How to become an IAS officer in Hindi

Welcome to Top Sarkari Result प्रत्येक वर्ष Union Public Service Commission (UPSC) द्वारा India Civil Service Exam परीक्षा आयोजित की जाती है इसमें 800 से 1000 तक पद होते हैं। आइये How to become IAS officer को Step by Step समझते है।

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प्रत्येक भारतीय जिसने  किसी भी विषय में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से सनातक  की डिग्री प्राप्त की हो और उसकी आयु 21 से 32 वर्ष हो (Eligibility IAS Civil Service Exam) वह यह परीक्षा देकर IAS बन सकता है।

3 Steps How to become an IAS officer in Hindi

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प्रत्येक वर्ष लाखों युवा सिविल सर्विस के लिए परीक्षा देते हैं किंतु इनमें से केवल 100 से 150 लोग IAS बन पाते है। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं हैं की IAS बनने के लिए कड़ी मेहनत और लग्न की आवश्यकता होती है। UPSC Syllabus और Exam Pattern को समझने के बाद IAS परीक्षा के लिए 3 चरणों से होकर गुजर ना पड़ता है जो इस प्रकार है:- (1) UPSC Prelims (2) UPSC Mains (3) UPSC Personality Test (Interview).

यदि आप इन तीनों चरणों को पास कर लेते हैं और 1 से 100 के बीच में Rank  हासिल कर लेते हैं  तो आप एक IAS OFFICER बन जाते हैं।

प्रतिवर्ष UPSC विभिन्न सेवाओं और पदों जैसे IAS, IPS, IFS, IRS, Railway Service etc. 25 प्रकार की  सेवाओं के लिए  UPSC Civil Service Exam आयोजित करती है जिसमें लाखों युवा भाग लेते हैं किंतु सेवाओं और पदों का चयन उम्मीदवारों की RANK पर आधारित होता है।

प्रत्येक युवा की पहली पसंद भी IAS बनना ही होता है जिसके पीछे  सबसे बड़ा कारण है IAS Officer की सामाजिक प्रतिष्ठा, Power और मिलने वाली बेहतरीन सुविधाएं और अच्छी Salary.

अब आपका सबसे पहला प्रश्न होगा एक IAS अधिकारी के पास कौन-कौन से अधिकार, शक्तियां (Powers) होती हैं?

Powers of an IAS officers

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एक IAS officer के पास बहुत सारे Powers होती है, इनकी Powers का अंदाजा हम इस बात से लगा सकते है की किसी राज्य का मुख्यमंत्री या मंत्री भी किसी IAS अधिकारी को नौकरी से नहीं हटा सकता केवल उसका Transfer करा सकता है।

भारत में मंत्रियों के बाद यदि किसी की सबसे अधिक POWER है तो वह है एक IAS officer. Central Government और State Government के different Departments में High Level Posts पर IAS officers ही नियुक्त होते हैं।

देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए IAS officers बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसी कारण इन्हें बहुत Powers प्रदान की गई है:-

1. District Magistrate (DM) Level Powers of IAS officers

  1. प्रत्येक जिले का Head District Magistrate यानी के (D.M.) होता है, इसे हम District Collector के नाम से भी जानते हैं। DM के रूप में IAS officer को बहुत Powerful माना जाता है।
  2. DM के रूप में एक IAS officer, Police Department के साथ साथ अन्य Departments का भी Head होता है।जैसे:- Revenue, Health, Education, Labour etc.
  3. जिले में होने वाले Development Work के लिए Funds का Allotement भी D.M ही करता है यदि उसे किसी भी कार्य में गड़बड़ी लगती है तो वह उस कार्य को करने वाले Contractor का Contract भी रद्द कर सकता है।
  4. District की पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी भी DM के पास ही होती है। शहर में curfew, 144 इत्यादि Law and Order से जुड़े सभी Decision DM ही लेता है। भीड़ पर Firing का आर्डर भी DM ही देता है।

2. Chef Secratry Level Powers of IAS officers

  1.  State Government में नौकरशाही का सबसे बड़ा पद Chef Secratry का होता है जो एक IAS Officer ही होता है जो सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करता है।
  2.  State Government के सभी नौकरशाहों का मुखिया Chef Secratry होता है जो एक IAS Officer है। 

3. Cabinet Secraty Level Powers of IAS officers

  1. Central Government में सबसे उच्च पद Cabinet Secraty का होता है जो पूरे भारत में एक ही होता है और वह सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है, भारत में प्रधानमंत्री के बाद सबसे अधिक पावर Cabinet Secratry की होती है।

4. Other Powers of IAS officers

  1. एक IAS officer Government और Public के बीच समन्वय बनाने का कार्य भी करता है।
  2. Public के लिए Governement द्वारा बनाए गए Rules & Regulations को Public तक पहुंचाने और सुचारु रुप से लागू कराना तथा क्रियान्वित  रूप देना एक IAS officer का कार्य है।
  3. एक IAS अधिकारी के अंतर्गत आने वाले विभागों के कर्मचारी यदि अपना कार्य सुचारू रूप से नहीं करते है तो वह उन पर  कार्यवाही कर सकता है तथा उन्हें निलंबित भी कर सकता है।
  4. एक IAS अधिकारी कभी भी किसी भी विभाग की जांच कर सकता है तथा गड़बड़ी पाए जाने पर  उस पर कार्यवाही के आदेश दे सकता है।

5 Level Resposibility & Duties of IAS officer

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1. Sub-Divisional Level Resposibility & Duties of IAS officer

एक IAS officer को Starting Career में Sub-Divisional Magistrate Appoint किया जाता है। SDM Level पर IAS officer की Primary Responsibility अपने allotted Jurisdiction में General Administrative and Developmental Work देखना और Law & Order maintain रखना होता है।

2. District Level Resposibility & Duties of IAS officer

Sub-Divisional Magistrate के बाद IAS officer Promote होकर District Magistrate बनते है जिसे D.M. भी कहा जाता है। Divisional Magistrate Level पर IAS अधिकारी की Powers और Responsibility समान होती है।

3. State Level Resposibility & Duties of IAS officer

District Magistrate के बाद IAS officer Promote होकर State Level Administration बनते है जिसे Bureaucrat in State Secretariat or Head of Departments भी कहा जाता है। State Level Administration की Post पर एक IAS officer का Work Profile अपने Field Level Experience के आधार पर Elected Executives को Policy Formation से सम्बंधित Advice देना होता है।

4. In Public Sector Undertakings Resposibility & Duties of IAS officer

IAS officers को Government Public Sector Undertakings यानि PSUs में High Level Administrative positions पर नियुक्त किया जाता है और उन्हें यह ज़िम्मेदारी दी जाती है ताकि PSUs का संचालन भली प्रकार से हो सके।

5. Central Level Resposibility & Duties of IAS officer

Central Level पर IAS officers को Central Government द्वारा भिन्न भिन्न प्रकार के High-Level Respectful Posts पर appoint किया जाता है जैसे Cabinet Secretary, Secretary, Additional Secretary, Joint Secretary, Director, Deputy Secretary and Under Secretary. 

इन सभी पदों पर उन्हें ज़िम्मेदारी दी जाती है कि Finance, Defence, Commerce और different Ministries में Governmental Policies को पूर्णतः ईमानदारी से implement किया जाएं।

IAS Officer Salary Scale & Designation

 Pay LevelBasic Pay(INR)Number of years required in servicePost
(District Administration)
Post
(State Secretariat)
Post
(Central Secretariat)
1056,100/-1-4Sub-Divisional Magistrate(SDM)UndersecretaryAssistant Secretary
1167,700/-5-8Additional District Magistrate(ADM)Deputy SecretaryUndersecretary
1278,800/-9-12District Magistrate (DM)Joint SecretaryDeputy Secretary
131,18,500/-13-16District Magistrate (DM)Special Secretary-cum-DirectorDirector
141,44,200/-16-24Divisional CommissionerSecretary-cum-CommissionerJoint Secretary
151,82,200/-25-30Divisional CommissionerPrincipal SecretaryAdditional Secretary
162,05,400/-30-33No Equivalent RankAdditional Chief SecretaryNo Equivalent Rank
172,25,000/-34-36No Equivalent RankChief SecretarySecretary
182,50,000/-37+ yearsNo Equivalent RankNo Equivalent RankCabinet Secretary of India

The Dearness Allowance (DA) is fixed at 0% for IAS officers starting their career and increases with time.

The salaries of all IAS officers start at the same level and then increase with their tenure and promotions.

UPSC Frequently Asked Questions (FAQ)

What is IAS officer full form?

Indian Administrative Service (I.A.S) officer.

Who was the first women IAS officer?

Anna Rajam Malhotra India की First Indian Administrative Service (IAS) officer थी। उनका Selection 1951 के Batch से हुआ था।

Who was the first IAS officer of india?

Satyendranath Tagore First Indian थे जिन्होंने 21 साल की उम्र में सन 1863 में ICS(Indian civil Services) Exam Clear किया था। वह Rabindranath Tagore के बड़े भाई थे।

Who is the youngest IAS officer in India?

Ansar Ahmad Shaikh India के Youngest IAS officer है। उन्होंने 21 साल की  उम्र में UPSC CSE 2016 Clear किया जिसमे उनकी Rank AIR-361 थी।

Who is the father of Indian Civil Services?

Charles Cornwallis.

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UPSC Complete Information in Hindi: दोस्तों Top Sarkari Result पर आपका स्वागत है। आज हम UPSC Civil Service Exam को लेकर Candidates के मन में आने वाले Questions के बारे में Discussion करेंगे। Top Sarkari Result का यह Blog UPSC (IAS) QnA (Questions and Answers से related है।

UPSC Full Form, UPSC History, Work of UPSC and Detail of UPSC Exams

UPSC क्या है? इसे समझने के लिए हमें विभिन्न प्रश्नों के उत्तर की जानकारी होना अनिवार्य है यह प्रश्न निम्नलिखित हैं:

  1. UPSC की Full Form?
  2. UPSC की स्थापना कब हुई?
  3. UPSC के क्या कार्य है?
  4. UPSC में  कितने सदस्य होते हैं और उनकी नियुक्ति  कैसे होती है और कौन करता है?
  5. UPSC किन-किन परीक्षाओं का आयोजन करता है?

1. UPSC की FULL FORM?

UPSC की FULL FORM (Union Public Service Commission) है हिंदी में इसे संघ लोक सेवा आयोग कहा जाता है।दफदफ 

2. UPSC की स्थापना कब हुई?

UPSC (Union Public Service Commission) संघ लोक सेवा आयोग को पहले Public Service Commission (PSC) अर्थात लोक सेवा आयोग के नाम से जाना जाता था।

प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना आजादी से पहले 1 अक्टूबर  1926  को हुई थी। भारत के स्वतंत्र होने के पश्चात 26 अक्टूबर 1950 को संविधान के अनुच्छेद 315 के अंतर्गत एक नए लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।

इस नव निर्मित लोक सेवा आयोग का नाम बदलकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) रखा गया और इसे एक स्वतंत्र आयोग भी बनाया गया ताकि बिना किसी के दबाव के यह निष्पक्ष तरीके से योग्य अधिकारियों की नियुक्ति कर सकें।

3. UPSC के क्या कार्य है?

  1. UPSC-संघ लोक सेवा आयोग का मुख्य कार्य केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों की लोक सेवाओं के लिए ग्रुप ‘A’  तथा ग्रुप ‘B’ के अधिकारियों की नियुक्ति करना  कथा उसके लिए परीक्षाओं का आयोजन करना है।
  2. सेवाओं में भाग लेने वाले व्यक्तियों के लिए योग्यता  का निर्धारण करना तथा उचित मानक स्थापित करना।
  3. UPSC सेवाओं के अधिकारों की सुरक्षा करता है तथा सेवाओं के नियंत्रण और अनुशासन के लिए भी कार्य करता है यह कार्य एक तरह से  न्याय विधान  के समरूप कार्य है।
  4. UPSC सेवाओं से संबंधित उत्पन्न होने वाली सामान्य समस्याओं पर परामर्श है अनुमति भी देता है। 

4. UPSC में कितने सदस्य होते हैं और उनकी नियुक्ति कैसे होती है और कौन करता है?

UPSC  मैं एक चेयरमैन तथा 10 सदस्य होते हैं UPSC मैं नियुक्ति के लिए इन सदस्यों का कम से कम 10 साल तक केंद्र लोक सेवा या राज्य लोक सेवा या सिविल सेवा के पद पर कार्यरत होना अनिवार्य है। उसके पश्चात ही इनकी नियुक्ति UPSC में की जाती है।

UPSC  के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है और अधिकतम आयु 65 वर्ष होती है इसमें से जो भी पहले हो उसे मान्य किया जाता है अर्थात या तो सदस्य का 6 वर्षों का कार्यकाल पूरा हो गया हो या उसकी आयु 65 वर्ष हो गई हो।

UPSC के सदस्यों चयन और नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है कोई भी सदस्य अपने कार्यकाल के बीच में अपनी इच्छा से राष्ट्रपति को इस्तीफ़ा दे सकता है तथा इससे पहले  यदि  कोई सदस्य पद की अवमानना करता है भ्रष्टाचार तथा अवैध कार्यों में अपराधी सिद्ध होता है तो उसे राष्ट्रपति द्वारा बर्खास्त किया जा सकता है। 

यदि आप सदस्यों के बारे में अधिक जानकारी तथा उनके नाम जानना चाहते हैं और UPSC  के बारे में और अधिक जानकारी चाहते हैं तो आप UPSC Official Website  पर भी जा सकते हैं।

5. UPSC किन-किन परीक्षाओं का आयोजन करता है ?

UPSC विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं का आयोजन करता है आइए जानते हैं वे विभिन्न परीक्षाएं कौन सी है:

  1. UPSC Civil Services Examination | भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा
  2. Indian Forest Service Examination | भारतीय वन सेवा परीक्षा
  3. Combined Defence Service Examination (CDS) | सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा 
  4. Combined Geo-Scientist and Geologist Examination | सम्मिलित भू-विज्ञानी परीक्षा
  5. Indian Economic Service and Indian Statistical Service Examination | भारतीय अर्थ सेवा/भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा
  6. Combined Medical Services Examination | सम्मिलित चिकित्सा सेवा परीक्षा
  7. National Defence Academy and Naval Academy Examination | राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा
  8. Central Armed Police Forces (ACs) Examination | केंद्रीय सशस्त्र बल (सहायक कमांडेंट) परीक्षा
  9. Indian Engineering Services Examination | भारतीय इंजीनियरी सेवा परीक्षा

अभी तक हमने समझा UPSC यानि Union Public Service Commission क्या है और इसकी स्थापना क्यू की गई।

जैसा कि आप जानते है UPSC Exam को Clear करने के लिए बहुत अधिक पढ़ना पड़ता है, जितना पढ़ना जरूरी है उससे भी अधिक जरूरी है ये पता होना की पढ़ना क्या है, कहा से शुरुआत करनी है।

UPSC Exam Clear करने के लिए एक अच्छी प्लानिंग बहुत महत्वपूर्ण है बिना किसी प्लानिंग के UPSC Clear करना बहुत कठिन है। 

जब हम UPSC की तैयारी के लिए Plan बनाते है तो बहुत सारे Questions दिमाग में आते है आइये कुछ Questions के Answer द्वारा हम आपको UPSC की पढाई के बारे में पूर्ण  जानकारी देने की कोशिश करेंगे।

Questions related to Difficulty Level of UPSC

Is UPSC easy to crack?

हर इंसान का सपना होता है कि वह एक बड़ा इंसान बने समाज में उसकी इज़्ज़त हो वह एक ऊंचा पद हासिल करे अपने माता पिता का नाम रोशन करे किंतु बड़ा बनने के लिए आपका सपना भी बड़ा होना चाहिए।

जब सपना बड़ा होगा तो मेहनत भी बड़ी होगी लेकिन अगर इंसान अगर कुछ पाने का इरादा कर ले और उसे पाने के लिए जी जान से मेहनत करे तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।

कोई Doctor  बनना चाहता है कोई Engineer कोई CA कोई Army में जाना चाहता है कोई Police तो कोई पायलट बनना चाहता है  तो कोई Scientist. 

ये सभी पद समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है, इन्हे समाज  में बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है और हो भी क्यों न क्योंकि इन सब के लिए मेहनत भी बहुत करनी पड़ती है। 

इन सब से ऊपर एक ओर पद है जिसे हासिल करने के लिए प्रतिवर्ष लाखों युवा सपना देखते है वो है UPSC Civil Service, UPSC Clear करना कोई बच्चों का खेल नहीं है, इसे Clear करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है दिन रात एक करने पड़ते है।

Is UPSC tougher than IIT, MBA, CA or other high profile Exam?

UPSC को India की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है क्योंकि UPSC Civil Service Clear करने के पश्चात भारत सरकार में  सबसे उच्च प्रशासनिक  पदों पर कार्य करने का अवसर मिलता है,  इन पदों को  प्राप्त करने से समाज में प्रतिष्ठा और मान सम्मान प्राप्त होता है | जिसमें सबसे लोकप्रिय है IAS Officer.

UPSC  Clear करना IIT, MBBS ,CA , MBA Clear करने से भी Difficult है।

Why is UPSC so hard | UPSC Clear करना इतना कठिन क्यों है?

जैसा कि हमने बताया UPSC, India की सबसे बड़ी परीक्षा है इसे Clear करने वाले लोगों को भारत सरकार की प्रशासनिक सेवाओं में सबसे ऊँचे पदों पर कार्य करने का अवसर मिलता है अब इतने ऊँचे पदों पर कार्य करने के लिए योग्य व्यक्तियों का चुनाव करना अनिवार्य है जिसके लिए परीक्षा का कठिन होना स्वाभाविक है इस परीक्षा के कठिन होने का एक कारण ओर है Very Tough Competition.

किंतु UPSC के Tough होने का मतलब यह नहीं कि इसे Clear नहीं किया जा सकता।

Is UPSC really tough for average students?

UPSC Clear करना इस बात पर Depend नहीं करता कि अभियार्थी किस श्रेणी का Student है, Normal, Average ओर Scholar, UPSC हर प्रकार के Student के लिए tough है।

शायद एक Average स्टूडेंट अपनी मेहनत और लगन से UPSC Exam Clear कर ले,ओर एक Scholar Student उतनी मेहनत ना कर पाए जितनी UPSC के लिए चाहिए। 

यह कहना उचित नहीं होगा कि UPSC Average Student के लिए Tough है और Scholar  या Intelligent  Student के लिए Easy है।

वैसे आसान शब्दों में कहा जाए तो UPSC किसी के लिए भी Easy नही है इसके लिए सबको कड़ी मेहनत करनी ही पड़ती है।

Questions related to UPSC Exam Subjects

UPSC Exam की तैयारी करने वाले Students के मन में सबसे पहला Question यह आता है: 

Which subject should I start first in UPSC?

Which subject is best for IAS?

What are the subjects of UPSC?

एक अच्छे अभ्यार्थी के मन में उठने वाले यह प्रश्न उसका मार्ग दर्शन करते है ताकि वह अपने Strength और weakness को अच्छी तरह समझ कर अपनी तैयारी सही Direction में कर सके।

UPSC Exam Clear करने के लिए UPSC Prelims Syllabus और UPSC Mains Syllabus के Subjects और Exam Pattern को समझना जरूरी है ताकि आप आप Right Direction में अपने Efforts लगा कर Positive Result हासिल कर पाए।

IAS की तैयारी करने वाले Students के लिए Best Subject कोई नहीं है Civil Service Exam में Arts, Commerce और Science से related subjects होते है और आपको सब कुछ पड़ना। 

Questions related to UPSC Study

How can I study smartly for UPSC?

What is the right age to prepare for IAS?

At what age should we start preparing for IAS?

Where should I start in UPSC?

Can I start preparing for UPSC after 12th?

अब हम बात करते है उन बच्चों की जो UPSC  सिविल सर्विस में जाना चाहते है अगर हम UPSC परीक्षा की तैयारी के  लिए सबसे सही समय की बात करे तो वह समय है जब बचा 6th कक्षा में जाता है 

यदि वह उसी समय से अगर अपनी पढ़ाई  को UPSC परीक्षा के अनुसार करे तो Graduation तक वह UPSC परीक्षा के अपने आप को बहुत अच्छी तरह से  तैयार कर चुका होगा, और हो सकता है पहले  प्रयास में UPSC Clear कर ले क्योंकि UPSC में जो Syllabus आता है वह Maximum  6th से लेकर ग्रेजुएशन तक का ही होता है।

Students doubts related to Stream, Medium and Degree 

Which medium is best for IAS?

Which stream is best for IAS?

Which degree is best for IAS?

Is BA good for IAS?

यदि 10th के बाद Arts Stream से पढ़ा जाए तो UPSC Clear करना और आसान होगा, क्योंकि UPSC के Prelims Exam और Main Exam का 50 से 60 % Syllabus Arts Steam से संबंधित होता है।

जो विद्यार्थी स्कूल टाइम से UPSC की तैयारी नहीं करते और ग्रेजुएशन के बाद UPSC की तैयारी करना आरंभ करते है उनके लिए UPSC Clear करना थोड़ा कठिन होता है, उन विद्यार्थियों की अपेक्षा जो स्कूल टाइम से तैयारी आरम्भ कर देते है। 

Doubts related to UPSC Coaching and Self Study

Can I pass UPSC without coaching?

Is self study enough for UPSC?

How can I self study for UPSC?

Is coaching required for UPSC?

Graduation के बाद UPSC की तैयारी करने वाले  ज्यादातर विद्यार्थी कोचिंग का सहारा लेते है लेकिन ऐसा नहीं है की सभी विद्यार्थी  UPSC के लिए कोचिंग का सहारा लेते है।

बहुत से विद्यार्थी ऐसे भी है जो कोचिंग नहीं ले सकते वो बिना कोचिंग के घर पर SELF STUDY से भी UPSC की परीक्षा Clear करते है बस इसके लिए कड़ी मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है।

Is NCERT book enough for IAS?

Which NCERT books to read for IAS?

How should I start preparing for UPSC from zero?

How can I start my IAS at home?

ज्यादातर कोचिंग  संस्थान विद्यार्थियों को सबसे पहले 6TH से 12TH तक की NCERT Books  को पढ़ने के लिए बोलते है, क्योंकि NCERT Books को UPSC के लिए सबसे उत्तम माना जाता है और Graduation की Books हमे UPSC Prelims और UPSC Mains Exam की Deep Knowledge देती है। 

UPSC Exam Clear करने के लिए हमे UPSC Syllabus और UPSC Exam Pattern को अच्छी तरह समझना बहुत जरूरी है ताकि हम बिना coaching के Smart Study करके UPSC Exam Clear कर सके। 

Questions related to UPSC INTERVIEW

Is the UPSC interview difficult?

जैसा कि आप जानते है UPSC परीक्षा के तीन चरण होते है UPSC Prelims Exam, UPSC Mains Exam ओर Personality Test जिसे Interview भी कहा जाता है। 

UPSC Interview को सबसे Difficult माना जाता है, क्योंकि इसका कोई Fixed Syllabus नहीं होता, Interview में आप से किसी भी विषय से प्रसन्न पूछे जा सकते है, इसमें सबसे ज्यादा Question General knowledge से पूछे जाते है। 

Interview के माध्यम से ये जानने की कोशिश की जाती है कि आप UPSC Civil Service के योग्य है या नहीं।

What happens if I fail the UPSC interview?

UPSC में Interview सबसे Difficult ओर महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि आप इसको पास नहीं कर पाते ओर फैल हो जाते है तो आपको फिर से परीक्षा का पूरा Process दोहराना पड़ेगा मतलब फिर से UPSC Prelims Exam ओर UPSC Mains Exam देना होगा।

इंटरव्यू का लेवल बहुत कठिन होने के कारण इसमें बहुत कम लोग पास हो पाते हैं लेकिन घबराइए मत यदि आपने कड़ी मेहनत की है तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी 

UPSC Interview देते समय किन- किन बातो का ध्यान रखना चाहिए?

What is the dress code for UPSC interview?

What should I wear to UPSC interview?

UPSC Interview के लिये क्या पहनना चाहिये या Dress Code क्या है?

जब भी आप  का Interview देने जाए आपका ड्रेसिंग सेंस अच्छा होना चाहिए हमेशा फॉर्मल ड्रेस पहन के जाना चाहिए जैसे फॉर्मल पैंट शर्ट और टाई । आपकी ड्रेस साफ सुथरी ओर प्रेस की हुई होनी चाहिए , ताकि Interview लेने वाला पैनल आपके ड्रेसिंग सेंस में एक Officer के जैसा ड्रेसिंग सेंस देख पाए ओर आपका  First Impression प्रभावशाली हो।

Which language is used in IAS interview?

UPSC Interview के लिए किस भाषा का प्रयोग करना चाहिए?

Interview में पुछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब उसी (Language) भाषा में दें जिस (Language) भाषा में आप कंफर्टेबल हो।

ज्यादातर लोगों का मानना है कि Interview अंग्रेजी भाषा में देने से अच्छा इंप्रेशन पड़ता है किंतु ऐसा नहीं है यदि आप अंग्रेजी भाषा में कंफर्टेबल नहीं है तो आप हिंदी भाषा में Interview दे।

Interview लेने वालों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन सी भाषा में Interview दे रहे हैं अंग्रेजी या हिंदी बस होने पर किस बात से पड़ता है कि आप जिस भी भाषा में Interview दे वह आपको अच्छी प्रकार से आनी चाहिए  जिसे बोलने में आपको कोई परेशानी ना हो।

मान लीजिए यदि आपको अंग्रेजी भाषा अच्छे  प्रकार से बोलनी नहीं आती और आप अपने  जवाब अंग्रेजी भाषा में देने लगते हैं और आप अपने  जवाब  को ठीक प्रकार से नहीं समझा पाते तो इसका इंप्रेशन बहुत गलत पड़ता है।

How can I face IAS interview?

What happen in IAS interview?

Interview Room मे जाने के बाद जब तक आपको बैठने के लिए ना कहा जाए ना बैठे ओर जब बैठे तो सीधे बैठना चाहिए मतलब सावधान अवस्था में बैठे। 

Interview पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर बिना झिझक के दें, यदि आपको किसी प्रश्न का उत्तर नहीं पता तो आप बिना किसी डर के मना कर दें। Interview में कई बार आपको कंफ्यूज करने के लिए  ऐसे घुमावदार प्रश्न पूछे जाते हैं जो आपकी सूझ-बुझ ओर बौद्धिक क्षमता का आंकलन करते है ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय घबराए नहीं पूर्ण विचार करके ही उत्तर दें।

HOW TO CRACK | Time to Clear UPSC Civil Service Exam

UPSC Civil Service Exam या किसी भी Exam की तैयारी करने वाले Candidates के मन में उस Exam को Clear करने और Exam की Preparation में लगने वाले Time से related कई Question मन में आते है।

आइये UPSC Civil Service Exam से सम्भंदित कुछ Questions को समझते है और उनका Answer जानते है:

Is 4 Months enough for IAS Prelims Exam?

Can I clear UPSC Mains Exam in 3 months?

Can I crack or clear IAS in 1 year?

Is 1 year enough for UPSC (IAS) preparation?

Is it possible to clear UPSC in 6 months?

How can I clear my IAS in 6 months?

संसार में हर व्यक्ति की Qualities, Strength और Weakness अलग अलग होती है, उसी प्रकार उनका field of Interest भी अलग अलग होता है। हम कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति की Achievement से अपना Target set नहीं कर सकते है।

कुछ candidates UPSC Civil Service Exam first attempt में clear कर लेते है और कुछ काफी प्रयास करने के बाद भी Clear नहीं कर पाते।

UPSC Exam कितने Time में Clear करना इस Target को Set करने से पहले हमे UPSC Prelims Exam और UPSC Mains Exam के Syllabus, Exam Pattern और Subjects को अच्छी तरह समझना होगा।

उसके बाद हमे अपनी strength को समझते हुए खुद अपना Target set करना होगा कि हम कितने Time में अपनी preparation complete कर पाएंगे क्योंकि UPSC Civil Service Exam एक Competitive Exam है और Final Selection Merit List के bases पर बनती है।

SELECTION PROCESS OF UPSC CIVIL SERVICES EXAM

How are IAS selected?

UPSC Selection Process को समझने के लिए UPSC Eligibility, UPSC Prelims Exam और UPSC Mains Exam और Interview को समझना बहुत जरुरी है। Complete Process को समझने के लिए नीचे दिए Link पर Click करे।

UPSC Eligibility and Selection Process

Required Percentage for Qualify UPSC Exam

What is the minimum percentage for IAS?

What is the pass percentage of UPSC exam?

IAS Exam आवेदन के लिए  किसी भी मान्यता प्राप्त University या Institute से Graduate होना अनिवार्य है।

Graduation आप किसी भी विषय या माध्यम से कर सकते हैं अर्थात यदि आपको IAS  बनना है तो पहले Graduation करना अनिवार्य है उसके बाद ही आप IAS Exam के लिए आवेदन कर सकते हैं।

UPSC Civil Service Exam एक Competitive Exam है और Final Selection Merit List के bases पर बनती है इसलिए Exam Clear करने के लिए कोई भी Fixed Pass Percentage नहीं है।

UPSC Exams – Subjects related doubts. 

Is math compulsory for IAS?

UPSC Exam देने के लिए Mathematics Compulsory नहीं है According to Eligibility Criteria. 

Question related to earning prospective regarding UPSC

Who earns more IAS or CA? 

Is MBA better than UPSC?

UPSC Exam Clear करने के बाद हमे भारतीय सामाजिक एवं कानून व्यवस्था में जो Posts मिलती वह सभी बहुत सम्माननीय पद है। उन पदों को किसी भी Degree Qualification और Professional Skill से Compare नहीं किया जा सकता है।

अगर Earning Point of View से देखेंगे तो CA की Earning एक IAS की Earning से बहुत ज्यादा हो सकती है लेकिन अगर मान, सम्मान और प्रतिष्ठा की दृष्टि से देखेंगे तो एक IAS का पद एक Chartered Accountant (CA) के पद से ज्यादा सम्माननीय है। 

Salary related Question Regarding UPSC

What is the salary of UPSC?

UPSC Exam Clear करने बाद Government Departments में अलग अलग Level की Different Post मिलती है और उन सभी Posts का Salary Structure भी अलग अलग होता है। UPSC Civil Service Exam के Salary Structure को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक कर Click करे

UPSC Salary Structure

UPSC Frequently Asked Questions (FAQ)

Who is the youngest IAS officer?

Ansar Ahmad Shaikh भारत में अभी तक के सबसे कम उम्र में बनने वाले IAS Officer है। उन्होंने UPSC CSE Exam 2016 में AIR-361 Rank प्राप्त की थी।

What is the cost of IAS?

IAS Indian Civil Services की Preparation करने में आने वाली COST इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस Institute से Coaching कर रहे है। अलग अलग Coaching Institute की अलग अलग Fees होती है।

Which is the highest post in UPSC?

Cabinet Secretary

Can a failure become IAS?

Yes.

How many IAS are selected in a year?

ऐसा कोई Fix नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है की भारत सरकार को कितने IAS की Requirement है।

Is English necessary for IAS?

UPSC Mains Exam में एक Paper English का होता है यह एक Qualifying Paper होता है। जिसे Clear करना Compulsory है।

Which is more tough CA or IAS?

CA का Syllabus Fix होता है लेकिन UPSC (IAS) का कोई Fix Syllabus नहीं है इसलिए IAS CA से ज्यादा Tough है।

Which is toughest exam in India?

UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam)

Can I clear UPSC while working?

Yes

Who got highest marks in UPSC interview?

Anudeep Durishetty Topper UPSC Exam 2017. उन्होंने personality test (UPSC Interview) में Total 275 Marks में से 176 Marks प्राप्त किये।

Eligibility For UPSC Exam | IAS Civil Service Exam in Hindi

हर भारतीय युवा जो Sarkari Naukari या Government Job करना चाहता है उसकी पहली पसंद IAS  बनना होता है लेकिन कुछ भी बनने या हासिल करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी होना अनिवार्य है।

हम आपको IAS के बारे में पूरी जानकारी देने का प्रयास इस लेख के द्वारा करेंगे IAS बनने  के लिए बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर जानना बहुत अनिवार्य है और वह प्रश्न और उनके उत्तर विस्तार पूर्वक आपको बताएं जा रहे हैं।

Who is IAS | IAS कौन होता है?

IAS  का Full Form भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) है IAS भारत सरकार की सबसे बड़ी Sarkari Naukari है जिसकी परीक्षा UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) द्वारा आयोजित की जाती है और  नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

IAS अधिकारी केंद्र तथा राज्य सरकार  मैं SDM, DM, Collector, Joint Secratary, Chief Secratry, Cabinet Secretary etc.  उच्चतम पदों पर कार्य करते हैं।

IAS अधिकारी एक सम्माननीय और पावरफुल व्यक्ति  होता है   जिसके कारण युवाओं में इसके  प्रति   बहुत अधिक आकर्षण होता है अब प्रश्न यह उठता है  की IAS कैसे बनते हैं?

How To Become an IAS | IAS कैसे बनते है? 

प्रतिवर्ष लाखों युवा IAS Exam देते  हैं किंतु सफलता  कुछ लोगों को मिलती है इसका मतलब  यह है कि IAS बनना इतना आसान नहीं है किंतु  पूरी लगन और मेहनत के साथ तैयारी की जाए तो मुश्किल भी नहीं है आइए अब हम Step By Step IAS कैसे बनते हैं इसके Process को 6 Step में समझते हैं।

1. Educational Qualification Required For IAS Exam

 IAS Exam आवेदन के लिए  किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से Graduate होना अनिवार्य है Graduation आप किसी भी विषय या माध्यम से कर सकते हैं अर्थात यदि आपको IAS बनना है तो पहले Graduation करना अनिवार्य है उसके बाद ही आप IAS Exam के लिए आवेदन कर सकते हैं।

2.  Age Required For IAS Exam

IAS Exam के लिए AGE Category Wise Decide की जाती है

CategoryMinimum AgeMaximum AgeMaximum Attempt
General Candidate21 Years32 Years6 Attempts
OBC Candidate21 Years35 Years9 Attempts
EWS Candidate21 Years32 Years6 Attempts
SC/ST Candidate21 Years37 YearsUnlimited till the age limit
Physicaly Disabled candidates (Blind,Deaf-Mute,Orthopedic)21 Years42 YearsGeneral and OBC Candidates-9 Attempts,
SC/ST Candidates-Unlimited till the age limit

3. Apply for IAS Civil Services Exam

यदि आप Education Quallification  और Age Criteria  को Fullfill कर लेते हैं तो आप IAS Exam  के लिए आवेदन कर सकते हैं  यह Exam  UPSC   द्वारा आयोजित किया जाता है इसका आवेदन Online UPSC की Offical Website https://upsconline.nic.in/  पर कर सकते हैं।

Online  आवेदन के  बाद तीन  चरणों में परीक्षा आयोजित होती है 1. UPSC Preliminary Exam 2. UPSC Main Exam. 3. Interview.

Note:- Online आवेदन करने के पश्चात 1. Preliminary Exam 2. Main Exam. 3. Interview. के लिए अलग से कोई Applicaton form fill करने की आवश्यकता नहीं होती। 

4. IAS Civil Services | UPSC Preliminary Exam

आवेदन करने के पश्चात सबसे पहले Premiminary Exam  होता है इसमें 200-200 Marks  के Objective Type दो Paper होते हैं  प्रत्येक Paper 2 घंटे का होता है और इसमें Negative Marking भी होती है यह Paper हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में होता है।

पहला Paper -1 GSAT(General Studies Aptitude Test)  और दूसरा Paper-2 CSAT(Civil Service Aptitude Test)  होता है  यह Paper  Quallifing Paper होता है जो Main Exam के लिए अनिवार्य है किंतु  इसके Marks Final Result में  Count  नहीं होते।

5. IAS Civil Services | UPSC Mains Exam

जब आप Preliminary Exam  Clear कर लेते हैं तो  उसके बाद Main Exam  होता है  जो Preliminary Exam  के मुकाबले काफी मुश्किल होता है यह Writen Exam  होता है इसमें  कुल 9 Paper होते हैं जिसके कुल अंक 1750  होते हैं  जिसमें 2 Paper ( UPSC Optional Paper) 300-300 Marks   के होते हैं   बाकी 7 Paper 250-250 Marks  के होते हैं।

IAS Main Exam  काफी मुश्किल होता है जिसमें बहुत कम  अभ्यार्थी  पास होते हैं। IAS Main Exam Clear करने के पश्चात तीसरा चरण है Personal Interview.

6. IAS Civil Services | UPSC Interview Exam

जब आप IAS Main Exam  Clear कर लेते हैं उसके बाद आपको Personal Interview  के लिए बुलाया जाता है जोकि 45 मिनट का होता है इंटरव्यू लेने के लिए कुछ लोगों का पैनल होता है जिसमें 3 से 4 लोग आपका Personal Interview लेते हैं।

इसमें आपसे  आपकी Personal Life, Current Affairs, General Knowledge और World Wide किसी भी विषय से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं Personal Interview 275 Marks  का होता है Personal Interview  को तीनों चरणों में सबसे मुश्किल माना जाता है 

Personal Interview Clear होने के पश्चात एक Merit List बनती है जिसमें उच्च अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को कुल Vacancy  के आधार पर चुना जाता है  और जिन अभ्यर्थियों की Rank 1 से 100  तक होती है उनको ही IAS  के लिए चयनित किया जाता है 

इस बात से यह पता लगता है कि अगर आपको IAS बनना है तो केवल UPSC  Exam Clear करना ही अनिवार्य नहीं है बल्कि उसमें उच्च Rank हासिल करना भी अनिवार्य है तभी आप एक IAS अधिकारी बन सकते हैं ।

Note:- Prelims Or Main Exam Clear होने के पश्चात Interview देना अनिवार्य होता है इसमें  किसी प्रकार की कोई छूट नहीं होती। 

UPSC Civil Services Exam भारत की किन भाषाओं में दिया जा सकता है?

IAS Main Exam  में उम्मीदवारों को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची मैं शामिल 22 भाषाओं में से किसी में भी उत्तर देने की छूट प्रदान की गई है।

उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा के Form में Main Exam  के लिए जिस भाषा को अपने माध्यम के तौर पर अंकित करते हैं, उन्हें Main Exam के सभी प्रश्न पत्रों के उत्तर उसी भाषा में लिखने होते हैं। केवल साहित्य के विषयों में यह छूट है कि उम्मीदवार उसी भाषा की लिपि में उत्तर लिखता है, चाहे उसका माध्यम वह भाषा न हो।

UPSC Geology Syllabus Optional Subject in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC Geology Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC Geology Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC GEOLOGY SYLLABUS – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

सामान्य भूविज्ञान

  • सौरतंत्र, उल्कापिंड, पृथ्वी का उद्भव एवं अंतरंग तथा पृथ्वी की आयु, ज्वालामुखी -कारण, प्रभाव, भारत के भूकंपी क्षेत्र, दूवीपाभ चाप, खादयों एवं महासागर-मध्य कटक।
  • महादवीपीय अपोढ़।
  • समुद्र अधस्तल विस्तार, प्लेट विवर्तनिकी।
  • समस्थिति।

भूआकृति विज्ञान एवं सुदूर-संवेदन

  • भूआकृति विज्ञान की आधारभूत संकल्पना।
  • अपक्षय एवं मृदानिर्माण।
  • स्थलरूप, ढाल, एवं अपवाह।
  • भूआकृति चक्र एवं उनकी विवक्षा।
  • आकारिकी एवं इसका संरचनाओं एवं अश्मिकी से संबंध।
  • तटीय भूआकृति विज्ञान।
  • खनिज पूर्वेक्षण में भूआकृति विज्ञान के अनुप्रयोग, सिविल इंजीनियरी।
  • जल विज्ञान एवं पर्यावरणीय अध्ययन।
  • भारतीय उपमहादवीप का भूआकृति विज्ञान, वायव फोटो एवं उनकी विवक्षा-गुण एवं सीमाएं।
  • विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम; कक्षा- परिभ्रमण उपग्रह एवं संवेदन प्रणालियां।
  • भारतीय दूर संवेदन उपग्रह।
  • उपग्रह दत्त उत्पाद, भू-विज्ञान मेँ दूर संवेदन के अनुप्रयोग।
  • भोगोलिक सूचना प्रणालियां (GIS) एवं विश्वव्यापी अवस्थन प्रणाली (GPS) – इसका अनुप्रयोग।

संरचनात्मक भूविज्ञान

  • भूवैज्ञानिक मानचित्रण एवं मानचित्र पठन के सिद्धांत।
  • प्रक्षेप आरेख, प्रतिबल एवं विकृति दीर्घवृत तथा प्रत्यास्थ, सुघट्य एवं श्यन पदार्थ के प्रतिबल्-विकृति संबंध।
  • विरूपित शैली में विकृति चिहनक।
  • विरूपण दशाओं के अंतर्गत खनिजों एवं शैल्रों का व्यवहार वलन एवं अ्रंश वर्गीकरण एवं यांत्रिकी।
  • वलनों, शल्कनों, सरेखणों, जोड़ों एवं भ्रंशों, विषमविन्यासों का संरचनात्मक विश्लेषण, क्रिव्स्टलन एवं विरूपण के बीच समय संबंध।

जीवाश्म विज्ञान

  • जाति-परिभाषा एवं नामपद्धति; गुरू जीवाश्म एवं सूक्ष्म जीवाश्म; जीवाश्म संरक्षण की विधियां; विभिन्‍न प्रकार के सूक्ष्म जीवाश्म।
  • सह संबंध, पेट्रोलियम अनवेषण, पुराजलवायवी एवं पुरासमुद्रविज्ञानीय अध्ययनों मेँ सूक्ष्म, जीवाश्मों का अनुप्रयोग।
  • होमिनिडी एव्डि एवं प्रोबोसीडिया में विकासात्मक प्रवृति।
  • शिवालिक प्राणिजात।
  • गोडंवाना वनस्पतिजात एवं प्राणिजात एवं इसका महत्व।
  • सूचक जीवाश्म एवं उनका महत्व।

भारतीय स्तरिकी

  • स्तरिकी अनुक्रमों का वर्गीकरण।
  • अश्मस्तरिक, जैवस्तरिक, कालस्तरिक एवं चुम्बस्तरिक तथा उनका अंतसंबंध/भारत की कैब्रियनपूर्व शैल्रों का वितरण एवं वर्गीकरण।
  • प्राणिजात, वनस्पतिज्ञान एवं आर्थिक महत्व की दृष्टि से भारत की इश्यजीवी शैलों के स्तरिक वितरण एवं अश्मविज्ञान का अध्ययन।
  • प्रमुख सीमा समस्याएं-कैब्रियन/कैब्रियन पूर्व, पर्मियन/ ट्राइऐसिक, केटेशियस/तृतीयक एवं प्लायोसीन/प्लायोसीन, भूवैज्ञानिक अतीत मेँ भारतीय उपमहाद्वीप मैँ जलवायवी दशाओं।
  • पुराभूगोल एवं आग्नेय सक्रियता का अध्ययन, भारत का स्तरिक ढांचा।
  • हिमालय का उद्भव।

जल भूविज्ञान एवं इंजीनियरी भूविज्ञान

  • जल विज्ञान चक्र एवं जल का जननिक वर्गीकरण।
  • अवपृष्ठ जल का संचलन।
  • बृहत जवार, सरंध्रता, परक्राम्यता, द्रवचालिक चालकता।
  • परगम्यता एवं संचयन गुणांक, ऐक्रिफर वर्गीकरण; लवणजल अंतर्वेधन, कूपों के प्रकार, वर्षाजल संग्रहण।
  • शैलों की जलधारी विशेषताएं; भूजल रसायनिकी; लवणजल अंतर्वैधन।
  • कूपों के प्रकार, वर्षाजल संग्रहण।
  • शैलों के इंजीनियरी गुण-धर्म, बांधों, सुरंगों, राजमार्गों, रेलमार्गों एवं पुल्रों के लिए भूवैज्ञानिक अन्वेषण।
  • निर्माण सामग्री के रूप में शैल।
  • भूस्खलन-कारण, रोकथाम एवं पुनर्वास; भूकंप रोधी संरचनाएं।

UPSC GEOLOGY SYLLABUS – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

खनिज विज्ञान

  • प्रणालियों एवं सममिति वर्गों में क्रिस्टलों का वर्गीकरण; क्रिस्टल संरचनात्मक संकेतन की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली; क्रिस्टल सममिति को निरूपित करने के लिए प्रक्षेप आरेखों का प्रयोग; हय किरण क्रिस्टलिकी के तत्व।
  • शैलकर सिलिकेट खनिज समूहों के भौतिक एवं रासायनिक गुण; सिलिकेट का संरचनात्मक वर्गीकरण; आग्नेय एवं कार्यातरित शैलों के सामान्य खनिज, कार्बोनेट, फास्फेट, सल्‍्फाइड एवं हेलाइड समूहों के खनिज; मृतिका खनिज।
  • सामान्य शैलकर खनिजों के प्रकाशिक गुणधर्म, खनिजों में बहुवगर्णता, विलोप कोण, दविअपवर्तन (डबल रिफ्रैक्शन, बाइरेफ्रिजेंस), यमलन एवं परिक्षेपण ।

आग्नेय एवं कार्यातरित शैलिकी

  • मैगमा जनन एवं क्रिस्टलन; ऐल्वाइट – ऐनॉर्थाइट का क्रिस्टलन: डायोप्साइड – एवं डायोप्साड-वोलास्टोनाइट-ऐनॉथाइट एवं डायोसाइड-वोलास्टोनाइट- सिलिका प्रणालियां;
  • बॉवेन का अभिक्रया सिद्धांत; मैग्मीय विभेदन एवं स्वांगीकरण;
  • आग्नेय शैलों के गठन एवं संरचनाओं का शैलजननिक महत्व; ग्रेनाइट, साइनाइड, डायोराइट, अल्पसिलिक एवं अल्पल्पसिलिक समूहों, चार्नोकाइट, अल्पसिलिक एवं अल्पल्पसिलिक समूहों, चार्नोकाइट, अनॉरथॉसाइट एवं क्षारीय शैलों की शैलवर्णना एवं शैल जनन, कार्बोटाइट्स डेकन ज्वालामुखी शैल-क्षेत्र।
  • कार्यातरण प्ररूप एवं कारक; का्यांतरी कोटियां एवं संस्तर; प्रावस्था नियम; प्रादेशिक एवं संस्पर्श कार्यांतरण संलक्षणी; ७८४ एवं &(7 आरेख; कायांतरी शैलों का गठन एवं संरचना; बालुकामय, मृण्मय एवं अल्पसिलिक शैलों का कायांतरण; खनिज समुच्चय पश्चगातिक कायांजरण; तत्वांतरण एवं ग्रेनाइटी भवन; भारत का मिग्नेटाइट, कणिकाश्म शैली प्रदेश।

अवसादी शैलिकी

  • अवसाद एवं अवसादी शैल्र निर्माण प्रक्रियाएं, प्रसंघनन एवं शिलीभवन, संखंडाश्मी एवं असंखंडाश्मी शैली-उनका वर्गीकरण, शैलवर्णना एवं निक्षेपण वातावरण, अवसादी संलक्षणी एवं जननक्षेत्र, अवसादी संरचनाएं एवं उनका महत्व; भारी खनिज एवं उनका महत्व; भारत की अवसादी द्रोणियां।

आर्थिक भृविज्ञान

  • अयस्क, अयस्क खनिज एवं गैंग, अयस्क का औसत प्रतिशत, अयस्क निक्षैपों का वर्गीकरण; खनिज निक्षेपों की निर्माण प्रक्रिया; अयस्क स्थानीकरण के नियंत्रण; अयस्क गठन एवं संरचनाएं; धातु जननिक युग एवं प्रदेश; एल्युमिनियम, क्रोनियम, ताम्र, स्वर्ण, लोह, लेड, जिंक, मेग्नीज, टिटेनियम, यूरेनियम एवं थोरियम तथा औद्योगिक खनिजों के महत्वपूर्ण भारतीय निक्षैपों का भूविज्ञान; भारत मैं कोयला एवं पेट्रोलियम निक्षेप; राष्ट्रीय खनिज नीति; खनिज संसाधनों का संरक्षण एवं उपयोग; समुद्री खनिज संसाधन एवं समुद्र नियम।

खनन भूविज्ञान

  • पूर्वक्षण की विधियां – भूवैज्ञानिक, भूभौतिक, भूरासायनिक एवं भू-वानस्पतिक; प्रतिचयन प्रविधियां; अयस्क निचय प्राक्कलन, धातु अयस्कों औदयोगिक खनिजों, समुद्री खनिज संसाधनों एवं निर्माण प्रस्तरों के अन्वेषण एवं खनन की विधियां; खनिज सज्जीकरण एवं अयस्क प्रसाधन।

भूरासायनिकी एवं पर्यावरणीय भूविज्ञान

  • तत्वों का अंतरिक्षी बाहुलय, ग्रहों एवं उल्कापिंडों का संघटन, पृथ्वी की संरचना एवं संघटन एवं तत्वों का वितरण, लेश तत्व, क्रिस्टल रासायनिकी के तत्व-गासायनिक आबंध, समन्वय संख्या, समकृतिकता एवं बहुरूपता, प्रारंभिक उष्मागतिकी।
  • प्राकृतिक संकट – बाढ़, बृहत क्षरण, तटीय संकट, भूकंप एवं ज्वालामुखीय सक्रियता तथा न्यूनीकरण, नगरीकरण, खनन औद्योगिक एवं रेडियोसक्रिय अपरद निपटान, उर्वरक प्रयोग;
  • खनन अपरद एवं फ्लाई ऐश सन्निक्षेपण के पर्यावरणीय प्रभाव;
  • भौम एवं भू-पृष्ठ जल प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण; समुद्र तल परिवर्तन- कारण एवं प्रभाव।
  • पर्यावरण संरक्षण-भारत में विधायी उपाय।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Geology Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

UPSC Geology Optional Paper-1 Download

UPSC Geology Optional Paper-2 Download

UPSC Geology Syllabus in Hindi Optional Paper pdf

UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC Chemistry Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus मेंUPSC Chemistry Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है, जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है :

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है 

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे Botany Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Paper-6 और Paper-7 में Total 25 Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC CHEMISTRY SYLLABUS – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

परमाणु संरचना

  • क्वांटम सिद्धांत, हाइसेन वर्ग का अनिश्चतता सिद्धांत, श्रीडिंगर तरंग समीकरण (काल अनाश्रित) तरंग फलन की व्याख्या, एकल विमीय बॉक्स में कण, क्वाट्टंम संख्याएं, हाइड्रोजन परमाणु तंरग फलन S, P और D कक्षकों की आकृति।

रसायन आबंध

  • आयनी आबंध, आयनी यौगिकों के अभिलक्षण, जालक ऊर्जा, बार्नहेबर चक्र।
  • सहसंयोजक आबंध तथा इसके सामान्य अभिलक्षण, अणुओं मेँ आबंध की ध्रुवणता तथा इसके द्विद्वुव अपूर्ण संयोजी आबंध सिद्धांत, अनुनाद तथा अनुनाद उर्जा की अवधारणा, अणु कक्षक सिद्धांत (LCAO पद्धति)।
  • H2 + , H2, He2  से Ne2, NO, CO, HFएवं (CN*** संयोजी आबंध तथा अणुकक्षक सिद्धांतों की तुलना, आबंध कोटि, आबंध सामर्थ्य तथा आबंध लंबाई।

ठोस अवस्था

  • क्रिस्टल, पद्धति; क्रिस्टल फलकों, जालक संरचनाओं तथा यूनिट सेल का स्पष्ट उल्लेख।
  • ग्रेग का नियम, क्रिस्टल द्वारा X-रे विवर्तन।
  • क्लोज पैंकिग (ससंकुलित रचना), अर्धव्यास अनुपात नियम, सीमांत अर्थव्यास अनुपात मानों के आकलन, NaCI, ZnS, CsCI एवं CaF2, की संरचना, स्टाइकियोमीट्रिक तथा नॉन- स्टाइकियोमीट्रिक दोष अशुद्धता दोष, अर्द्धचालक।

गैस अवस्था एवं परिवहन परिघटना

  • वास्तविक गैसों की अवस्था का समीकरण, अंतरा अणुक पारस्परिक क्रिया, गैसों का द्रवीकरण तथा क्रांतिक घटना, मैक्सवेल का गति वितरण, अंतराणुक संघट्ट दीवार पर संघट्ट तथा अभिस्पंदन, ऊष्मा चालकता एवं आदर्श गैसों की श्यानता।

द्रव अवस्था

  • केल्विन समीकरण, पृष्ठ तनाव एवं पृष्ठ ऊर्जा, आर्द्रक एवं संस्पश कोण, अंतरापृष्ठीय तनाव एवं कोशिका क्रिया।

ऊष्मागतिकी

  • कार्य, ऊष्मा तथा आंतरिक ऊर्जा; ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम, ऊमागतिकी का दूसरा नियम, एंट्रोपी एक अवस्था फलन के रूप मैं, विभिन्‍न प्रक्रमों में एंट्रॉपी परिवर्तन, एंट्रॉपी उत्क्रमणीयता तथा अनुत्क्रमणीयता, मुक्त ऊर्जा फलन, अवस्था का ऊष्मागतिकी समीकरण, मैक्सवेल संबंध।
  • ताप, आयतन एवं U, H, A, G, Cp (Cv ,∝ एवं β की दाब निर्भरता; J-T ‘प्रभाव एवं व्युत्क्रमण ताप।
  • साम्य के लिए निकष, साम्य स्थिरारंक तथा ऊष्मागतिकीय राशियों के बीच संबंध, नेस्ट ऊष्मा प्रमेय तथा ऊष्मागतिकी का तीसरा नियम।

प्रावस्था साम्य तथा विलयन

  • क्लासियस-क्लोपिरन समीकरण, शुद्ध पदार्थों के लिएप्रावस्था आरेख।
  • दविआधारी पद्धति में प्रावस्था साम्य, आंशिक मिश्रणीय टद्रव-उच्चतर तथा निम्नतर क्राँतिक विलयन ताप।
  • आंशिक मोलर राशियं, उनका महत्व तथा निर्धारण।
  • आधिक्य ऊष्मागतिकी फलन और उनका निर्धारण।

विद्युत रसायन

  • प्रबल विद्युत अपघटूयों का डेबाई हुकेल सिद्धांत एवं विभिन्‍न साम्य तथा अधिगमन गुणधर्मों के लिए डेबाइ हुकेल सीमांत नियम, गैल्वेनिक सेल, सांद्रता सेल; इलेक्ट्रोकेमिकल सीरीज, सेलों के «रण का मापन और उसका अनुप्रयोग; ईंधन सेल तथा बैटरियां, इलैक्ट्रोड पर प्रक्रम; अंतरा पृष्ठ पर दविस्तर; चार्ज ट्रांसफर की दर, विद्युत धारा घनत्व; अतिविभव; वैदयुत विश्लेषण तकनीक; पोलरोग्राफी, एंपरोमिती, आयन वरणात्मक इलेक्ट्रोड एवं उनके उपयोग।

रासायनिक बलगतिकी

  • अभिक्रिया दर की सांद्रता पर निभरता, शून्य, प्रथम, द्धितीय तथा आंशिक कोटि की अभिक्रियाओं के लिए अवकल और समाकल दर समीकरण।
  • उत्क्रम, समान्तर, क्रमागत तथा श्रृंखला अभिक्रियाओँं के दर समीकरण; शाखन श्रृंखला एवं विस्फोट।
  • दर स्थिरांक पर ताप और दाब का प्रभाव, स्टॉप फ्लो और रिलेक्सेशन पद्धतियों द्वारा द्रुत अभिक्रियाओं का अध्ययन।
  • संघटन और संक्रमण अवस्था सिदधांत।

प्रकाश रसायन

  • प्रकाश का अवशोषण।
  • विभिन्‍न मार्गों द्वारा उतृतेजित अवस्था का अवसान।
  • हाइड्रोजन और हेलोजनों के मध्य प्रकाश रसायन अभिक्रिया और उनकी क्वांटमी लब्धि।

पृष्ठीय परिघटना तथ उत्प्रेरतता

  • ठोस अधिशोषकों पर गैसों और विलयनों का अधिशोषण, लैंगम्यूर तथा छाग्गर’अधिशोषण रेखा।
  • पृष्ठीय क्षेत्रफल का निर्धारण।
  • विषामांगी उत्प्रेरकों पर अभिक्रिया अभिलक्षण और क्रियाविधि।

जैव अकार्बनिक रसायन

  • जैविक तंत्रों में धातु आयन तथा भित्ति के पार आयन गमन (आण्विक क्रियाविधि)।
  • ऑक्सीजन अपटेक प्रोटीन, साइटोग्रोम तथा पेरोडोक्सिन।

समन्वय रसायन

  • धातु संकुल के आबंध सिद्धांत, संयोजकता आबंध सिद्धांत, क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत और उसमें संशोधन, धातु संकुल के चुंबकीय तथा इलेक्ट्रानिक स्पेक्ट्रम की व्याख्या के सिद्धांतों का अनुप्रयोग।
  • समनन्‍वयी योगिकों में आइसोमेरिज्म, समनन्‍वयी योगिकों का IUPAC नामकरण; 4 तथा 6 समायोजन वाले संकुलों का त्रिविम रसायन, किलेट प्रभाव तथा बहुनाभिकीय संकुल; परा-प्रभाव और उसके सिद्धांत; वर्ग समतली संकुल में प्रतिस्थापनिक अभिक्रियाओं की बलगतिकी; संकुलों की तापगतिकी तथा बलगतिकी स्थिरता।
  • मैटल कार्बोनिलों की संश्लेषण संरचना तथा उनकी अभिक्रियात्मकता; कार्बोक्सिलेट एनॉयन, कार्बोनिल हाइड्राइड तथा मैटल नाइट्रोसीलयौगिक यौगिक।
  • एरोमेटिक प्रणाली के संकुल मैटल ओलोफिन संकुलों में संश्लेषण, संरचना तथा बंध, एल्काइन तथा सायक्लोपेंटाडायनिक संकुल, समन्वयी असंतृप्तता, आक्सीडेटिव योगात्मक अभिक्रियाएं, निवेशन अभ्िक्रियाएं, प्रवाहा अणु और उनका अभिलक्षणन, मैटल-मैटल आबंध तथा मैटल परमाणु गुच्छे वाले यौगिक।

मुख्य समूह रसायनिकी

  • बोरेन, बोराजाइन, फास्फेजीन एवं चक्रीय फास्फेजीन, सिलिकेटएवं सिलिकॉन, इंटरहैलोजन यौगिक।
  • गंधक-नाइट्रोजन यौगिक, नॉबुल गैस यौगिक।

F ब्लॉक तत्वों का सामान्य रसायन

  • लन्‍्थेनाइड एवं एक्‍्टीनाइड।
  • पृथक्करण, आक्सीकरण अवस्थाएं, चुम्बकीय तथा स्पेक्ट्रमी गुणधर्म।
  • लैथेनाइड संकुचन।

UPSC CHEMISTRY SYLLABUS – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

विस्थापित सहसंयोजक बंध

  • एरोमैटिकता, प्रतिएरोमैटकता:, एन्यूलीन, एजुलीन, ट्रोपोलोन्स, फुल्वीन, सिडनोन।

अभिक्रिया क्रियाविधि

  • कार्बनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधियों के अध्ययन की सामान्य विधियां (गतिक एवं गैर-गतिक दोनों), समस्थानिकी विधि, क्रास-ओवर प्रयोग, मध्यवर्ती ट्रेपिंग, त्रिविम रसायन, संक्रियण ऊर्जा, अभिक्रियाओं का ऊष्मागतिकी नियंत्रण तथा गतिक नियंत्रण।

अभिक्रियाशील मध्यवर्ती

  • कार्बोॉनियम आयनों तथा कारबेनायनों, मुक्त मूत्रकों (फ्रीरेडिकल) कार्बीनों बेंजाइनों तथा नाइट्रेनों का उत्पादन, ज्यामिति, स्थिरता तथा अभिक्रिया।

प्रतिस्थापन अभिक्रयाएं

  • SN1, SN2 एवं SNi क्रियाविधियां।
  • प्रतिवेशी समूह भागीदारी, पाइसेल, फ्यूरन, थियोफीन, इंडोल जैसे हेट्रोसाइक्लिक योगिकों सहित ऐरोमेटि यौगिकों की इलेक्ट्रोफिलिक तथा न्यूक्योफिलिक अभिक्रियां।

विलोपन अभिक्रियाएं

  • E1, E2 तथा Elcb क्रियाविधियां।
  • सेजेफ तथा हॉफसन E2 अभिक्रियाओं मेँ दिक्विन्यास, पाइरोलिटिक Syn विलोपन-चुग्गीव तथा कोप विलोवन।

संकलन अभिक्रियाएं

  • C=C तथा C=C के लिए इलेक्ट्रोफिलिक संकलन, C=C तथा C=N के लिए न्यूक्लियोफिलिक संकलन, संयुग्मी ओलिफिलस तथा कार्बोअल्स।

अभिक्रियाएं तथा पुनर्विन्यास

  • पिनाकोल-पिनाकोलोन, हॉफमन, बेकमन, बेयर विलिंगर, फेबोस्की, फ्राइस, क्लेसेन, कोप, स्टीवेंज तथा वाग्नर-मेरबाइन पुनर्विन्यास।

संघनन तथा अभिक्रियाएं

  • एल्डोल संघनन, क्लैसेन संघनन, डीकमन, परकिन, नोवेनेजेल, विंटिंग, क्लिमेंसन, वोल्फ किशनर, केनिजारों तथा फान-रीक्टर अभिक्रियाएं, स्टॉब, बैजोइन तथा एसिलोयन संघनन, फिशर इंडोल संश्लेषण, स्क्राप संश्लेषण, विश्लर-नेपिरास्की, सैंडमेयर, रेगेर टाइमन तथा रेफॉरमास्की अभिक्रियाएं। 

परिरंभीय अभिक्रियाएं

  • वर्गीकरण एवं उदाहरण।
  • बुडवर्ग-हॉफमैन नियम विद्युतचक्रीय अभिक्रियाएं, चक्री संकलन अभिक्रियाएं (2+2 एवं 4+2) एवं सिग्मा-अनुवर्तनी विस्थापन (1,3; 3, 3 तथा 1,5) FMO उपगम।

बहुलकों का निर्माण और गुणधर्म

  • कार्बनिक बहुलक-पोलिएथिलीन, पोलिस्टाइरीन, पोलीविनाइल क्लोराइड, टेफलॉन, नाइलॉन, टेरीलीन, संश्लिष्ट तथा प्राकृतिक रबड़।

जैवबहुलक

  • प्रोटीन DNA, RNA की संरचनाएं।

अभिकारकों के संश्लेषक उपयोग

  • 0s04, HI04 CrO3, Pb(OAc)4, SeO2, NBS, B2H6, Na द्रव अमोनिया, LiALH4, NaH4, Na Buli, एवं MCPBA।

रसायन और रासायनिक अभिक्रियाएं

  • प्रकाश रसायन : साधारण कार्बनिक यौंगिकों की प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाएं, उत्तेजित और निम्नतम अवस्थाएं, एकक और त्रिक अवस्थाएं, नोरिश टाइप-I और टाइप-II अभिक्रियाएं।

स्पेक्ट्रोमिकी सिद्धांत और संरचना

स्पेक्ट्रोमिकी सिद्धांत और संरचना

  • स्पेक्ट्रोमिकी सिद्धांत और संरचना के स्पष्टीकरण में उनका अनुप्रयोग।

घूर्णी

  • दविपरमाणुक अणु।
  • समस्थानिक प्रतिस्थापन तथा घूर्णी स्थिरांक।

कांपनिक

  • दविपरमाणुक अणु, रैखिक ब्रिपरमाणुक अणु, बहुपरमाणुक अणुओं में क्रियात्मक समूहों की विशिष्ट आवृतियां।

इलेक्ट्रानिक

  • एकक और त्रिक अवस्थाएं :n →П तथा П → П* संक्रमण।
  • संयुग्मित द्विआबंध तथा संयुग्मित कारबोनिकल में अनुप्रयोग-वुडवर्ड-फीशर नियम; चार्ज अंतरण स्पेक्ट्रा।

नाभिकीय चुंबकीय अनुनाद (‘HNMR)

  • आधारभूत सिद्धांत।
  • रसायनिक शिफ्ट एवं स्पिन-स्पिन अन्योन्य क्रिया एवं कपलिंग स्थिरांक।

द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमिति

  • पैरैंट पीक, बेसपीक, मेटास्टेबल पीक, मैक लैफर्टी पुनर्विन्यास।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Chemistry Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

UPSC Chemistry Optional Paper-1 Download

UPSC Chemistry Optional Paper-2 Download

UPSC Chemistry Optional Paper Syllabus in pdf

UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC Sociology Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC Sociology Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC Sociology Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC Sociology Exam Syllabus in Hindi – Optional Subject Paper-I

समाजशास्त्र के मूलभूत सिद्धांत

समाजशास्त्र : विद्याशाखा :

  • (क) यूरोप में आधुनिकता एवं सामाजिक परिवर्तन तथा समाजशास्त्र का अविभर्भाव।
  • (ख) समाजशास्त्र का विषयक्षेत्र एवं अन्य सामाजिक विज्ञानों से इसकी तुलना।
  • (ग) समाजशास्त्र  एवं सामान्य बोध।

समाजशास्त्र विज्ञान के रूप में :

  • (क) विज्ञान, वैज्ञानिक पद्धति एवं समीक्षा
  • (ख) अनुसंधान क्रिया विधि के प्रमुख सैद्धांतिक तत्व
  • (ग) प्रत्यक्षवाद एवं इसकी समीक्षा
  • (घ) तथ्य, मूल्य एवं उद्देश्यपरकता
  • (ड.) अ-प्रत्यक्षवादी क्रियाविधियां

अनुसंधान पद्धतियां एवं विश्लेषण :

  • (क) गुणात्मक एवं मात्रात्मक पद्धतियां
  • (ख) दत्त संग्रहण की तकनीक
  • (ग) परिवर्त, प्रतिचयन, प्राक्कल्पना, विश्वसनीयता एवं वैधता

समाजशास्त्री चिंतक :

  • (क) कार्ल मार्क्स-ऐतिहासिक भौतिकवाद, उत्पादन विधि, वि संबंधन, वर्ग संघर्ष
  • (ख) इमाईल दुखीम-श्रम विभाजन, सामाजिक तथ्य, आत्महत्या, धर्म एवं समाज।
  • (ग) मैक्स वेबर-सामाजिक क्रिया, आदर्श प्रारूप, सत्ता, अधिकारीतंत्र, प्रोटेस्टेंट नीतिशास्त्र और पूंजीवाद की भावना।
  • (घ) तालकॉट पार्सन्स-सामाजिक व्यवस्था, प्रतिरूप परिवर्त
  • (ड.) राबर्ट के मर्टन-अव्यक्त तथा अभिव्यक्त प्रकार्य अनुरूपता एवं विसामान्यता, संदर्भ समूह
  • (च) मीड-आत्म एवं तादात्म्य

स्तरीकरण एवं गतिशीलता :

  • (क) संकल्पनाएं-समानता, असमानता, अधिक्रम, अपवर्जन, गरीबी एवं वंचन
  • (ख) सामाजिक स्तरीकरण के सिद्धांत – संरचनात्मक प्रकार्यवादी सिद्धांत, मार्क्सवादी सिद्धांत, वेबर का सिद्धांत
  • (ग) आयाम-वर्ग, स्थिति समूहाँ, लिंग, नृजातीयता एवं प्रजाति का सामाजिक स्तरीकरण
  • (घ) सामाजिक गतिशीलता-खुली एवं बंद व्यवस्थाएं, गतिशीलता के प्रकार, गतिशीलता के स्रोत एवं कारण

कार्य एवं आर्थिक जीवन

  • (क) विभिन्‍न प्रकार के समाजों में कार्य का सामाजिक संगठन-दास समाज, सामंती समाज, औदयोगिक/पूंजीवादी समाज
  • (ख) कार्य का औपचारिक एवं अनौपचारिक संगठन
  • (ग) श्रम एवं समाज

राजनीति एवं समाज

  • (क) सत्ता के समाजशास्त्रीय सिद्धांत
  • (ख) सत्ता प्रव्रजन, अधिकारीतंत्र, दबाव समूह, राजनैतिक दल
  • (ग) राष्ट्र, राज्य, नागरिकता, लोकतंत्र, सिविल समाज, विचारधारा
  • (घ) विरोध, आंदोलन, सामाजिक आंदोलन, सामूहिक क्रिया, क्रांति

धर्म एवं समाज

  • (क) धर्म के समाजशास्त्रीय सिद्धांत
  • (ख) धार्मिक क्रम के प्रकार : जीववाद, एकतत्ववाद, बहुतत्ववाद, पंथ, उपासना,पदथधतियां
  • (ग) आधुनिक समाज में धर्म : धर्म एवं विज्ञान, धर्म निरपेक्षीकरण, धार्मिक पुन:प्रवर्तनवाद, मूलतत्ववाद

नातेदारी की व्यवस्थाएं:

  • (क) परिवार, गृहस्थी, विवाह
  • (ख) परिवार के प्रकार एवं रूप
  • (ग) वंश एवं वंशानुक्रम
  • (घ) पितृतंत्र एवं श्रम का लिंगाधारिक विभाजन
  • (ड.) समसामयिक प्रवृत्तियां

आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन :

  • (क) सामाजिक परिवर्तन के समाजशास्त्रीय सिद्धांत
  • (ख) विकास एवं पराश्नितता
  • (ग) सामाजिक परिवर्तन के कारक
  • (घ) शिक्षा एवं सामाजिक परिवर्तन
  • (ड.) विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक परिवर्तन

UPSC Sociology Exam Syllabus in Hindi – Optional Subject Paper-II

भारतीय समाज : संरचना एवं परिवर्तन

(क) भारतीय समाज का परिचय :

(I) भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य
  • (क) भारतीय विद्या (जी एस धुर्य)
  • (ख) संरचनात्मक प्रकार्यवाद (एम.एन. श्रीनिवास)
  • (ग) मार्क्सवादी समाजशास्त्र (ए.आर. देसाई)
(II) भारतीय समाज पर ऑपनिवेशिक शासन का प्रभाव
  • (क) भारतीय राष्ट्रवाद की सामाजिक पृष्ठभूमि
  • (ख) भारतीय परंपरा का आधुनिकीकरण
  • (ग) औपनिवेशिककाल के दौरान विरोध एवं आंदोलन
  • (घ) सामाजिक सुधार

(ख.) सामाजिक संरचना:

(I) ग्रामीण एवं कृषिक सामाजिक संरचना
  • (क) भारतीय ग्राम का विचार एवं ग्राम अध्ययन
  • (ख) कृषिक सामाजिक संरचना – पट्टेदारी प्रणाली का विकास, भूमिसुधार
(II)जातिव्यवस्था
  • (क) जाति व्यवस्था के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य (जीएस धुर्ये, एमएन श्रीनिवास, लुईदयूमां, आंद्रे बेतेय)
  • (ख) जाति व्यवस्था के अभिलक्षण (ग) अस्पृश्यता-रूप एवं परिप्रेक्ष्य
(III)भारतमेंजनजातीयसमुदाय
  • (क) परिभाषीय समस्याएं
  • (ख) भौगोलिक विस्तार
  • (ग) औपनिवेशिक नीतियां एवं जनजातियां
  • (घ) एकीकरण एवं स्वायत्ता के मुद्दे
(IV)भारतमेंसामाजिकवर्ग
  • (क) कृषिक वर्ग संरचना
  • (ख) औदूयोगिक वर्ग संरचना
  • (ग) भारत में मध्यम वर्ग
(V) भारत में नातेदारी की व्यवस्थाएं
  • (क) भारत मैं वंश एवं वंशानुक्रम
  • (ख) नातेदारी व्यवस्थाओं के प्रकार
  • (ग) भारत में परिवार एवं विवाह
  • (घ) परिवार घरेलू आयाम
  • (ड.) पितृतंत्र, हकदारी एवं श्रम का लिंगाधारित विभाजन
(VI) धर्म एवं समाज
  • (क) भारत में धार्मिक समुदाय
  • (ख) धार्मिक अल्पसंख्यकों की समस्याएं

(ग) भारत में सामाजिक परिवर्तन :

(I) भारत में सामाजिक परिवर्तन की इष्टियां
  • (क) विकास आयोजना एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था का विचार
  • (ख) संविधान, विधि एवं सामाजिक परिवर्तन
  • (ग) शिक्षा एवं सामाजिक परिवर्तन
(II) भारत में ग्रामीण एवं कृषिक रूपांतरण
  • (क) ग्रामीण विकास कार्यक्रम, समुदाय विकास कार्यक्रम, सहकारी संस्थाएं, गरीबी उन्मूलन योजनाएं
  • (ख) हरित क्रांति एवं सामाजिक परिवर्तन
  • (ग) भारतीय कृषि में उत्पादन की बदलती विधियां
  • (घ) ग्रामीण मजदूर, बंधुआ एवं प्रवासन की समस्याएं
(III) भारत में औदयोगिकीकरण एवं नगरीकरण
  • (क) भारत में आधुनिक उद्योग का विकास
  • (ख) भारत में नगरीय बस्तियों की वृद्धि
  • (ग) श्रमिक वर्ग : संरचना, वृद्धि, वर्ग संघटन
  • (घ) अनौपचारिक क्षेत्रक, बालश्रमिक
  • (ड.) नगरी क्षेत्र में गंदी बस्ती एवं वंचन
(IV) राजनीति एवं समाज
  • (क) राष्ट्र, लोकतंत्र एवं नागरिकता
  • (ख) राजनैतिक दल, दबाव समूह, सामाजिक एवं राजनैतिक प्रव्रजन
  • (ग) क्षेत्रीयतावाद एवं सत्ता का विकेन्द्रीकरण
  • (घ) धर्म निरपेक्षीकरण
(V) आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन
  • (क) कृषक एवं किसान आंदोलन
  • (ख) महिला आंदोलन
  • (ग) पिछड़ा वर्ग एवं दलित वर्ग आंदोलन
  • (घ) पर्यावरणीय आंदोलन
  • (ड.) नृजातीयता एवं अभिज्ञान आंदोलन
(VI) जनसंख्या गतिकी
  • (क) जनसंख्या आकार, वृद्धि संघटन एवं वितरण
  • (ख) जनसंख्या वृद्धि के घटक : जन्म, मृत्यु, प्रवासन
  • (ग) जनसंख्या नीति एवं परिवार नियोजन
  • (घ) उभरते हुए म॒ददे : काल प्रभावन, लिंग अनपात, बाल एवं शिश॒ म॒त्य दर, जनन स्वास्थ्य
(VII) सामाजिक रूपांतरण की चुनौतियां
  • (क) विकास का संकट : विस्थापन, पर्यावरणीय समस्याएं एवं संपोषणीयता
  • (ख) गरीबी, वंचन एवं असमानताएं
  • (ग) स्त्रियों के प्रति हिंसा
  • (घ) जाति दूवंदव
  • (ड.) नृजातीय दवंदव, सांप्रदायिकता, धार्मिक पुन:प्रवर्तनवाद
  • (च) असाक्षरता तथा शिक्षा में समानताएं

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Sociology Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

UPSC Sociology Optional Paper-1 Download

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UPSC Sociology Syllabus in Hindi Optional Paper pdf

UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC Psychology Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC Psychology Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC Psychology Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC Psychology Exam Syllabus In Hindi – Optional Subject Paper-I

मनोविज्ञान के आधार

परिचय

  • मनोविज्ञान की परिभाषा: मनोविज्ञान का ऐतिहासिक पूर्ववृत्त एवं 21वीं शताब्दी में प्रवृत्तियां।
  • मनोविज्ञान एवं वैज्ञानिक पद्धति, मनोविज्ञान का अन्य सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञानों से संबंध।
  • सामाजिक समस्याओं में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग।

मनोविज्ञान की पद्धति :

  • अनुसंधान के प्रकार – वर्णनात्मक, मूल्यांकन।
  • नैदानिक एवं पूर्वानुमानिक अनुसंधान पद्धति।
  • प्रेक्षण, सर्वेक्षण, व्यक्ति अध्ययन एवं प्रयोग, प्रयोगात्मक तथा अप्रयोगात्मक अभिकल्प की विशेषताएं।
  • परीक्षण सह्ृश अभिकल्प, केंद्रीय समूह चर्चा, विचारावेश।
  • आधार सिद्धांत उपागम।

अनुसंधान प्रणाली :

  • मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में मुख्य चरण समस्या कथन, प्राक्कल्पना निरूपण, अनुसंधान अभिकल्प, प्रतिचयन, आंकड़ा संग्रह के उपकरण, विश्लेषण एवं व्याख्या तथा विवरण लेखन।
  • मूल के विरूद्ध अनुप्रयुक्त अनुसंधान आंकड़ा संग्रह की विधियां (साक्षात्कार, प्रेक्षण, प्रश्नावली)।
  • अनुसंधान अभिकल्प (कार्योत्तर एवं प्रयोगात्मक)।
  • सांख्यिकी प्रविधियों का अनुप्रयोग (टी-परीक्षण, द्विमार्गी एनोवा, सहसंबंध, समाश्रयण एवं फैक्टर विश्लेषण)।
  • मद अनुक्रिया सिद्धांत।

मानव व्यवहार का विकास :

  • वृद्धि एवं विकास।
  • विकास के सिद्धांत, मानव व्यवहार को निर्धारित करने वाले आनुवांशिक एवं पर्यावरणीय कारकों की भूमिका।
  • समाजीकरण में सांस्कृतिक प्रभाव; जीवन विस्तृति विकास – अभिलक्षण; विकासात्मक कार्य।
  • जीवन विस्तृति के प्रमुख चरणों में मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का संवर्धन।

संवेदन, अवधान ओर प्रत्यक्षण :

  • संवेदन : सीमा की संकल्पना, निरपेक्ष एवं न्यूनतम बोध-भेद देहली, संकेत उपलंभन एवं सतर्कता।
  • अवधान को प्रभावित करने वाले कारक जिसमें विन्‍यास एवं उददीपन अभिलक्षण शामिल हैं।
  • प्रत्यक्षण की परिभाषा और संकल्पना, प्रत्यक्षण मेँ जैविक कारक।
  • प्रात्यक्षिक संगठन – पूर्व अनुभवों का प्रभाव।
  • प्रात्यक्षिक रक्षा – सांतराल एवं गहनता प्रत्यक्ष को प्रभावित करने वाले कारक।
  • आमाप आकलन एवं प्रात्यक्षिक तत्परता।
  • प्रत्यक्षण की सुग्राहयता, अतीन्द्रिय प्रत्यक्षण, संस्कृति एवं प्रत्यक्षण, अवसीम प्रत्यक्षण।

अधिगम :

  • अधिगम की संकल्पना तथा सिद्धांत (व्यवहारवादी, गेस्टाल्टवादी एवं सूचना प्रक्रमण मॉडल)।
  • विलोप, विभेद एवं सामान्यीकरण की प्रक्रियाएं।
  • कार्यक्रमबद्ध अधिगम, प्रायिकता अधिगम, आत्म अनुदेशात्मक अधिगम।
  • प्रबलीकरण की संकल्पनाएं, प्रकार एवं सारणियां।
  • पलायन, परिहार एवं दंड, प्रतिरूपण एवं सामाजिक अधिगम।

स्मृति :

  • संकेतन एवं स्मरण; अल्पावधि स्मृति, दीर्घावधि स्मृति, संवेदी स्मृति, प्रतिमापरक स्मृति, अनुरणन स्मृति।
  • मल्टिस्टोर मॉडल, प्रकमण के स्तर; संगठन एवं स्मृति सुधार की स्मरणजनक तकनीकें।
  • विस्मरण के सिद्धांत; क्षय, व्यक्तिकरण एवं प्रत्यानयन विफलन।
  • अधिस्मृति; स्मृतिलोप; आघातोत्तर एवं अभिघातपूर्व।

चिंतन एवं समस्या समाधान :

  • पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत; संकल्पना निर्माण प्रक्रम।
  • सूचना प्रक्रमण, तर्क एवं समस्या समाधान, समस्या समाधान में सहायक एवं बाधाकारी कारक।
  • समस्या समाधान की विधियां : सृजनात्मक चिंतन एवं सृजनात्मकता का प्रतिपोषण।
  • निर्णयन एवं अधिनिर्णय को प्रभावित करने वाले कारक; अभिनव प्रवृत्तियां।

अभिप्रेरण तथा संवेग :

  • अभिप्रेरण संवेग के मनोवैज्ञानिक एवं शरीर क्रियात्मकम आधार, अभिप्रेरण तथा संवेग का मापन।
  • अभिप्रेरण एवं संवेग का व्यवहार पर प्रभाव; बाहय एवं अंतर अभिप्रेरण।
  • अंतर अभिप्रेरण को प्रभावित करने वाले कारक।
  • संवेगात्मक सक्षमता एवं संबंधित मुददे।

बुद्धि एवं अभिक्षमता :

  • बुद्धि एवं अभिक्षमता की संकल्पना।
  • बुद्धि का स्वरूप एवं सिद्धांत-स्पियरमैन, थर्सटन गलफोर्ड बर्नान, स्टेशनबर्ग एवं जे पी दास।
  • संवेगात्मक बुद्धि, सामाजिक बुद्धि, बुद्धि एवं अभ्िक्षमता का मापन।
  • बुद्धिलब्धि की संकल्पना, विचलन बुद्धिलब्धि, बुद्धिलब्धि स्थिरता।
  • बहु बुद्धि का मापन; तरल बुद्धि एवं क्रिस्टलित बुद्धि।

व्यक्तित्व :

  • व्यक्तित्व की संकल्पना तथा परिभाषा।
  • व्यक्तित्व के सिद्धांत (मनोविश्लेणात्मक- सांस्कृतिक, अंतर्वैयक्तिक, (विकासात्मक मानवतावादी, व्यवहारवादी विशेष गुण एवं जाति उपागम)।
  • व्यक्तित्व का मापन (प्रक्षेपी परीक्षण, पेंसिल-पेपर परीक्षण)।
  • व्यक्तित्व के प्रति भारतीय इष्टिकोण; व्यक्तित्व विकास हेतु प्रशिक्षण।
  • नवीनतम उपागम जैसे कि बिग-5 फैक्टर सिद्धांत; विभिन्‍न परंपराओं में स्व का बोध।

अभिवृत्तियां, मूल्य एवं अभिरूचियां :

  • अभिवृत्तियां, मूल्यों एवं अभिरूचियों की परिभाषाएं।
  • अभिवृत्तियों के घटक; अभिवृत्तियों का निर्माण एवं अनुरक्षण।
  • अभिवृत्तियों, मूल्यों एवं अभिरूचियों का मापन।
  • अभिवृत्ति परिवर्तन के सिद्धांत, मूल्य प्रतिपोषण की विधियां, रूढ़ धारणाओं एवं पूर्वाग्रहों का निर्माण।
  • अन्य के व्यवहार को बदलना, गुणारोप के सिद्धांत, अभिनव प्रवृत्तियां।

भाषा एवं संज्ञापन :

  • मानव भाषा-गुण, संरचना एवं भाषागत सोपान।
  • भाषा अर्जन-पूर्वानुकूलता, क्राँतिक अवधि, प्राक्कल्पना।
  • भाषा विकास के सिद्धांत (स्कीनर, चोम्स्की); संज्ञापन की प्रक्रिया एवं प्रकार।
  • प्रभावपूर्ण संज्ञापन एवं प्रशिक्षण।

आधुनिक समकालीन मनोविज्ञान में मुद्दे एवं परिप्रेक्ष्य :

  • मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला एवं मनोवैज्ञानिक परीक्षण मैं कम्प्यूटर अनुप्रयोग।
  • कृत्रिम बुद्धि; साइकोसाइबरनेटिक्स; चेतना-नींद-जागरण कार्यक्रमों का अध्ययन।
  • स्वप्न, उददीपनवंचन, ध्यान, हिप्रोटिक/औषध प्रेरित दशाएं।
  • अतीन्द्रिय प्रत्यक्षण; अंतरीन्द्रिय प्रत्यक्षण मिथ्याभास अध्ययन।

UPSC Psychology Exam Syllabus In Hindi – Optional Subject Paper-II

मनोविज्ञान : विषय और अनुप्रयोग

व्यक्तिगत विभिन्‍नताओं का वैज्ञानिक मापन :

  • व्यक्तिगत भिन्‍नताओं का स्वरूप, मानकीकृत मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की विशेषताएं और संरचना।
  • मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के प्रकार।
  • मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के उपयोग, दुरूपयोग तथा सीमाएं।
  • मनोवैज्ञानिक परीक्षाओं के प्रयोग में नीतिपरक विषय।

मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य तथा मानसिक विकार :

  • स्वास्थ्य-अस्वास्थ्य की संकल्पना, सकारात्मक स्वास्थ्य, कल्याण, मानसिक विकार (चिंता विकार, मन स्थिति विकार सीजोफ्रेनियां तथा श्रमिक विकार, व्यक्तित्व विकार, तात्विक दुर्व्यवहार विकार)।
  • मानसिक विकारों के कारक तत्व, सकारात्मक स्वास्थ्य, कल्याण, जीवनशैली तथा जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले कारक।

चिकित्सात्मक उपागम:

  • मनोगतिक चिकित्साएं, व्यवहार चिकित्साएं।
  • रोगी केन्द्रित चिकित्साएं, संज्ञानात्मक चिकित्साएं, देशी चिकित्साएं (योग, ध्यान)
  • जैव पुनर्निवेश चिकित्सा। मानसिक रूग्णता की रोकथाम तथा पुनस्थौपना क्रमिक स्वास्थ्य प्रतिपोषण।

कार्यात्मक मनोविज्ञान तथा संगठनात्मक व्यवहार :

  • कार्मिक चयन तथा प्रशिक्षण उद्योग में मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का उपयोग।
  • प्रशिक्षण तथा मानव संसाधन विकास।
  • कार्य-अभिप्रेरण सिद्धांत-हज॑ वग्र, मासलो, एडम ईक्विटी सिद्धांत, पोर्टर एवं ल्रावलर, ब्रूम।
  • नेतृत्व तथा सहभागी प्रबंधन। विज्ञापन तथा विपणन।
  • दबाव एवं इसका प्रबंधन।
  • श्रम दक्षता शास्त्र, उपभोक्ता मनोविज्ञान, प्रबंधकीय प्रभाविता, रूपांतरण नेतृत्व, संवेदनशीलता प्रशिक्षण, संगठनों मैं शक्ति एवं राजनीति।

शैक्षिक क्षैत्र में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग :

  • अध्यापन-अध्ययन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने मेँ मनोवैज्ञानिक सिद्धांत। अध्ययन शैलियां।
  • प्रदत्त, मंदक, अध्ययन-हेतु-अक्षम और उनका प्रशिक्षण।
  • स्मरण शक्ति बढ़ाने तथा बेहतर शैक्षणिक उपलब्धि के लिए प्रशिक्षण।
  • व्यक्तित्व विकास तथा मूल्य शिक्षा। शैक्षिक, व्यावसायिक मार्गदशन तथा जीविकोपार्जन परामशं।
  • शैक्षिक संस्थाओं में मनोवैज्ञानिक परीक्षण।
  • मार्गदर्शन कार्यक्रमों में प्रभावी कार्यनीतियां।

सामुदायिक मनोविज्ञान :

  • सामुदायिक मनोविज्ञान की परिभाषा और संकल्पना। सामाजिक कार्यकलाप में छोटे समूहों की उपयोगिता।
  • सामाजिक चेतना की जागृति और सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की कार्यवाही।
  • सामाजिक परिवर्तन के लिए सामूहिक निर्णय लेना और नेतृत्व प्रदान करना।
  • सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रभावी कार्य नीतियां।

पुनर्वास मनोविज्ञान :

  • प्राथमिक, माध्यमिक तथा तृतीयक निवारक कार्यक्रम।
  • मनोवैज्ञानिकों की भूमिका -शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से चुनौती प्राप्त व्यक्तियों, जैसे वृद्ध व्यक्तियों के पुनर्वासन के लिए सेवाओं का आयोजन।
  • पदार्थ दुरूपयोग, किशोर अपराध, आपराधिक व्यवहार से पीड़ित व्यक्तियों का पुनर्वास।
  • हिंसा के शिकार व्यक्तियों का पुनर्वास।
  • HIV/AIDS रोगियों का पुनर्वास। सामाजिक अभिकरणों की भूमिका।

सुविधावंचित समूहों पर मनोविज्ञान का अनुप्रयोग :

  • सुविधावंचित, वंचित की संकल्पनाएं, सुविधावंचित तथा वंचित समूहों के सामाजिक, भौतिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक परिणाम, सुविधावंचितों का विकास की ओर शिक्षण तथा अभिप्रेरण।
  • सापेक्ष एवं दीर्घकालिक वंचन।

सामाजिक एकीकरण की मनोवैज्ञानिक समस्या :

  • सामाजिक एकीकरण की संकल्पना, जाति, वर्ग, धर्म, भाषा विवादों और पूर्वाग्रह की समस्या।
  • अंतर्ससमूह तथा बहिर्समूह के बीच पूर्वाग्रह का स्वरूप तथा अभिव्यक्ति।
  • ऐसे विवादों और पूर्वाग्रहों के कारक तत्व।
  • विवादों और पूर्वाग्रहों से निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक नीतियां।
  • सामाजिक एकीकरण पाने के उपाय।

सूचना प्रौद्योगिकी और जनसंचार में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग :

  • सूचना प्रौदयोगिकी और जन-संचार गूंज का वर्तमान परिदृश्य और मनोवैज्ञानिकों की भूमिका।
  • सूचना प्रौद्योगिकी और जन संचार क्षेत्र में कार्य के लिए मनोविज्ञान व्यवसायियों का चयन और प्रशिक्षण।
  • सूचना प्रौद्योगिकी और जन-संचार माध्यम से दूरस्थ शिक्षण।
  • ई- कॉमर्स के द्वारा उद्यमशीलता।
  • बहुस्तरीय विपणन, दूरदर्शन का प्रभाव एवं सूचना प्रोद्योगिकी और जन-संचार के द्वारा मूल्य प्रतिपोषण।
  • सूचना प्रौद्योगिकी में अभिनव विकास के मनोवैज्ञानिक परिणाम।

मनोविज्ञान तथा आर्थिक विकास :

  • उपलब्धि, अभिप्रेरण तथा आर्थिक विकास, उद्यमशील व्यवहार की विशेषताएं।
  • उद्यमशीलता तथा आथ्िक विकास के लिए लोगों का अभिप्रेरण तथा प्रशिक्षण उपभोक्ता अधिकारी तथा उपभोक्ता संचेतना।
  • महिला उद्यमियों समेत युवाओं में उद्यमशीलता के संवर्धन के लिए सरकारी नीतियां।

पर्यावरण तथा संबदुध क्षेत्रों में मनोविज्ञान का अनुप्रयोग :

  • पर्यावरणीय मनोविज्ञान-ध्वनि, प्रदूषण तथा भीड़भाड़ के प्रभाव जनसंख्या मनोविज्ञान-जनसंख्या विस्फोटन और उच्च जनसंख्या घनत्व के मनोवैज्ञानिक परिणाम।
  • छोटे परिवार के मानदंड का अभिप्रेरण।
  • पर्यावरण के अवक्रमण पर द्रुत वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय विकास का प्रभाव।

मनोविज्ञानकेअन्यअनुप्रयोग:

(क) सैन्यमनोविज्ञान

  • चयन, प्रशिक्षण, परामर्श में प्रयोग के लिए रक्षा कार्मिकों के लिए मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की रचना।
  • सकारात्मक स्वास्थ्य संवर्धन के लिए रक्षा कार्मिकों के साथ कार्य करने के लिए मनोवैज्ञानिकों का प्रशिक्षण।
  • रक्षा में मानव-इंजीनियरी।

(ख) खेल मनोविज्ञान :

  • एथलीटों एवं खेलों के निष्पादन मैं सुधार मैं मनावैज्ञानिक हस्तक्षैप।
  • व्यष्टि एवं टीम खेलों मेँ भाग लेने वाले व्यक्ति।

(ग) समाजोन्मुख एवं समाजविरोधी

  • समाजोन्मुख एवं समाजविरोधी व्यवहार पर संचार माध्यमों का प्रभाव।

(घ) आतंकवाद

  • आतंकवाद का मनोविज्ञान।

लिंग का मनोविज्ञान :

  • भेदभाव के मुद॒दे, विविधता का प्रबंधन।
  • ग्लास सीलिंग प्रभाव, स्वतः: साधक भविष्योक्ति, नारी एवं भारतीय समाज।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Psychology Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

UPSC Psychology Optional Paper-1 Download

UPSC Psychology Optional Paper-2 Download

UPSC Psychology Syllabus in Hindi Optional Paper pdf

UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC Public Administration Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC Public Administration Syllabus in Hindi या lok prashasan syllabus in hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

UPSC Public Administration Syllabus in Hindi
UPSC Public Administration Syllabus in Hindi. UPSC Optional Paper Public Administration Syllabus in Hindi. UPSC Optional Paper Syllabus in Hindi Public Administration.

जैसा की आप जानते है UPSC Exam के लिए Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद Union Public Service Commission Exam या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC Public Administration या lok prashasan Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

upsc optional paper syllabus mains exam
UPSC Mains Two Optional Paper

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC Public Administration Exam Syllabus in Hindi Optional Subject Paper-I

प्रशासनिक सिद्धांत

1. प्रस्तावना :

  • लोक प्रशासन का अर्थ, विस्तार तथा महत्व, विल्सन के दृष्टिकोण से लोक प्रशासन, विषय का विकास तथा इसकी वर्तमान स्थिति, नया लोक प्रशासन, लोक विकल्‍प उपागम, उदारीकरण की चुनौतियां, निजीकरण, भूमंडलीकरण।
  • अच्छा अभिशासन : अवधारणा तथा अनुप्रयोग, नया लोक प्रबंध।

2. प्रशासनिक चिंतन :

  • वैज्ञानिक प्रबंध और वैज्ञानिक प्रबंध आंदोलन, क्लासिकी सिद्धांत, वेबर का नौकरशाही मॉडल, उसकी आलोचना और वेबर पश्चात्‌ का विकास, गतिशील प्रशासन (मेयो पार्कर फॉले), मानव संबंध स्कूल (एल्टोन मेयो तथ अन्य), कार्यपालिका के कार्य (सीआई बर्नाडे), साइमन निर्णयन सिद्धांत, भागीदारी प्रबंध (मैक ग्रेगर, आर.लिकर्ट, सी.आजीरिस)।

3. प्रशासनिक व्यवहार :

  • निर्णयन प्रक्रिया एवं तकनीक, संचार, मनोबल, प्रेरणा, सिद्धांत-अंतर्वस्तु, प्रक्रिया एवं समकालीन।
  • नेतृत्व सिद्धांत : पारंपरिक एवं आधुनिक।

4. संगठन :

  • सिद्धांत-प्रणाली, प्रासंगिकता; संरचना एवं रूप : मंत्रालय तथा विभाग, निगम, कंपनियां, बोर्ड तथा आयोग-तदर्थ तथा परामर्शदाता निकाय मुख्यालय तथा क्षेत्रीय संबंध। नियामक प्राधिकारी; लोक-निजी भागीदारी।

5. उत्तरदायित्व तथा नियंत्रण

  • उत्तरदायित्व और नियंत्रण की संकल्पनाएं, प्रशासन पर विधायी, कार्यकारी और न्यायिक नियंत्रण।
  • नागरिक तथा प्रशासन।
  • मीडिया की भूमिका, हित समूह, स्वैच्छिक संगठन, सिविल समाज, नागरिकों का अधिकार-पत्र (चार्टर)।
  • सूचना का अधिकार, सामाजिक लेखा परीक्षा।

6. प्रशासनिक कानून :

  • अर्थ, विस्तार और महत्व, प्रशासनिक विधि पर Dicey, प्रत्यायोजित विधान -प्रशासनिक अधिकरण।

7. तुलनात्मक लोक प्रशासन :

  • प्रशासनिक प्रणालियों पर प्रभाव डालने वाले ऐतिहासिक एवं समाज वैज्ञानिक कारक।
  • विभिन्‍न देशों में प्रशासन एवं राजनीति।
  • तुलनात्मक लोक प्रशासन की अद्यतन स्थिति।
  • परिस्थितिकी की एवं प्रशासन, रिग्सियन मॉडल एवं उनके आलोचक।

8. विकास गति की :

  • विकास की संकल्पना, विकास प्रशासन की बदलती परिच्छदिका।
  • विकास विरोधी अभिधारणा, नौकरशाही एवं विकास।
  • शक्तिशाली राज्य बनाम बाजार विवाद।
  • विकासशील देशों में प्रशासन पर उदारीकरण का प्रभाव।
  • महिला एवं विकास, स्वयं सहायता समूह आंदोलन।

9. कार्मिक प्रशासन :

  • मानव संसाधन विकास का महत्व, भर्ती प्रशिक्षण, जीविका विकास, हैसियत वर्गीकरण।
  • अनुशासन, निष्पादन मूल्यांकन, पदोन्‍नति, वेतन तथा सेवा शर्तें, नियोक्‍ता-कर्मचारी संबंध।
  • शिकायत निवारण क्रिया विधि, आचरण संहिता, प्रशासनिक आचार-नीति।

10. लोकनीति :

  • नीति निर्माण के मॉडल एवं उनके आलोचक।
  • संप्रत्ययीकरण की प्रक्रियाएं, आयोजन; कार्यान्वयन, मानीटरन, मूल्यांकन एवं पुनरीक्षा एवं उनकी सीमाएं।
  • राज्य सिद्धांत एवं लोकनीति सूत्रण।

11. प्रशासनिक सुधार तकनीकें :

  • संगठन एवं पद्धति, कार्य अध्ययन एवं कार्य प्रबंधन; ई-गवर्नेंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी; प्रबंधन सहायता उपकरण जैसे कि नेटवर्क विश्लेषण, MIS, PERT, CPM

12. वित्तीय प्रशासन :

  • वित्तीय तथा राजकोषीय नीतियां, लोक उधार ग्रहण तथा लोक ऋण। बजट प्रकार एवं रूप; बजट-प्रक्रिया, वित्तीय जवाबदेही, लेखा तथा लेखा परीक्षा।

UPSC Public Administration Exam Syllabus in Hindi Optional Subject Paper-II

भारतीय प्रशासन

1. भारतीय प्रशासन का विकास :

  • कौटिल्य का अर्थशास्त्र।
  • मुगल्र प्रशासन, राजनीति एवं प्रशासन में ब्रिटिश शासन का रिक्थ-लोक सेवाओं का भारतीयकरण।
  • राजस्व प्रशासन, जिला प्रशासन, स्थानीय स्वशासन।

2. सरकार का दार्शनिक एवं सांविधानिक ढांचा :

  • प्रमुख विशेषताएं एवं मूल्य आधारिकाएं; संविधानवाद।
  • राजनैतिक संस्कृति।
  • नौकरशाही एवं लोकतंत्र; नौकरशाही एवं विकास।

3. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम :

  • आधुनिक भारत में सार्वजनिक क्षेत्र, सार्वजनिक क्षैत्र उपक्रमों के रूप।
  • स्वायत्ता, जवाबदेही एवं नियंत्रण की समस्याएं।
  • उदारीकरण एवं निजीकरण का प्रभाव।

4. संघ सरकार एवं प्रशासन :

  • कार्यपालिका, संसद, विधायिका-संरचना, कार्य, कार्य प्रक्रियाएं।
  • हाल की प्रवृत्तियां, अंतराशासकीय संबंध।
  • कैबिनेट सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, केन्द्रीय सचिवालय।
  • मंत्रालय एवं विभाग, बोर्ड, आयोग, संबंदध कार्यालय, क्षेत्र संगठन।

5. योजनाएं एवं प्राथमिकताएं:

  • योजना मशीनरी, योजना आयोग एवं राष्ट्रीय विकास परिषद की भूमिका, रचना एवं कार्य, संकेतात्मक आयोजना।
  • संघ एवं राज्य स्तरों पर योजना निर्माण प्रक्रिया।
  • संविधान संशोधन (1992) एवं आर्थिक विकास तथा सामाजिक न्याय हेतु विकेन्द्रीकरण आयोजना।

6. राज्य सरकार एवं प्रशासन:

  • संघ-राज्य प्रशासनिक, विधायी एवं वित्तीय संबंध।
  • वित्त आयोग भूमिका; राज्यपाल; मुख्यमंत्री।
  • मंत्रिपरिषद; मुख्य सचिव; राज्य सचिवालय; निदेशालय।

7. स्वतंत्रता के बाद से जिला प्रशासन :

  • कलेक्टर की बदलती भूमिका, संघ-राज्य-स्थानीय संबंध, विकास प्रबंध एवं विधि एवं अन्य प्रशासन के विध्यर्थ, जिला प्रशासन एवं लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण ।

8. सिविल सेवाएं :

  • सांविधानिक स्थिति; संरचना, भर्ती, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण।
  • सुशासन की पहल; आचरण संहिता एवं अनुशासन; कर्मचारी संघ।
  • राजनीतिक अधिकार; शिकायत निवारण क्रियाविधि; सिवित्र सेवा की तटस्थता।
  • सिविल सेवा सक्रियतावाद।

9. वित्तीय प्रबंध :

  • राजनीतिक उपकरण के रूप में बजट; लोक व्यय पर संसदीय नियंत्रण।
  • मौंद्रिक एवं राजकोषीय क्षेत्र मेँ वित्त मंत्रालय की भूमिका।
  • लेखाकरण तकनीक; लेखापरीक्षा।
  • लेखा महानियंत्रक एवं भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की भूमिका।

10. स्वतंत्रता के बाद से हुए प्रशासनिक सुधार :

  • प्रमुख सरोकार; महत्वपूर्ण समितियां एवं आयोग।
  • वित्तीय प्रबंध एवं मानव संसाधन विकास में हुए सुधार।
  • कार्यान्‍्वयन की समस्याएं।

11. ग्रामीण विकास :

  • स्वतंत्रता के बाद से संस्थान एवं अभिकरण।
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रम; फोकस एवं कार्यनीतियां।
  • विकेन्द्रीकरण पंचायती राज; 73वां संविधान संशोधन।

12. नगरीय स्थानीय शासन :

  • नगरपालिका शासन : मुख्य विशेषताएं, संरचना वित्त एवं समस्या क्षेत्र, 74वां संविधान संशोधन।
  • विश्वव्यापी स्थानीय विवाद; नया स्थानिकतावाद; विकास गतिकी।
  • नगर प्रबंध के विशेष संदर्भ में राजनीति एवं प्रशासन।

13. कानून व्यवस्था प्रशासन :

  • ब्रिटिश रिक्थ; राष्ट्रीय पुलिस आयोग; जांच अभिकरण।
  • विधि व्यवस्था बनाए रखने तथा उपप्लव एवं आतंकवाद का सामना करने में पैरामिलिटरी बलों समेत केन्द्रीय एवं राज्य अभिकरणों की भूमिका।
  • राजनीति एवं प्रशासन का अपराधीकरण; पुलिस लोक संबंध; पुलिस में सुधार।

14. भारतीय प्रशासन में महत्वपूर्ण मुद्दे :

  • लोक सेवा मेँ मूल्य; नियामक आयोग; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग।
  • बहुदलीय शासन प्रणाली में प्रशासन की समस्याएं।
  • नागरिक प्रशासन अंतराफलक।
  • अष्टाचार एवं प्रशासन; विपदा प्रबंधन।

List of Books UPSC Public Administration for Hindi Medium Students

  • Lok Prashasan by M Laxmikanth 
  • Lok Prasasan by Mukesh Maheshwari
  • Lok Prashasan Ke Naye Ayam by Mohit Bhattacharya
  • Prashasnik Chintak by Prasad and Prasad
  • Prashnottri Lok Prashashan (Paper I & II) by Arihant

List of Books UPSC Public Administration for English Medium Students

  • Indian Public Administration: Institutions and Issues
  • Public Administration by Laxmikanth
  • New Horizons of Public Administration by Mohit Bhattacharya
  • Administrative Thinkers by D. Ravindra Prasad
  • Public Administration by Fadia and Fadia
  • Administrative Theories And Management Thought by Sapru
  • Public Administration and Public Affairs by Nicholas Henry

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Public Administration Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

IAS | UPSC Public Administration Previous Year Question Paper 

UPSC Public Administration Optional Paper-1 Download

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UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

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When did UPSC introduce Public Administration as an autonomous discipline in the IAS examination?

सन 1887 में Public Administration को एक Saprate Subject के रूप में UPSC में जोड़ा गया। एक IAS Officer के लिए Public Administration को भली प्रकार से समझ कर जांच के क्षेत्र में अपनी Knowledge का उपयोग करना ही इस Subject का Main Purpose है।

I am graduate with English literature and education may I choose public administration in UPSC optional subject?

Yes.

UPSC Zoology Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC Zoology Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC Zoology Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC Zoology Exam Syllabus In Hindi – Optional Subject Paper-I

अरज्जुकी और रज्जुकी :

  • विभिन्‍न फाइलों का उपवर्गों तक वर्गीकरण एवं संबंध; एसीलोमेटा और सीलोमेटा; प्रोटोस्टोम और ड्यूटेरोस्टोम, बाइलेटरेलिया और रेडिएटा, प्रोटिस्टा पेराजोआ, ओनिकोफोरा तथा हेमिकॉरडाटा का स्थान; सममिति।
  • प्रोटोजोआ : गमन, पोषण तथा जनन, लिंग पेरामीशियम, मॉनोसिस्टिस प्लाज्मोडियम तथा लीशमेनिया के सामान्य लक्षण एवं जीवन-वृत्त।
  • पोरिफेरा : कंकाल, नालतंत्र तथा जनन।
  • नीडेरिया : बहुरूपता; रक्षा संरचनाएं तथा उनकी क्रियाविधि; प्रवाल भित्तियां और उनका निर्माण, गेटाजेनेसिस, ओबीलिया और औरीलिया के सामान्य लक्षण एवं जीवन-वृत्त।
  • प्लैटिहेल्मिथीज : परजीवी अनुकूलन; फैसिओला तथा टीनिया के सामान्य लक्षण एवं जीवन-वृत्त तथा उनके रोगजनक लक्षण।
  • नेमेटहेल्मेंथीज : एस्केरिस एवं बुचेरेरिया के सामान्य लक्षण, जीवन-वृत्त तथा परजीवी अनुकूलन।
  • एनेलीडा : सीलोम और विखंडता, पॉलीकीटों में जीवन-विधियां, नेरीस (नीऐंथीस), केंचुआ (फेरिटिमा) तथा जोंक के सामान्य लक्षण तथा जीवन-वृत्त।
  • आर्थरोपोडा : क्रस्टेशिया में डिंबप्रकार और परजीविता, आओ्रोपोडा (झींगा, तिलचट्टा तथा बिच्छु) में इृष्टि और श्वसन; कीटों (तिलचिट्टा, मच्छर, मक्खी, मधुमक्खी तथा तितली) में मुखांगों का रुपांतरण, कीटों में कार्यांतण तथा इसका हार्मोनी नियमन, दीमकों तथा मधु-मक्खियों का सामाजिक व्यवहार।
  • मोलस्का : अशन, श्वसन, गमन, लैमेलिडेन्स, पाइला तथा सीपिया के सामान्य लक्षण एवं जीवन-वृत्त, गैस्ट्रोपोडों में ऐंठन तथा अव्यावर्तन।
  • एकाइनोडमेंटा : अशन, श्वसन, गमन, डिब्ब प्रकार, एस्टीरियस के सामान्य लक्षण तथा जीवन-वृत्त।
  • प्रोटोकॉर्डेटा : रज्जुकियों का उदभव, ब्रेकियोस्टोमा तथा हर्डमानिया के सामान्य लक्षण तथा जीवन-वृत्त।
  • पाइसीज : श्वसन, गमन तथा प्रवासन।
  • एम्फिबिया : चतुष्पादों का उदूभव, जनकीय। देखभाल, शावकांतरण।
  • रैप्टीलियावर्ग : सरीसूपों की उत्पति, करोटि के प्रकार, स्फेनोडॉन तथा मगरमच्छों का स्थान।
  • एवीज; पक्षियों का उद्भव, उड़्डयन-अनुकूलन तथा प्रवासन।
  • मेलिया : स्तनधारियों का उद्भव, दंतविन्यास, अंडा देने वाले स्तनधारियों, कोष्ठाधारी, स्तनधारियों, जलीय स्तनधारियों तथा प्राइमेटों के सामान्य लक्षण, अंतःस्रावी ग्रंथियां (पीयूष ग्रंथि, अवट्ट ग्रंथि, परावट्र ब्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि अग्न्याशय, जनन गंथि) तथा उनमें अंतसंबंध।
  • कशेरूकी प्रणियों के विभिन्‍न तंत्रों का तुलनात्मक, कार्यात्मक शरीर (अध्यावरण तथा इसके व्युत्पाद, अंत: कंकाल, चलन अंग, पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, हृदय तथा महाधमनी चारों सहित परिसंचारी तंत्र, मृत्र-जनन तंत्र, मस्तिष्क तथा ज़ानेन्द्रियां (आंख तथा कान)।

पारिस्थितिकी:

  • जीवनमंडल: जीवनमंडल की संकल्पना; बायोम, जैवभूरसायन चक्र, ग्रीन हाउस प्रभाव सहित वातावरण मैं मानव प्रेरित परिवर्तन, पारिस्थितिक अनुक्रम, जीवोम तथा ईकोटोन। सामुदायिक पारिस्थितिकी।
  • पारितंत्र की संकल्पना, पारितंत्र की संरचना एवं कार्य, पारितंत्र के प्रकार, पारिस्थितिक अनुक्रम, पारिस्थितिक अनुकूलन।
  • समष्टि, विशेषताएं, समष्टि गतिकी, समष्टि स्थिरीकरण।
  • प्राकृतिक संसाधनों का जैव विविधता एवं विवधता संरक्षण।
  • भारत का वन्य जीवन।
  • संपोषणीय विकास के लिए सुदूर सुग्राहीकरण।
  • पर्यावरणीय जैवनिम्नीकरण, प्रदूषण तथा जीवमंडल पर इसके प्रभाव एवं उसकी रोकथाम।

जीव पारिस्थितिकी :

  • व्यवहार: संवेदी निस्यंदन, प्रतिसंवेदिता, चिहन उद्दीपन, सीखना एवं स्मृति, वृत्ति, अभ्यास, प्रानुकूलन, अध्यंकन।
  • चालन में हार्मोनों की भूमिका, संचेतन प्रसार में फीरोमोनों की भूमिका : गोपकता, परभक्षी पहचान, परभक्षी तौर तरीके, प्राइमेटों में सामाजिक सोपान, कीटों में सामाजिक संगठन।
  • अभिविन्यास, संचालन, अभीगृह, जैविक लय; जैविक नियतकालिकता, ज्वरीय, ऋतुपरक तथा दिवसप्राय लय।
  • यौन दवंदव, स्वार्थपरता, नातेदारी एवं परोपकारिता समेत प्राणी-व्यवहार के अध्ययन की विधियां।

आर्थिक प्राणि विज्ञान :

  • मधुमक्खी पालन, रेशमकीट पालन, लाखकीट पालन, शफरी संवर्ध, सीप पालन, झींगा पालन, कृमि संवर्ध।
  • प्रमुख संक्रमाक एवं संचरणीय रोग (मलेरिया, फाइलेरिया, क्षय रोग, हैजा तथा एड्स), उनके वाहक, रोगाणु तथा रोकथाम।
  • पशुओं तथा मवेशियों के रोग, उनके रोगानणु (हेलमिन्थस) तथा वाहक (चिंचड़ी, कुटकी, टेबेनस, स्टोमोक्सिस)।
  • गन्ने के पीड़क (पाइरिला परपुसिएला), तिलहन का पीड़क (ऐकिया जनाटा) तथा चावल का पीड़क (सिटोफलस ओरिजे)।
  • पारजीनी जंतु।
  • चिकित्सकीय जैव प्रौद्योगिकी, मानव आनुवंशिक रोग एवं आनुवंशिक काउंसिलंग, जीन चिकित्सा।
  • विविध जैव प्रौद्योगिकी।

जैवसांख्यिकी :

  • प्रयोगों की अभिकल्पना : निराकरणी परिकल्पना; सहसंबंध, समाश्रयण, केन्द्रीय प्रवृत्ति का वितरण एवं मापन, काई-स्कवेयर, विद्यार्थी-टेस्ट, एफ-टेस्ट (एकमार्गी तथा दूविमार्गी एफ-टेस्ट)।

उपकरणीयपदूधति :

  • स्पेक्ट्रमी प्रकाशमापित्र प्रावस्था विपर्यास एवं प्रतिदीप्ति सूक्ष्म दर्शिकी, रेडियोऐक्टिव अनुरेखक, द्रुत अपकेन्द्रित्र, जेल एलेक्ट्रोफोरेसिस, PCR, ALISA,FISH, एवं गुणसूत्रपेंटिंग।
  • लेक्ट्रिन सूक्ष्मदर्शी (TEM,SEM)

UPSC Zoology Exam Syllabus In Hindi – Optional Subject Paper-II

कोशिका जीव विज्ञान :

  • कोशिका तथा इसके कोशिकांगों (कैंद्रक, प्लाज्मका, झिल्ली, माइटोकौीडरिया, गॉल्जीकाय, अंतर्द्रव्यी जालिका, राइबोसोम तथा लाइसोसोम्स) की संरचना एवं कार्य, कोशिका-विभा (समसूत्री तथा अर्दधसूत्री), समसूत्री तर्कु तथा समसूत्री तंत्र, ग्रुणसूत्र गति क्रोमोसोम प्रकार पॉलिटीन एवं लैव्रश, क्रोमैटिन की व्यवस्था, कोशिकाचक्र नियमन।
  • न्यूक्लीइक अम्ल सांस्थितिकी, DNA अनुकल्प, DNA प्रतिकृति, अनुलेखन, RNA प्रक्रमण, स्थानांतरण, प्रोटीन वलन एवं परिवहन।

आनुवंशिकी :

  • जीन की आधुनिक संकल्पना, विभकत जीन, जीन-नियमन, आनुवंशिक-कूट।
  • लिंग गुणसूत्र एवं उनका विकास, ड्रोसोफिला तथा मानव में लिंग-निर्धारण।
  • वंशागति के मेंडलीय नियम, पुनर्योजन, सहलग्रता, बजहुयुग्म विकल्पों, रक्त समूहों की आनुवंशिकी, वंशावली विश्लेषण, मानव मैं वंशागत रोग।
  • उत्परिवर्तन तथा उत्परिवर्तजनन।
  • पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी, वाहकों के रूप में प्लैजमिड्स, कॉसमिड्स, कृत्रिम गुणसूत्र, पारजीनी, DNA क्लोनिंग तथा पूर्ण क्लोनिंग (सिद्धांत तथा क्रिया पद्धति)।
  • प्रोकैरियोट्स तथा यूकैरियोट्स में जीन नियमन तथा जीन अभिव्यक्ति।
  • संकेत अणु, कोशिका मृत्यु, संकेतन पथ मैं दोष तथा परिणाम।
  • RELP, RAPD एवं AFLP तथा फिंगरप्रिटिंग में अनुप्रयोग, राइबोजाइम प्रौद्योगिकी, मानव जीनोम परियोजना, जीनोमिक्स एवं प्रोटोमिक्स।

विकास :

  • जीवन के उददभव के सिद्धांत
  • विकास के सिद्धांत; प्राकृतिक वरण, विकास मैं परिवर्तन की भूमिका, विकासात्मक प्रतिरूप, आणविक ड्राइव, अनुहरण विभिन्‍नता, पृथक्करण एवं जाति उद्भवन।
  • जीवाश्म आंकड़ों के प्रयोग से घोड़े, हाथी तथा मानव का विकास।
  • हार्डी-वीनबर्ग नियम।
  • महादवीपीय विस्थापन तथा प्रणियों का वितरण।

वर्गीकरण-विज्ञान :

  • प्राणिवैज्ञानिक नामावली, अंतर्राष्ट्रीय नियम, क्लैडिस्टिक्स, वाण्विक वर्गिकी एवं जैव विविधता।

जीव रसायन :

  • कार्बोहाइड्रेट, वसाओं, वसाअम्लों एवं कोलेस्टेरॉल, प्रोटीनों एवं अमीनों अम्लों, न्यूक्लिइक अम्लों की संरचना एवं भूमिका, बायो एनर्जेटिक्स।
  • ग्लाइकोलाइसिस तथा क्रब्स चक्र, ऑक्सीकरण तथा अपचयन, ऑक्सीकरणी फास्फोरिलेशन, ऊर्जा संरक्षण तथा विमोचन, ATP चक्र, चक्रीय AMP – इसकी संरचना तथा भूमिका।
  • हार्मोन वर्गीकरण (स्टेराइड तथा पेप्टाइड हार्मोन), जैव संश्लेषण तथा कार्य।
  • एंजाइम: क्रिया के प्रकार तथा क्रिया विधियां।
  • विटामिन तथा को-एंजाइम।
  • इम्यूनोग्लोब्यूलिन एवं रोधक्षमता।

कार्यिकी (स्तन धारियों के विशेष संदर्भ में) :

  • रक्‍त की संघटना तथा रचक, मानव मैं रक्‍त समूह तथा रत्न कारक, स्कंदन के कारक तथा क्रिया विधि; लोह उपापचय, अम्ल क्षारक साम्य, तापनियमन, प्रतिस्कंदक।
  • हीमोग्लोबिन: रचना प्रकार एवं ऑक्सीजन तथा कार्बनडाईऑक्साइड परिवहन में भूमिका।
  • पाचन एवं अवशोषण : पाचन में लार ग्रंथियों, चकृत, अग्न्याशय तथा आंत्र ग्रंथियों की भूमिका।
  • उत्सर्जन : नेफान तथा मूत्र विरचन का नियमन; परसरण नियमन एवं उत्तससर्जी उत्पाद।
  • पेशी: प्रकार, कंकाल पेशियों की संकुचन की क्रिया विधि, पेशियों पर व्यायाम का प्रभाव।
  • न्यूरॉन: तंत्रिका आवेग – उसका चालन तथा अंतग्रंथनी संचरण: न्यूरोट्रांसमीटर।
  • मानव में दृष्टि, श्रवण तथा प्राणबोध।
  • जनन की कार्यिकी, मानव में यौवनारंभ एवं रजोनिवृत्ति।

परिवर्धन जीवविज्ञान :

  • युग्मक जनन; शुक्र की रचना, मैमेलियन शुक्र की पात्रे एवं जीवे धारिता। अंड जनन, पूर्ण शक्तता, निषेचन, मार्फजेनिसस एवं मा्फोजेन, ब्लास्टोजेनिसस, शरीर अक्ष रचना की स्थापना, फेट मानचित्र, मेढ़क एवं चूजे मैं गेस्ट्रलेशन, चूजे में विकासाधीन जीन, अंगांतरक जीन, आंख एवं हृदय का विकास, सर्तनियों में अपरा।
  • कोशिका वंश परंपरा, कोशिका-कोशिका अन्योन्य क्रिया, आनुवंशिक एवं प्रेरित विरूपजनकता, एंजीविया मैं कायांतरण के नियंत्रण मैं वायरोक्सिन की भूमिका, शवकीजनन एवं चिरभूण्साता, कोशिका मृत्यु, कालप्रभावन।
  • मानव में विकासीय जीन, पात्रे निषेचन एवं भ्रूण अंतरण, क्लोनिंग।
  • स्टेमकोशिका : स्रोत, प्रकार एवं मानव कल्याण में उनका उपयोग।
  • जाति अवर्तन नियम।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Zoology Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

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UPSC Zoology Syllabus in Hindi Optional Paper pdf

UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।

UPSC Economics Syllabus in Hindi

दोस्तों TOP SARKARI RESULT पर आपका स्वागत है, UPSC Syllabus में UPSC Economics Syllabus in Hindi Optional Paper Syllabus के बारे में बताने से पहले हम आपको कुछ Important Information देना चाहते है।

जैसा की आप जानते है UPSC Exam (Union Public Service Commission Exam) या UPSC Civil Services Exam में आपको तीन चरणों से होकर गुजरना होता है : (1) UPSC Prelims (2) UPSC Main (3) UPSC Interview.

Eligibility for UPSC Exam qualify करने के बाद UPSC Prelims Exam / IAS Prelims या Civil Services Preliminary Examination एक Objective Type Exam जिसमे Minimum Qualifying Marks Obtain करने होते है और उसके आधार पर Final Merit List बनती है।

UPSC Main Exam में हमने Total 9 Paper देने होते है जिसमे UPSC Economics Optional Paper है UPSC Main Exam में यह Paper-6 और Paper-7 होता है प्रत्येक Paper 250 Marks का होता है यानि (250 + 250 = 500 Marks).

UPSC Exam Syllabus में Total 25 Optional Subject होते है, जिसमे से हमे 1 Subject अपनी इच्छा से चुनना होता है और उस Subject के आधार पर हमे Paper-6 और Paper-7 देना होता है :

UPSC Optional Subject Syllabus | IAS Optional Subject Syllabus in Hindi

UPSC Exam Syllabus के 25 Optional Subject की सूची इस प्रकार है:

  1. UPSC Agriculture Optional Paper
  2. UPSC Animal Husbandry and Veterinary Science Optional Paper
  3. UPSC Anthropology Optional Paper 
  4. UPSC Botany Optional Paper 
  5. UPSC Chemistry Optional Paper 
  6. UPSC Civil Engineering Optional Paper 
  7. UPSC Commerce & Accountancy Optional Paper 
  8. UPSC Economics Optional Paper 
  9. UPSC Electrical Engineering Optional Paper 
  10. UPSC Geography Optional Paper 
  11. UPSC Geology Optional Paper 
  12. UPSC History Optional Paper 
  13. UPSC Law Optional Paper 
  14. UPSC Management Optional Paper 
  15. UPSC Mathematics Optional Paper 
  16. UPSC Mechanical Engineering Optional Paper
  17. UPSC Medical Science Optional Paper 
  18. UPSC Philosophy Optional Paper 
  19. UPSC Physics Optional Paper 
  20. UPSC Political Science & International Relations Optional Paper 
  21. UPSC Psychology Optional Paper 
  22. UPSC Public Administration Optional Paper 
  23. UPSC Sociology Optional Paper 
  24. UPSC Statistics Optional Paper 
  25. UPSC Zoology Optional Paper 

UPSC ECONOMICS EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-I

उन्‍नत व्यष्टि अर्थशास्त्र :

  • कीमत निर्धारण के मार्शलियन एवं वालरासियम उपागम।
  • वैकल्पिक वितरण सिद्धांत : रिकॉर्डों काल्डोर, कलीकी।
  • बाजार संरचना: एकाधिकारी प्रतियोगिता, दृविअधिकार, अल्पाधिकार।
  • आधुनिक कल्याण मानदंड: परेटो हिकस एवं सितोवस्की, ऐरो का असंभावना प्रमेय, ए.के. सैन का सामाजिक कल्याण फलन।

उन्‍नत समष्टि अर्थशस्त्र :

  • नियोजन आय एवं ब्याज दर निर्धारण के उपागम: क्लासिकी, कीन्स (8$-,५) वक्र नवक्लासिकी संश्लेषण एवं नया क्लासिकी, ब्याज दर निर्धारण एवं ब्याज दर संरचना के सिद्धांत।

मुद्रा बैंकिंग एवं वित्त:

  • मुद्रा की मांग की पूर्ति : मुद्रा का मुद्रा गुणक मात्रा सिद्धांत (फिशर, पीक फ्राइडमैन) तथा कीन का मुद्रा के लिए मांग का सिद्धांत, बंद और खुली अर्थव्यवस्था में मुद्रा प्रबंधन के लक्ष्य एवं साधन, केनद्रीय बैंक और खजाने के बीच संबंध, मुद्रा की वृद्धि दर पर उच्चतम सीमा का प्रस्ताव।
  • लोक वित्त और बाजार अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका: पूरी के स्वीकरण में, संसाधनों का विनिधान और वितरण और संवृद्धि, सरकारी राजस्व के स्रोत, करों एवं उपदानों के रूप, उनका भार एवं प्रभाव, कराधान की सीमाएं, ऋण, क्राउंडिंग आउट प्रमाण एवं ऋण लेने की सीमाएं, लोक व्यय एवं उसके प्रभाव।

अंतर्राष्ट्रीय अर्थशस्त्र :

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के पुराने और नए सिद्धांत

  • तुलनात्मक लाभ।
  • व्यापार शर्ते एवं प्रस्ताव वक्र।
  • उत्पाद चक्र एवं निर्णायक व्यापार सिद्धांत।
  • व्यापार, संवृद्धि के चालक के रूप में और खुली अर्थव्यवस्था में अवविकास के सिद्धांत।

संरक्षण के स्वरूप : टैरिफ एवं कोटा

भुगतान शेष समायोजन; वैकल्पिक उपागम

  • कीमत बनाम आय, नियम विनियम दर के अधीन आय के समायोजन।
  • मिश्रित नीति के सिद्धांत।
  • पूंजी चलिष्गुणता के अधीन विनियम दर समायोजन।विकासशील देशों के लिए तिरती दरें और उनकी विवक्षा, मुद्रा(करेंसी) बोर्ड।
  • व्यापार नीति एवं विकासशील देश।
  • BPO, खुली अर्थव्यवस्था समष्टि मॉडल में समायोजन तथा नीति समनवय। सटूटा।
  • व्यापार गुट एवं मौद्रिक संघ।
  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) TRIM, TRIPS, घरेलू उपाय WTO बातचीत के विभिन्‍न चक्र।

संवृद्धि एवं विकास:

  • संवृद्धि के सिद्धांत; हैरैंड का मॉडल, अधिशेष श्रमिक के साथ विकास का ल्यूइस मॉडल, संतुलित एवं असंतुलित संवृद्धि, मानव पूंजी एवं आर्थिक वृद्धि।
  • कम विकसित देशों का आर्थिक विकास का प्रक्रम: आर्थिक विकास एवं संरचना परिवर्तन के विषय में मिडिल एवं कुजमेंट्स, कम विकसित देशों के आर्थिक विकास में कृषि की भूमिका।
  • आर्थिक विकास एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश, बहुराष्ट्रीयों की भूमिका।
  • आयोजना एवं आर्थिक विकास: बाजार की बदलती भूमिका एवं आयोजना, निजी सरकारी साझेदारी।
  • कल्याण संकेतक एवं वृद्धि के माप – मानव विकास के सूचक, आधारभूत आवश्यकताओं का उपागम।
  • विकास एवं पर्यावरणी धारणीता- पुनर्नवीकरणीय एवं अपुनर्नवीकरणीय संसाधन, पर्यावरणी अपकर्ष, अंतर पीढो इक्विटो विकास।

UPSC ECONOMICS EXAM SYLLABUS IN HINDI – OPTIONAL SUBJECT PAPER-II

स्वतंत्रतापूर्व युग में भारतीय अर्थव्यवस्था :

  • भूमि प्रणाली एवं इसके परिवर्तन, कृषि का वाणिज्यीकरण, अपवहन सिद्धांत, अबधंता सिद्धांत एवं समालोचना, निर्माण एवं परिवहन: जूट, कपास, रेलवे मुद्रा एवं साख।

स्वतंत्रता के पश्चात्‌ भारतीय अर्थव्यवस्था :

उदारीकरण के पूर्व का युग:

  • वकील, गाडगिल एवं वी. के. आर. वी. आर. के योगदान।
  • कृषि: भूमि सुधार एवं भूमि पट्टा प्रणाली, हरित क्रान्ति एवं कृषि में पूंजी निर्माण।
  • संघटन एवं संवृदधि में व्यापार प्रवृतियां, सरकारी एवं निजी क्षेत्रकों की भूमिका, लघु एवं कुटीर उदयोग।
  • राष्ट्रीय एवं प्रतिव्यक्ति आय: स्वरूप, प्रवृतियां, सकल एवं क्षेत्रकीय संघटन तथा उनमें परिवर्तन।
  • राष्ट्रीय आय एवं वितरण को निर्धारित करने वाले स्थूल कारक, गरीबी के माप, गरीबी एवं असमानता में प्रवृतियां।

उदारीकरण के पश्चात्‌ का युग :

  • नया आर्थिक सुधार एवं कृषि: कृषि एवं WTO, खादय प्रसंस्करण, उपदान, कृषि कीमतें एवं जन वितरण प्रणाली, कृषि संवृद्धि पर लोक व्यय का समाघात।
  • नई आर्थिक नीति एवं उद्योग: औदयोगिक निजीकरण, विनिवेश की कार्य नीति, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तथा बहुराष्ट्रीयों की भूमिका।
  • नई आर्थिक नीति एवं व्यापार: बौद्धिक संपदा अधिकार: TEIPS, TRIMS, GATS तथा EXIM नई नीति की विवक्षाएं।
  • नई विनियम दर व्यवस्था आंशिक एवं पूर्ण परिवर्तनीयता।
  • नई आर्थिक नीति एवं लोक वित्त: राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम, बारहवां एवं वित्त आयोग एवं राजकोषीय संघवाद का राजकोषीय समेकन।
  • नई आर्थिक नीति एवं मौद्रिक प्रणाली, नई व्यवस्था में RBI की भूमिका
  • आयोजन केन्द्रीय आयोजन से सांकेतिक आयोजन तक, विकेन्द्रीकृत आयोजना और संवृद्धि हेतु बाजार एवं आयोजना के बीच संबंध : 73 वां एवं 74 वां संविधान संशोधन।
  • नई आर्थिक नीति एवं रोजगार : रोजगार एवं गरीबी, ग्रामीण मजदूरी, रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन योजनाएं, नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना।

IAS | UPSC Previous Year Question Paper 

किसी भी Government Job Exam को Crack करने के लिए उस Exam का Exam Pattern और Exam Syllabus दोनों ही जानना जरूरी है IAS | UPSC Commerce And Accountancy Previous Year Question Paper नीचे दिए गए हैं : 

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UPSC Civil Services Exam Syllabus PDF

आशा करते हैं इस Blog में दी गई जानकारी आपको UPSC Civil Services Exam को Crack करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो ।