • ग्लाइकोलाइसिस तथा क्रब्स चक्र, ऑक्सीकरण तथा अपचयन, ऑक्सीकरणी फास्फोरिलेशन, ऊर्जा संरक्षण तथा विमोचन, ATP चक्र, चक्रीय AMP – इसकी संरचना तथा भूमिका।
  • हार्मोन वर्गीकरण (स्टेराइड तथा पेप्टाइड हार्मोन), जैव संश्लेषण तथा कार्य।
  • एंजाइम: क्रिया के प्रकार तथा क्रिया विधियां।
  • विटामिन तथा को-एंजाइम।
  • इम्यूनोग्लोब्यूलिन एवं रोधक्षमता।

कार्यिकी (स्तन धारियों के विशेष संदर्भ में) :

  • रक्‍त की संघटना तथा रचक, मानव मैं रक्‍त समूह तथा रत्न कारक, स्कंदन के कारक तथा क्रिया विधि; लोह उपापचय, अम्ल क्षारक साम्य, तापनियमन, प्रतिस्कंदक।
  • हीमोग्लोबिन: रचना प्रकार एवं ऑक्सीजन तथा कार्बनडाईऑक्साइड परिवहन में भूमिका।
  • पाचन एवं अवशोषण : पाचन में लार ग्रंथियों, चकृत, अग्न्याशय तथा आंत्र ग्रंथियों की भूमिका।
  • उत्सर्जन : नेफान तथा मूत्र विरचन का नियमन; परसरण नियमन एवं उत्तससर्जी उत्पाद।
  • पेशी: प्रकार, कंकाल पेशियों की संकुचन की क्रिया विधि, पेशियों पर व्यायाम का प्रभाव।
  • न्यूरॉन: तंत्रिका आवेग – उसका चालन तथा अंतग्रंथनी संचरण: न्यूरोट्रांसमीटर।
  • मानव में दृष्टि, श्रवण तथा प्राणबोध।
  • जनन की कार्यिकी, मानव में यौवनारंभ एवं रजोनिवृत्ति।

परिवर्धन जीवविज्ञान :

  • युग्मक जनन; शुक्र की रचना, मैमेलियन शुक्र की पात्रे एवं जीवे धारिता। अंड जनन, पूर्ण शक्तता, निषेचन, मार्फजेनिसस एवं मा्फोजेन, ब्लास्टोजेनिसस, शरीर अक्ष रचना की स्थापना, फेट मानचित्र, मेढ़क एवं चूजे मैं गेस्ट्रलेशन, चूजे में विकासाधीन जीन, अंगांतरक जीन, आंख एवं हृदय का विकास, सर्तनियों में अपरा।
  • कोशिका वंश परंपरा, कोशिका-कोशिका अन्योन्य क्रिया, आनुवंशिक एवं प्रेरित विरूपजनकता, एंजीविया मैं कायांतरण के नियंत्रण मैं वायरोक्सिन की भूमिका, शवकीजनन एवं चिरभूण्साता, कोशिका मृत्यु, कालप्रभावन।
  • मानव में विकासीय जीन, पात्रे निषेचन एवं भ्रूण अंतरण, क्लोनिंग।
  • स्टेमकोशिका : स्रोत, प्रकार एवं मानव कल्याण में उनका उपयोग।
  • जाति अवर्तन नियम।

UPSC Economics Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC Economics Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC Economics Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC ECONOMICS EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

उन्‍नत व्यष्टि अर्थशास्त्र :

  • कीमत निर्धारण के मार्शलियन एवं वालरासियम उपागम।
  • वैकल्पिक वितरण सिद्धांत : रिकॉर्डों काल्डोर, कलीकी।
  • बाजार संरचना: एकाधिकारी प्रतियोगिता, दृविअधिकार, अल्पाधिकार।
  • आधुनिक कल्याण मानदंड: परेटो हिकस एवं सितोवस्की, ऐरो का असंभावना प्रमेय, ए.के. सैन का सामाजिक कल्याण फलन।

उन्‍नत समष्टि अर्थशस्त्र :

  • नियोजन आय एवं ब्याज दर निर्धारण के उपागम: क्लासिकी, कीन्स (8$-,५) वक्र नवक्लासिकी संश्लेषण एवं नया क्लासिकी, ब्याज दर निर्धारण एवं ब्याज दर संरचना के सिद्धांत।

मुद्रा बैंकिंग एवं वित्त:

  • मुद्रा की मांग की पूर्ति : मुद्रा का मुद्रा गुणक मात्रा सिद्धांत (फिशर, पीक फ्राइडमैन) तथा कीन का मुद्रा के लिए मांग का सिद्धांत, बंद और खुली अर्थव्यवस्था में मुद्रा प्रबंधन के लक्ष्य एवं साधन, केनद्रीय बैंक और खजाने के बीच संबंध, मुद्रा की वृद्धि दर पर उच्चतम सीमा का प्रस्ताव।
  • लोक वित्त और बाजार अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका: पूरी के स्वीकरण में, संसाधनों का विनिधान और वितरण और संवृद्धि, सरकारी राजस्व के स्रोत, करों एवं उपदानों के रूप, उनका भार एवं प्रभाव, कराधान की सीमाएं, ऋण, क्राउंडिंग आउट प्रमाण एवं ऋण लेने की सीमाएं, लोक व्यय एवं उसके प्रभाव।

अंतर्राष्ट्रीय अर्थशस्त्र :

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के पुराने और नए सिद्धांत

  • तुलनात्मक लाभ।
  • व्यापार शर्ते एवं प्रस्ताव वक्र।
  • उत्पाद चक्र एवं निर्णायक व्यापार सिद्धांत।
  • व्यापार, संवृद्धि के चालक के रूप में और खुली अर्थव्यवस्था में अवविकास के सिद्धांत।

संरक्षण के स्वरूप : टैरिफ एवं कोटा

भुगतान शेष समायोजन; वैकल्पिक उपागम

  • कीमत बनाम आय, नियम विनियम दर के अधीन आय के समायोजन।
  • मिश्रित नीति के सिद्धांत।
  • पूंजी चलिष्गुणता के अधीन विनियम दर समायोजन।विकासशील देशों के लिए तिरती दरें और उनकी विवक्षा, मुद्रा(करेंसी) बोर्ड।
  • व्यापार नीति एवं विकासशील देश।
  • BPO, खुली अर्थव्यवस्था समष्टि मॉडल में समायोजन तथा नीति समनवय। सटूटा।
  • व्यापार गुट एवं मौद्रिक संघ।
  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) TRIM, TRIPS, घरेलू उपाय WTO बातचीत के विभिन्‍न चक्र।

संवृद्धि एवं विकास:

  • संवृद्धि के सिद्धांत; हैरैंड का मॉडल, अधिशेष श्रमिक के साथ विकास का ल्यूइस मॉडल, संतुलित एवं असंतुलित संवृद्धि, मानव पूंजी एवं आर्थिक वृद्धि।
  • कम विकसित देशों का आर्थिक विकास का प्रक्रम: आर्थिक विकास एवं संरचना परिवर्तन के विषय में मिडिल एवं कुजमेंट्स, कम विकसित देशों के आर्थिक विकास में कृषि की भूमिका।
  • आर्थिक विकास एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश, बहुराष्ट्रीयों की भूमिका।
  • आयोजना एवं आर्थिक विकास: बाजार की बदलती भूमिका एवं आयोजना, निजी सरकारी साझेदारी।
  • कल्याण संकेतक एवं वृद्धि के माप – मानव विकास के सूचक, आधारभूत आवश्यकताओं का उपागम।
  • विकास एवं पर्यावरणी धारणीता- पुनर्नवीकरणीय एवं अपुनर्नवीकरणीय संसाधन, पर्यावरणी अपकर्ष, अंतर पीढो इक्विटो विकास।

UPSC ECONOMICS EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

स्वतंत्रतापूर्व युग में भारतीय अर्थव्यवस्था :

  • भूमि प्रणाली एवं इसके परिवर्तन, कृषि का वाणिज्यीकरण, अपवहन सिद्धांत, अबधंता सिद्धांत एवं समालोचना, निर्माण एवं परिवहन: जूट, कपास, रेलवे मुद्रा एवं साख।

स्वतंत्रता के पश्चात्‌ भारतीय अर्थव्यवस्था :

उदारीकरण के पूर्व का युग:

  • वकील, गाडगिल एवं वी. के. आर. वी. आर. के योगदान।
  • कृषि: भूमि सुधार एवं भूमि पट्टा प्रणाली, हरित क्रान्ति एवं कृषि में पूंजी निर्माण।
  • संघटन एवं संवृदधि में व्यापार प्रवृतियां, सरकारी एवं निजी क्षेत्रकों की भूमिका, लघु एवं कुटीर उदयोग।
  • राष्ट्रीय एवं प्रतिव्यक्ति आय: स्वरूप, प्रवृतियां, सकल एवं क्षेत्रकीय संघटन तथा उनमें परिवर्तन।
  • राष्ट्रीय आय एवं वितरण को निर्धारित करने वाले स्थूल कारक, गरीबी के माप, गरीबी एवं असमानता में प्रवृतियां।

उदारीकरण के पश्चात्‌ का युग :

  • नया आर्थिक सुधार एवं कृषि: कृषि एवं WTO, खादय प्रसंस्करण, उपदान, कृषि कीमतें एवं जन वितरण प्रणाली, कृषि संवृद्धि पर लोक व्यय का समाघात।
  • नई आर्थिक नीति एवं उद्योग: औदयोगिक निजीकरण, विनिवेश की कार्य नीति, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तथा बहुराष्ट्रीयों की भूमिका।
  • नई आर्थिक नीति एवं व्यापार: बौद्धिक संपदा अधिकार: TEIPS, TRIMS, GATS तथा EXIM नई नीति की विवक्षाएं।
  • नई विनियम दर व्यवस्था आंशिक एवं पूर्ण परिवर्तनीयता।
  • नई आर्थिक नीति एवं लोक वित्त: राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम, बारहवां एवं वित्त आयोग एवं राजकोषीय संघवाद का राजकोषीय समेकन।
  • नई आर्थिक नीति एवं मौद्रिक प्रणाली, नई व्यवस्था में RBI की भूमिका
  • आयोजन केन्द्रीय आयोजन से सांकेतिक आयोजन तक, विकेन्द्रीकृत आयोजना और संवृद्धि हेतु बाजार एवं आयोजना के बीच संबंध : 73 वां एवं 74 वां संविधान संशोधन।
  • नई आर्थिक नीति एवं रोजगार : रोजगार एवं गरीबी, ग्रामीण मजदूरी, रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन योजनाएं, नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Commerce And Accountancy Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

UPSC Economics Optional Paper-1 Download

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आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC LAW Optional Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC LAW Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC LAW Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC LAW EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

सांविधिक एवं प्रशासनिक विधि :

  • संविधान एवं संविधानवाद, संविधान के सुस्पष्ट लक्षण।
  • मूल अधिकार-लोकहित याचिका, विधिक सहायता, विधिक सेवा प्राधिकरण।
  • मूल अधिकार-निदेशक तत्व तथा मूल कर्तव्यों के बीच संबंध।
  • राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति तथा मंत्रिपरिषद के साथ संबंध।
  • राज्यपाल तथा उसकी शक्तियां।
  • उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय : (क) नियुक्ति तथा स्थानांतरण, (ख) शक्तियां, कार्य एवं अधिकारिता
  • केंद्र राज्य एवं स्थानीय निकाय : (क) संघ तथा राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण। (ख) स्थानीय निकाय। (ग) संघ, राज्यों तथा स्थानीय निकायों के बीच प्रशासनिक संबंध। (घ) सर्वोपरि अधिकार-राज्य संपति-सामान्य संपत्ति-समुदाय संपत्ति।
  • विधायी शक्तियां, विशेषाधिकार एवं उन्मुक्ति।
  • संघ एवं राज्य के अधीन सेवाएं : (क) भर्ती एवं सेवा शर्तें, सांविधानिक सुरक्षा, प्रशासनिक अधिकरण। (ख) संघ लोक सेवा आयोग एवं राज्य लोक सेवा आयोग – शक्ति एवं कार्य। (ग) निर्वाचन आयोग – शक्ति एवं कार्य।
  • आपात उपबंध।
  • संविधान संशोधन।
  • नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत-अविभूत होती प्रवृतियां एवं न्यायिक उपागम।
  • प्रत्यायोजित विधान एवं इसकी सांविधानिकता।
  • शक्तियों एवं सांविधानिक शासन का पृथक्करण।
  • प्रशासनिक कार्रवाई का न्यायिक पुनर्विल्ञोकन।
  • ओम्बड्समैन : लोकायुक्त, लोकपाल आदि।

अंतरराष्ट्रीय विधि :

  • अंतरराष्ट्रीय विधि की प्रकृति तथ परिभाषा।
  • अंतरराष्ट्रीय विधि तथा राष्ट्रीय विधि के बीच संबंध राज्य मान्यता तथा राज्य उत्तराधिकार।
  • समुद्र नियम-अंतर्देशीय जलमार्ग, क्षेत्रीय समुद्र समीपस्थ परिक्षेत्र, महाद्धीपीय उपतट, अनन्य आर्थिक परिक्षेत्र तथा महासमुद्र।
  • व्यक्ति, राष्ट्रीयता, राज्यहीनता-मानवाधिकार तथा उनके प्रवर्तन के लिए उपलब्ध प्रक्रियाएं।
  • राज्यों की क्षेत्रीय अधिकारिता-प्रत्यपण तथा शरण।
  • संधियां-निर्माण, उपयोजन, पर्यवसान और आरक्षण।
  • संयुक्त राष्ट्र – इसके प्रमुख अंग, शक्तियां, कृत्य और सुधार।
  • विवादों का शांतिपूर्ण निपटारा-विभिन्‍न तरीके।
  • बल का विधिपूर्ण आश्रत : आक्रमण, आत्मरक्षा, हस्तक्षैप।
  • अंतरराष्ट्रीय मानववादी विधि के मूल सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं समकालीन विकास।
  • परमाणु अस्त्रों के प्रयोग की वैधता, परमाणु अस्त्रों के परीक्षण पर रोक-परमाणवीय अप्रसार संधि, सी.टी.बी.टी.।
  • अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, राज्यप्रवर्तित आतंकवाद, उपाहरण, अंतरराष्ट्रीय. आपराधिक न्यायालय।
  • नए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आदेश तथा मौद्रिक विधि WTO, TRIPS, GATT, IMF, विश्व बैंक।
  • मानव पर्यौवरण का संरक्षण तथा सुधार – अंतरराष्ट्रीय प्रयास।

UPSC LAW EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

अपराधविधि :

  • आपराधिक दायत्वि के सामान्य सिद्धांत: आपराधिक मन:स॒थिति तथा आपराधिक कार्य।
  • सांविधिक अपराधों में आपराधिक मन: स्थिति।
  • दंड के प्रकार एवं नई प्रवृतियां जैसे कि मृत्यु दंड उन्‍्मूलन।
  • तैयारियां तथा आपराधिक प्रयास।
  • सामान्य अपवाद।
  • संयुक्त तथा रचनात्मक दायित्व।
  • दुष्प्रेरण।
  • आपराधिक षड़यंत्र।
  • राज्य के प्रति अपराध।
  • लोक शांति के प्रति अपराध।
  • मानव शरीर के प्रति अपराध।
  • संपत्ति के प्रति अपराध।
  • स्त्री के प्रति अपराध।
  • मानहानि।
  • भ्ष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988.
  • सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 955 एवं उत्तरवर्ती विधायी विकास।
  • अभिवयन सौदा।

अपकृत्य विधि :

  • प्रकृति तथा परिभाषा।
  • त्रुटि का कठोर दायित्व पर आधारित दायित्व, आत्यांतिक दायित्व।
  • प्रतिनिधिक दायित्व, राज्य दायितव सहित।
  • सामान्य प्रतिरक्षा।
  • संयुक्त अपकृत्यकर्ता।
  • उपचार।
  • उपेक्षा।
  • मानहानि।
  • उत्पात (न्यूसैंस)।
  • षड़यंत्र।
  • अप्राधिकृत बंदीकरण।
  • विद्वेषपूर्ण अभियोजन।
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986.

संविदा विधि और वाणिज्यिक विधि :

  • संविदा का स्वरूप और निर्माण/ई-संविदा।
  • स्वतंत्र सम्मति को दूषित करने वाले कारक।
  • शून्य, शून्यकरणीय, अवैध तथा अप्रवर्तनीय करार।
  • संविदा का पालन तथा उनन्‍्मोचन।
  • संविदाकल्प।
  • संविदा भंग के परिणाम।
  • क्षतिपूर्ति, गांरटी एवं बीमा संविदा।
  • अभिकरण संविदा।
  • माल की बिक्री तथा अवक्रय (हायर परचेज)।
  • भागीदारी का निर्माण तथा विघटन।
  • परक्राम्य लिखत अधिनियम-1881.
  • माध्यस्थम तथा सुलह अधिनियम-996.
  • मानक रूप संविदा। 

समकालीन विधिक विकास :

  • लोकहित याचिका।
  • बौद्धिक संपदा अधिकार-संकल्पना, प्रकार/संभावनाएं।
  • सूचना प्रौद्योगिकी विधि, जिसमें साइबर विधियां शामिल हैं, संकल्पना, प्रयोजन/संभावनाएं।
  • प्रतियोगिता विधि-संकल्पना, प्रयोग/संभावनाएं।  
  • वैकल्पिक विवाद समाधान-संकल्पना, प्रकार/संभावनाएं।
  • पर्यावरणीय विधि से संबंधित प्रमुख कानून।
  • सूचना का अधिकार अधिनियम।
  • संचार माध्यमों (मीडिया) द्वारा विचारण।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC LAW Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

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UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC Political Science Syllabus in Hindi

UPSC POLITICAL SCIENCE AND INTERNATIONAL RELATIONS OPTIONAL PAPER-I SYLLABUS IN HINDI

राजनीतिक सिद्धांत और भारतीय राजनीति

  • राजनीतिक सिद्धांत अर्थ और दृष्टिकोण।
  • राज्य के सिद्धांत: उदार, नवउदार, मार्क्सवादी, बहुवचनवादी, औपनिवेशिक और नारीवादी।
  • न्याय: रावल के न्याय सिद्धांत और इसकी साम्यवादी आलोचनाओं के विशेष संदर्भ के साथ न्याय की अवधारणाएं।
  • समानता: समानता और स्वतंत्रता के बीच सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संबंध; सकारात्मक कार्रवाई।
  • अधिकार: अर्थ और सिद्धांत; विभिन्न प्रकार के अधिकार; मानव अधिकारों की अवधारणा।
  • लोकतंत्र: शास्त्रीय और समकालीन सिद्धांत; लोकतंत्र के प्रतिनिधि, सहभागी और विचार-विमर्श के विभिन्न मॉडल।
  • शक्ति, वर्चस्व, विचारधारा और वैधता की अवधारणा।
  • राजनीतिक विचारधारा: उदारवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद, फासीवाद, गांधीवाद और नस्लवाद।
  • भारतीय राजनीतिक विचार: धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र और बौद्ध परंपराएं; सर सैयद अहमद खान, एस आर आई अरबिंदो, एम.के. गांधी, बी.आर. अम्बेडकर, M.N. रॉय।
  • पश्चिमी राजनीतिक विचार: प्लेटो, अरिस्टोटल, माचियावेली, हॉब्स, लॉक, जॉन, एस। मिल, मार्क्स, ग्रामसी, हन्ना अरंडट।

भारतीय सरकार और राजनीति

  • भारतीय राष्ट्रवाद: भारत के स्वतंत्रता संग्राम की राजनीतिक रणनीतियां: जनता सत्याग्रह, असहयोग, नागरिक अवज्ञा के लिए संवैधानिकता; आतंकवादी और क्रांतिकारी आंदोलनों, किसान और श्रमिकों की गतिविधियों।
  • भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर परिप्रेक्ष्य: लिबरल, सोशलिस्ट और मार्क्सवादी; कट्टरपंथी मानवीय और दलित।
  • भारतीय संविधान बनाना: ब्रिटिश शासन की अवधारणाएं; विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण।
  • भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं: प्रस्तावना, मौलिक अधिकार और कर्तव्यों, निर्देशक सिद्धांत; संसदीय प्रणाली और संशोधन प्रक्रिया; न्यायिक समीक्षा और मूल संरचना सिद्धांत।
  • केंद्र सरकार के प्रमुख अंग: कार्यकारी, विधानमंडल और सुप्रीम कोर्ट की वास्तविक भूमिका और परिकल्पना की गई।
  • राज्य सरकार के प्रमुख अंगों: कार्यकारी, विधानमंडल और उच्च न्यायालयों की वास्तविक भूमिका और परिकल्पना की गई।
  • ग्रासरूट लोकतंत्र: पंचायती राज और नगरपालिका सरकार; 73 वें और 74 वें संशोधनों का महत्व; ग्रसरूट आंदोलनों।
  • वैधानिक संस्थान / आयोग: चुनाव आयोग, नियंत्रक और महालेखा परीक्षक, वित्त आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग, अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग, महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग।
  • संघवाद: संवैधानिक प्रावधान; केंद्र-राज्य संबंधों की प्रकृति बदलती है; एकीकरणवादी प्रवृत्तियों और क्षेत्रीय आकांक्षाएं; अंतर-राज्य विवाद।
  • योजना और आर्थिक विकास: नेहरूवादी और गांधीवादी दृष्टिकोण; नियोजन और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका; हरित क्रांति, भूमि सुधार और कृषि संबंध; उदारीकरण और आर्थिक सुधार।
  • भारतीय राजनीति :में जाति, धर्म और नस्ल।
  • पार्टी सिस्टम: राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, पार्टियों के विचारधारात्मक और सामाजिक आधार; गठबंधन राजनीति के पैटर्न; दबाव समूह, चुनावी व्यवहार में रुझान; विधायकों के सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल को बदलना।
  • सामाजिक आंदोलन: नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार आंदोलन; महिला आंदोलन; पर्यावरणवादी आंदोलनों।

UPSC POLITICAL SCIENCE AND INTERNATIONAL RELATIONS OPTIONAL PAPER-II SYLLABUS IN HINDI

तुलनात्मक राजनीतिक विश्लेषण और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति

  • तुलनात्मक राजनीति: प्रकृति और प्रमुख दृष्टिकोण; राजनीतिक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक समाजशास्त्र दृष्टिकोण; तुलनात्मक विधि की सीमाएं।
  • तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्य: पूंजीवादी और समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं में राज्य की विशेषताएं और बदलती प्रकृति, और उन्नत औद्योगिक और विकासशील समाज।
  • प्रतिनिधित्व और भागीदारी की राजनीति: उन्नत औद्योगिक और विकासशील समाजों में राजनीतिक दलों, दबाव समूहों और सामाजिक आंदोलनों।
  • वैश्वीकरण: विकसित और विकासशील समाजों के जवाब।
  • अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन के दृष्टिकोण: आदर्शवादी, यथार्थवादी, मार्क्सवादी, कार्यकर्ता और सिस्टम सिद्धांत।
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण अवधारणाएं: राष्ट्रीय हित, सुरक्षा और शक्ति; शक्ति और प्रतिरोध का संतुलन; अंतर्राष्ट्रीय अभिनेताओं और सामूहिक सुरक्षा; विश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था और वैश्वीकरण।
  • अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक आदेश बदलना:(1). सुपर शक्तियों का उदय; सामरिक और वैचारिक द्विपक्षीयता, हथियारों की दौड़ और शीत युद्ध; परमाणु खतरा; (2). गैर-अलंकृत आंदोलन: लक्ष्य और उपलब्धियां; (3) सोवियत संघ का पतन; एकता और अमेरिकी विरासत; समकालीन दुनिया में गैर संरेखण की प्रासंगिकता।
  • अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली का विकास: ब्रेटनवुड से डब्ल्यूटीओ तक; समाजवादी अर्थव्यवस्थाएं और सीएमईए (म्यूचुअल इकोनॉमिक असिस्टेंस काउंसिल); तीसरी दुनिया की नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की मांग; विश्व अर्थव्यवस्था का वैश्वीकरण।
  • संयुक्त राष्ट्र: परिकल्पना की भूमिका और वास्तविक रिकॉर्ड; विशिष्ट संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों-उद्देश्य और कार्य; संयुक्त राष्ट्र सुधारों की आवश्यकता है।  
  • विश्व राजनीति के क्षेत्रीयकरण: यूरोपीय संघ, आसियान, एपीईसी, सार्क, नाफ्टा।
  • समकालीन वैश्विक चिंता: लोकतंत्र, मानव अधिकार, पर्यावरण, लिंग न्याय, आतंकवाद, परमाणु प्रसार। 

भारत और विश्व

  • भारतीय विदेश नीति: विदेशी नीति के निर्धारक; नीति बनाने के संस्थान; निरंतरता और परिवर्तन।
  • गैर-संरेखण आंदोलन में भारत का योगदान: विभिन्न चरणों; वर्तमान भूमिका।
  • भारत और दक्षिण एशिया: क्षेत्रीय सहयोग: सार्क ‘पिछले प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाएं। ख। एक मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में दक्षिण एशिया। सी। भारत की “लुक ईस्ट” नीति। क्षेत्रीय सहयोग के लिए प्रभाव: नदी के पानी के विवाद; अवैध सीमा पार प्रवासन; जातीय संघर्ष और विद्रोह; सीमा विवाद।
  • भारत और वैश्विक दक्षिण: अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के साथ संबंध; एनआईईओ और डब्ल्यूटीओ वार्ता की मांग में नेतृत्व की भूमिका।
  • भारत और वैश्विक शक्ति केंद्र: यूएसए, ईयू, जापान, चीन और रूस।
  • भारत और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली: संयुक्त राष्ट्र शांति-पालन में भूमिका; सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग।
  • भारत और परमाणु प्रश्न: धारणाओं और नीति को बदलना।
  • भारतीय विदेश नीति में हाल के घटनाक्रम: अफगानिस्तान, इराक और पश्चिम एशिया में हालिया संकट पर भारत की स्थिति, अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते संबंध; एक नए विश्व व्यवस्था की दृष्टि।